ऋषिकेश। वर्ल्ड हार्ट रिस्टार्ट डे के अवसर पर एम्स के मेडिकल एजुकेशन विभाग की ओर से संस्थान के सिक्योरिटी गार्डों को कॉर्डियक अरेस्ट से ग्रस्त लोगों की पहचान व बचाव का प्रशिक्षण दिया गया।
मंगलवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश के मेडिकल एजुकेशन विभाग की ओर से कप्रेशन ओनली लाइफ सपोर्ट कॉल्स की ट्रेनिंग दी गई, जिससे संस्थान में कार्यरत करीब 250 सिक्योरिटी गार्ड्स को कॉर्डियक अरेस्ट से ग्रस्त रोगियों की पहचान व बचाव के गुर सिखाए गए।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि एम्स निदेशक प्रोफेसर डॉ.रवि कांत ने कहा कि जीवन अमूल्य है, लिहाजा हम चाहते हैं कि जीवन के संरक्षण के लिए एम्स जैसे मेडिकल संस्थान में कार्यरत सभी कर्मचारियों के लिए इस तरह का प्रशिक्षण जरूरी है, जिससे चिकित्सा सहायता मिलने से पूर्व ग्रस्त रोगी की फौरी सहायता देकर उसकी जान बचाई जा सके। बतौर मास्टर ट्रेनर विभाग की प्रोफेसर डॉ.मनीषा नैथानी ने बताया कि कॉर्डियक अरेस्ट से ग्रस्त व्यक्ति की जान बचाने के लिए कंप्रेशन ओनली लाइफ सपोर्ट कॉल्स का अहम है। बताया कि संस्थान के प्रशिक्षित कर्मचारी अस्पताल परिसर व इसके बाहर भी ग्रस्त रोगी की सहायता कर सकते हैं। कप्रेशन से भी महज पांच से छह मिनट में किसी रोगी की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि इसके बाद संस्थान के अन्य विभागों के कर्मचारियों को भी कॉल्स का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
डॉ. नैथानी ने बताया कि ट्रेनिंग के बाद प्रशिक्षित कर्मचारियों की लिखित प्रयोगात्मक परीक्षा ली गई और प्रमाणपत्र दिए जाएंगे।
इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ.शालिनी राव,डॉ.वसंता कल्याणी, डॉ.रुपिंदर देयोल, डॉ.मलार कोडी एस, डॉ.पद्मानिधि अग्रवाल, डॉ.कनव जैन, डॉ.क्रांति कुमार रेड्डी, अमृतवर्षा, दिव्या चावला, अरुण वर्गेश आदि मौजूद थे।
मंगलवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश के मेडिकल एजुकेशन विभाग की ओर से कप्रेशन ओनली लाइफ सपोर्ट कॉल्स की ट्रेनिंग दी गई, जिससे संस्थान में कार्यरत करीब 250 सिक्योरिटी गार्ड्स को कॉर्डियक अरेस्ट से ग्रस्त रोगियों की पहचान व बचाव के गुर सिखाए गए।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि एम्स निदेशक प्रोफेसर डॉ.रवि कांत ने कहा कि जीवन अमूल्य है, लिहाजा हम चाहते हैं कि जीवन के संरक्षण के लिए एम्स जैसे मेडिकल संस्थान में कार्यरत सभी कर्मचारियों के लिए इस तरह का प्रशिक्षण जरूरी है, जिससे चिकित्सा सहायता मिलने से पूर्व ग्रस्त रोगी की फौरी सहायता देकर उसकी जान बचाई जा सके। बतौर मास्टर ट्रेनर विभाग की प्रोफेसर डॉ.मनीषा नैथानी ने बताया कि कॉर्डियक अरेस्ट से ग्रस्त व्यक्ति की जान बचाने के लिए कंप्रेशन ओनली लाइफ सपोर्ट कॉल्स का अहम है। बताया कि संस्थान के प्रशिक्षित कर्मचारी अस्पताल परिसर व इसके बाहर भी ग्रस्त रोगी की सहायता कर सकते हैं। कप्रेशन से भी महज पांच से छह मिनट में किसी रोगी की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि इसके बाद संस्थान के अन्य विभागों के कर्मचारियों को भी कॉल्स का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
डॉ. नैथानी ने बताया कि ट्रेनिंग के बाद प्रशिक्षित कर्मचारियों की लिखित प्रयोगात्मक परीक्षा ली गई और प्रमाणपत्र दिए जाएंगे।
इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ.शालिनी राव,डॉ.वसंता कल्याणी, डॉ.रुपिंदर देयोल, डॉ.मलार कोडी एस, डॉ.पद्मानिधि अग्रवाल, डॉ.कनव जैन, डॉ.क्रांति कुमार रेड्डी, अमृतवर्षा, दिव्या चावला, अरुण वर्गेश आदि मौजूद थे।



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