ऋषिकेश। विश्व धर्म संसद में महात्मा गांधी जी और मार्टिन लूथर के जीवन दर्शन पर आधारित कार्यक्रम में भारत से साध्वी भगवती सरस्वती जी, राजदूत दिनेश भाटिया, जत्थेदार पटना साहेब गुरूद्वारा ज्ञानी गुरूबचन सिंह जी, वेन भिक्खु संघसेना जी, श्री सुरेश चन्द्र खन्ना जी, संतों और विद्वानों ने सहभाग किया।
कार्यक्रम में सभी अतिथियों का अभिनन्दन विश्व धर्म संसद की चेयरमैन लैरी ग्रीनफील्ड ने किया। इस अवसर पर साध्वी भगवती सरस्वती जी ने भारतीय संतों का विश्च के लिये योगदान, वसुधैव कुटुुम्बकम् हेतु संतों की भूमिका, महात्मा गांधी जी के सत्य, अहिंसा और स्वच्छता पर आधारित विचारों पर प्रकाश डाला।
साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि आज के युवा मे गति है परन्तु उन्हे महात्मा गांधी और मार्टिन लूथर के विचारों पर आधारित दिशा की भी जरूरत है। हमें युवाओं को गति के साथ सकारात्मक दिशा भी देना होगा। साध्वी जी ने कहा कि मार्टिन लूथर और महात्मा गांधी जी के विचार हर युग के लिये सार्थक है।
ज्ञानी इकबाल सिंह जी ने कहा कि भारत में अलग-अलग धर्मो के लिये भी विशिष्ट स्थान है। भारत में सभी धर्मो के धर्मगुरू और अनुयायी साथ में रहकर एकता का संदेश पूरे विश्व में प्रसारित करते है। उन्होने कहा कि हमारा देश ने सर्वधर्म सम्भाव का मंत्र दिया है। उन्होने हिन्दु और हिन्दुत्व के विषय में भी जानकारी दी। पार्लियामेंट में आने के विषय में जानकारी देते हुये कहा कि पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज की प्रेरणा एवं आग्रह पर पहली बार आये है।
वेन भिक्खु संघसेना जी ने विश्व धर्म संसद में उपस्थित सभी अतिथियों को लद्दाख की धरती पर आमंत्रित किया। उन्होने स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के मार्गदर्शन में लद्दाख के ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंस द्वारा चलाये जा रहे प्रोजेक्ट कि विषय में अवगत कराया। वाटर, सेनिटैशन, हाइजीन और भारतीय संस्कृति और संस्कारों पर आधारित कायक्रम जी जानकारी दी।
इस कार्यक्रम के दौरान महात्मा   गांधी   जी और मार्टिन लूथर जी के उपर बनी शार्ट फिल्म भी दिखायी गयी। साथ ही 2 अक्टूबर को दिल्ली में माननीय प्रधानमंत्री जी के नेत्तृव में आयोजित कार्यक्रम जिसमें विश्व के लगभग 67 देशों के स्वच्छता मंत्रियों ने सहभाग किया था उस की चर्चा की गयी। गांधी जी का भजन ’वैष्णव जन तो तेने कहिये’ भी सुनाया गया।
साध्वी जी ने युवाओं से आह्वान किया की वे महात्मा गांधी जी एवं मार्टिन लूथर के विचारों को आत्मसात कर आगे बढ़े।

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