नैनीताल: हाई कोर्ट ने गंगा नदी के संरक्षण के लिए अनशन कर जान देने वाले प्रो. जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद का पार्थिव शरीर आठ घंटे के भीतर एम्स ऋषिकेश से मातृसदन हरिद्वार लाने तथा मातृसदन में 76 घंटे तक अंतिम दर्शन के लिए रखने के आदेश पारित किए हैं।
कोर्ट ने उनके स्वामी सानंद के पार्थिव शरीर को सम्मान के साथ लाने व ले जाने के लिए एसएसपी हरिद्वार व देहरादून को जवाबदेह बनाया है। साथ ही यह भी कहा है कि इसके बाद पार्थिव शरीर उनकी इच्छानुसार एम्स ऋषिकेश को सौंप दिया जाए। हाई कोर्ट के सुबह करीब साढ़े दस बजे दिए फैसले पर शाम को सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एम्स प्रशासन के साथ ही हरिद्वार देहरादून जिला एवं पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली।
स्वामी सानंद के अनुयायी डॉ. विजय वर्मा ने याचिका दायर कर कहा कि स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद द्वारा गंगा की पवित्रता व अविरलता के लिए 113 दिनों तक अनशन किया। 11 अक्टूबर को उनकी मौत हो गई। मौत से पहले उन्होंने पार्थिव शरीर एम्स ऋषिकेश में रखने की इच्छा प्रकट की थी, लेकिन मृत्यु के बाद एम्स प्रशासन द्वारा किसी भी व्यक्ति को उनके अंतिम दर्शन की अनुमति नहीं दी। इस संबंध में प्रशासन व एम्स प्रशासन को प्रत्यावेदन भी दिए गए, जिसके बाद हाई कोर्ट में याचिका दायर करनी पड़ी। याचिकाकर्ता ने ङ्क्षहदू रीति रिवाज के साथ अंतिम संस्कार की अनुमति भी प्रदान करने की फरियाद भी की थी।


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