डोईवाला। पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद डॉ. मुरली मनोहर जोशी का कहना है कि सुख, शांति और समृद्धि हमारे मूल में ही हैं। बस जरूरत है तो उन्हें खोजने और समझने की। 

प्रणब मुखर्जी फाउंडेशन और सेंटर फॉर रिसर्च इन रूरल एंड इडस्ट्रियल डेवलपमेंट के  तत्वावधान में दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) जौलीग्रांट में विज्ञान और अध्यात्म के जरिये सुख, शांति व समृद्धि के रुपांतरण पर आयोजित इस सम्मेलन का शुभारंभ डॉ. मुरली मनोहर जोशी और सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने किया। 

समारोह की अध्यक्षता कर रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने सम्मेलन के मूल विषय पर बारीकी से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सुख, शांति और समृद्धि हमारे मूल में ही है। हमें उसे खोजना और समझना होगा। उन्होंने कहा कि जरूरी है कि नैतिकता और रचनात्मकता के आधार पर इनका रूपांतरण हो।

वहीं सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि वर्तमान दौर में अध्यात्म व विज्ञान के तालमेल के जरिये ही सुख, शांति और समृद्धि की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है। भारत आज दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था है। बावजूद इसके ग्लोबल हैप्पीनेस इंडेक्स में भारत 133वां व वर्ल्ड पीस इंडेक्स में 137वें स्थान पर है, जो चिंताजनक पहलू है। दुनिया को योग भारत की देन है।

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