ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश के इंटरवेंशन रेडियोलॉजी विभाग द्वारा एक युवक व एक अधेड़ महिला के पैरों में गांठ की बीमारी वेरीकोस वेंस का लेजर विधि द्वारा सफलता पूर्वक उपचार किया है। उपचार के बाद दोनों रोगी पूरी तरह से स्वस्थ्य हैं। एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि संस्थान में लेजर विधि से वेरीकोस वेंस की सर्जरी शुरू कर दी गई है, उन्होंने बताया कि यह सुविधा उत्तराखंड में सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध नहीं है। एम्स निदेशक प्रो.रवि कांत ने बताया कि अब तक संस्थान में यह उपचार उपलब्ध नहीं होने से संबंधित रोग से ग्रसित लोगों को एम्स दिल्ली रेफर करना पड़ता था, अथवा रोगियों को निजी अस्पतालों में कई गुना महंगा इलाज कराना पड़ता था।  एम्स के इंटरवेंशन रेडियोलॉजी विभाग के चिकित्सकों ने वेरीकोस वेंस रोग से ग्रसित कोटद्वार निवासी 30 वर्षीय युवक और देहरादून निवासी 56 वर्षीय महिला की लेजर विधि से सफल सर्जरी की है। विभागीय चिकित्सक डा.पंकज शर्मा ने बताया कि वर्षों से पैरों में नसों की गांठ से पीड़ित दोनों रोगी महज तीन दिन के उपचार के बाद पूरी तरह से स्वस्थ हैं। उन्होंने बताया कि वेरीकोस वेंस बीमारी उन लोगों मिलती है जिनकी लंबे समय तक खड़े रहने की दिनचर्या रहती है,ऐसे मरीजों को प्रायः ज्यादा देर तक चलने पर पैरों की नसों में गांठ बन जाती है। लेजर विधि में एक सुई के जरिए इस रोग का उपचार किया जाता है। उन्होंने बताया कि दोनों रोगी कई अस्पतालों में उपचार करा चुके हैं मगर आराम नहीं मिलने पर वह एम्स संस्थान में इलाज के लिए पहुंचे। उन्होंने बताया कि एम्स में वेरीकोस वेंस का उपचार 30 से 40 हजार में उपलब्ध है, जबकि निजी अस्पतालों में इस उपचार पर सवा लाख से डेढ़ लाख रुपए तक खर्च आता है। चिकित्सकीय टीम में डा.उदित चौहान, डा.मोहित, डा.आशीष, डा.फरहान उल हुदा आदि शामिल थे।

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