देहरादून। वर्ष 2016 की विनियमितीकरण नियमावली से नियमित हुए कार्मिकों को झटका लगा है। हाईकोर्ट उक्त नियमावली को निरस्त कर चुका है। बुधवार को मंत्रिमंडल ने भी इस आदेश के मद्देनजर नियमावली को निरस्त करने पर मुहर लगा दी। इससे विभिन्न महकमों में नियमित हुए 515 से अधिक कार्मिकों को झटका लगा है।

इन कार्मिकों के लिए राहत की बात ये है कि उन्हें अब फिर से नियुक्ति के लिए परीक्षा से तो गुजरना पड़ेगा, लेकिन उन्हें आयु सीमा में पूरी तरह छूट मिलेगी। साथ में अनुभव की वजह से प्रति वर्ष 1.5 अंक का वेटेज दिया जाएगा। मंत्रिमंडल ने पर्वतीय क्षेत्रों में अनिवार्य सेवा से कन्नी काटने वाले चिकित्सकों को भी बड़ी राहत दी है। उन्हें 13 वर्ष की सेवा अवधि के दौरान दो साल से लेकर सात साल तक पर्वतीय क्षेत्रों में सेवाएं देने की बाध्यता के चलते उच्चतर वेतनमान मिलने में बाधा में एक बार  शिथिलीकरण दिए जाने पर मंत्रिमंडल ने सहमति दी।  

त्रिवेंद्र सिंह रावत मंत्रिमंडल की बुधवार को सचिवालय में आयोजित बैठक में तकरीबन नौ बिंदुओं पर चर्चा हुई। इनमें दो बिंदु स्थगित कर दिए गए। सरकार के प्रवक्ता व काबीना मंत्री मदन कौशिक ने मंत्रिमंडल के फैसलों को ब्रीफ किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 की नियमितीकरण नियमावली को मंत्रिमंडल ने निरस्त करने पर मुहर लगा दी है। हाईकोर्ट उक्त नियमावली को निरस्त करने के साथ ही नियमित किए गए कार्मिकों को दोबारा परीक्षा के जरिये अवसर देने के संबंध में व्यवस्था बनाने को भी कहा था।

Post A Comment: