ऋषिकेश। बजरंग मुनि सामाजिक शोध संस्थान ऋषिकेश के देहरादून रोड स्तिथ प्रबन्ध कार्यालय में आज साप्ताहिक ज्ञान यज्ञ कार्यक्रम के तहत "भारतीय सांस्कृतिक चेतना एवं भारतीय समाज विषय" पर परिचर्चा गोष्ठी का आयोजन किया गया।कार्यक्रम का शुभारम्भ हवन कुंड में विश्व शांति हेतु आहुति डाल कर किया गया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुवे मुख्य वक्ता मौलिक चिंतक आचार्य पंकज ने बताया कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना और भारतीय समाज भारतीय अर्थात ज्ञान में जो रत हो   वह भारत सांस्कृतिक अर्थात वैदिक ज्ञान विज्ञान से समृत हो वैदिक चेतना ही सांस्कृतिक चेतना है जीवन मूल्यों के साथ वेद का समाजिक महत्व है देनिक जीवन में प्रातः से शयन तक जीवन प्रद्दती में वैदिक चिंतन का समावेश रहता है।प्रकृति के विभिन्न आयामों में मानवीय संवेदना को व्यवस्थति करते हुवे जीवन प्रद्धति का निर्वाहन होता है।जैसे सूर्य को अर्घ्य देना,हवन करना,उपनयन संस्कार करना,विवाह संस्कार करना,जीवन में 16 संस्कार सांस्कृतिक चेतना का ही स्वरूप है।वेद के मन्त्रों का विकास संस्कृति है और यंत्रों का विकास सभ्यता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुवे प्रमोद कुमार वात्सल्य ने कहा कि ब्रह्मांडीय व्यवस्था सांस्कृतिक चेतना का स्वरूप है बिना सांस्कृतिक बोध के जीवन नहीं चल सकता है।समाजसेवी डॉ राजे नेगी के संचालन में चले ज्ञान यज्ञ कार्यक्रम में उत्तम असवाल,टीकाराम देवरानी,यशवंत भंडारी,अनुसूया प्रसाद बिजलवान, प्रकाश बिजलवान, देवेश्वर प्रसाद रतूड़ी,सुरेन्द्र सिंह रोथान,उषा डोभाल, रमाकांत पाल,राजेश अरोरा,एस पी अग्रवाल,नरेश वर्मा,अग्निमित्र प्रसाद,तेजस्वी,अरविंद तिवारी, मंगल सिंह उपस्थित थे।

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