ऋषिकेश। बजरंग मुनि सामाजिक शोध संस्थान ऋषिकेश के देहरादून रोड स्तिथ प्रबन्ध कार्यालय में आज साप्ताहिक ज्ञान यज्ञ कार्यक्रम के तहत "जीव दया का सिद्धांत विषय" पर परिचर्चा गोष्ठी का आयोजन किया गया।कार्यक्रम का शुभारम्भ सामूहिक रूप से हवन कुंड में विश्व शांति हेतु आहुति डाल कर किया गया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुवे मुख्य वक्ता मौलिक विचारक बजरंग मुनि ने कहा कि कोई भी व्यक्ति व्यक्तिगत सीमा तक ही किसी अन्य पर दया कर सकता है, अमानत का उपयोग नहीं किया जा सकता। राजनैतिक सत्ता समाज की अमानत होती है, व्यक्तिगत नहीं। समाज में चार प्रकार के लोग होते है- मार्गदर्शक, रक्षक, पालक और सेवक मार्गदर्शक और पालक को प्रवृत्ति में दयालु होना चाहिए जबकि रक्षक और सेवक को दयालु प्रवृत्ति प्रधान नहीं होना चाहिए। न्यायाधीश को प्राप्त शक्ति तंत्र की अमानत होती है। न्यायाधीश को किसी भी मामले में किसी के साथ दया करने का अधिकार नहीं है।मनुष्य को छोडकर किसी अन्य जीव को मौलिक अधिकार प्राप्त नहीं है। पशु-पक्षी या पेड-पौधे का कोई मौलिक अधिकार नहीं होता।समाज किसी भी पशु जीव पेड-पौधे को अवध्य घोषित कर सकता है किन्तु कोई वर्ग नहीं कर सकता। किसी वर्ग द्वारा घोषित किसी पशु पक्षी को सम्मान देना अन्य वर्ग की मजबूरी नहीं। जो लोग गाय को माता न समझ कर पशु समझते है उनकी स्वतंत्रता में तब तक बाधा नहीं पहुॅचाई जा सकती जब तक सम्पूर्ण समाज ने मान्य न किया हो।सब प्रकार के जीवों के बीच संतुलन होना चाहिए। जीव दया का सिद्धांत असंतुलन पैदा करता है। दया या हिंसा करना व्यक्ति की स्वतंत्रता है, बाध्यता नहीं। बंदर, कुत्ते और नील गायों की बढती संख्या अव्यवस्था फैलाती है। बंदर हनुमान का भी प्रतीक हो सकता है और बालि का भी। भारत के वर्तमान कानूनों में दया का भाव अधिक होने के कारण अपराध भी बढ रहे है तथा आवारा पशुओं की संख्या भी अव्यवस्था फैला रही है। मेरा अपना अनुभव है कि जीव दया का सिद्धांत अधिक प्रभावी होने से अव्यवस्था फैलती है जैसा भारत में हो रहा है। सरकारों ने अनेक अनावश्यक कानून बना दिये है। पशुओं को किस प्रकार का कष्ट दिया जाये इसके भी नियम बनाये गये है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुवे संस्थान निदेशक आचार्य पंकज ने कहा कि जो विचारक या व्यवसायी हैं उन्हें दया और अहिंसा को अपनाना चाहिये किन्तु कभी राज्य पर दबाव नहीं बनाना चाहिये कि वह अहिंसा और दया को नीतियों का आधार बनाये। मेरे विचार से वर्तमान भारत में दयाभाव का विस्तार एक समस्या के रूप में विस्तार पा रहा है।इसे समाधान के रूप में आना चाहिए। संस्थान से जुड़े समाजसेवी डॉ राजे नेगी के संचालन में चले ज्ञान यज्ञ कार्यक्रम में उत्तम सिंह असवाल,समाज सेवी कमल सिंह राणा,संतोष मुनि,धूम सिंह रावत,अंकित नैथानी,रवि जैन,अमित गांधी
तेजस्वी,राजेश भण्डारी,राजेश भट्ट,रमाकांत पाल,आशुतोष डंगवाल,सरदार हरिचरण सिंह,सुतीश गुप्ता,प्रमोद कुमार वात्सल्य,अरविंद तिवारी,मंगल प्रसाद उपस्थित थे।
तेजस्वी,राजेश भण्डारी,राजेश भट्ट,रमाकांत पाल,आशुतोष डंगवाल,सरदार हरिचरण सिंह,सुतीश गुप्ता,प्रमोद कुमार वात्सल्य,अरविंद तिवारी,मंगल प्रसाद उपस्थित थे।


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