हरिद्वार: भारत माता मंदिर के संस्थापक पद्म भूषण स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि ने कहा कि केंद्र सरकार ने जल्द अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता प्रशस्त नहीं किया तो वह देह त्याग कर देंगे। कहा कि अगर केंद्र सरकार बहुसंख्यक आबादी की भावनाओं का सम्मान न कर बलिदान चाहती है तो यही किया जाएगा। उन्होंने मांग को पूरी करने के लिए सरकार को पांच दिसंबर तक का वक्त दिया है। एलान किया कि छह दिसंबर से वह हरकी पैड़ी पर बेमियादी अनशन करेंगे।

पत्रकारों से बातचीत करते हुए स्वामी सत्यमित्रानंद ने कहा अब मंदिर निर्माण से कम कुछ भी मान्य नहीं। अयोध्या में श्रीरामजन्म भूमि मंदिर निर्माण को जो भी प्रमाण चाहिए थे, वह सभी मिल चुके हैं, अब किसी प्रमाण की कोई आवश्यकता नहीं। उन्होंने कहा कि छह दिसंबर से शुरू होने वाला उनका विधिक रूप से मंदिर निर्माण की शुरुआत होने तक चलता रहेगा या फिर वह इस निमित्त अपनी देह का त्याग कर देंगे। अनशन में देश के तमाम संत शामिल होंगे और मंदिर निर्माण के पक्ष में उनके बाद एक-एक कर अपनी देह का त्याग कर देंगे। 

उन्होंने कहा कि पिछली बार राम मंदिर आंदोलन के दौरान उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह की मौजूदगी में मुस्लिम समुदाय से बातचीत कर उन्हें अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को राजी करा लिया था पर, तब प्रधानमंत्री के पीछे हटने की वजह से मामला आगे नहीं बढ़ सका। अब बहुसंख्यक हिन्दुओं के सब्र का बांध टूटता जा रहा है, अगर मंदिर निर्माण को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो देश में आंदोलन होंगे। यह देश-दुनिया और समाज के ठीक नहीं होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री के साथ ही विपक्ष से अपील की कि जनभावनाओं को समझें और इसका समाधान की पहल करें।

स्वामी सत्यमित्रानंद ने कहा कि जनसंख्या विस्फोट के कारण देश में खाद्यान्न की कमी के साथ-साथ खेत-खलिहान, जंगल और जमीन के साथ अब तक पानी भी खत्म होता जा रहा है। जनसंख्या नियंत्रण के लिए उन्होंने सरकार को कड़ा कानून बनाना चाहिए। कहा कि, बाबा रामदेव की दो से अधिक बच्चे पैदा करने वाले दंपती के मतदान समेत सभी सरकारी अधिकार खत्म कर देने की मांग का वह समर्थन करते हैं।

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