देहरादून। राजाजी टाइगर रिजर्व के दूधिया ब्लाक में इस वर्ष मार्च में हुई गुलदार की खाल और बाघ के मांस की बरामदगी के प्रकरण में नया मोड़ आ गया है। इस बहुचर्चित प्रकरण की जांच आईएफएस मनोज चंद्रन से हटाकर राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक सनातन को सौंपे जाने संबंधी अपर मुख्य सचिव का आदेश वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत को नागवार गुजरा है। 

वन मंत्री डॉ. रावत का कहना है कि अपर मुख्य सचिव ने बिना सरकार की सहमति के जांच अधिकारी बदला है। इसे देखते हुए उन्हें तलब किया गया है। साथ ही वह मुख्यमंत्री से भी इस बारे में बात करेंगे। 

हरिद्वार रेंज के दूधिया ब्लाक में 22 मार्च को वन मुख्यालय की टीम ने गुलदार की खाल और बाघ का मांस बरामद किया था। प्रकरण को लेकर राजाजी पार्क प्रशासन और वन मुख्यालय के बीच खूब ठनी रही। तब प्रकरण की जांच राजाजी रिजर्व के तत्कालीन वन्यजीव प्रतिपालक कोमल सिंह को सौंपी गई थी। 

इसके बाद उनसे जांच हटाकर तेजतर्रार आइएफएस संजीव चतुर्वेदी को सौंपी गई, लेकिन फिर यह आदेश निरस्त कर दिया गया। इसके बाद प्रकरण की जांच आइएफएस मनोज चंद्रन को सौंपी गई, जो इसकी जांच कर रहे थे।

इस बीच सात दिसंबर को अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह ने मनोज चंद्रन से जांच हटाकर इसे राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक सनातन को सौंपने के आदेश कर दिए। हालांकि, यह आदेश अब जाकर सार्वजनिक हुआ है। 

इसे लेकर वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कड़ा एतराज जताया है। वन मंत्री डॉ. रावत ने कहा कि प्रकरण में जांच अधिकारी बदलना ठीक नहीं है। इसमें सरकार की कोई सहमति नहीं ली गई। उनसे भी इस बारे में कोई मशविरा नहीं लिया गया। 

डॉ. रावत ने बताया कि उन्होंने अपर मुख्य सचिव को बुलाया है, मगर अभी बात नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा कि जांच अधिकारी बदलने के बारे में वह मुख्यमंत्री से भी वार्ता करेंगे। 

रेंजर समेत तीन कार्मिकों के तैनाती आदेश बहाल 

हरिद्वार रेंज के दूधिया ब्लाक में हुई गुलदार की खाल और बाघ के मांस की बरामदगी प्रकरण में वन विभाग के विभिन्न कार्यालयों में संबद्ध किए गए रेंजर समेत तीन कार्मिकों की तैनाती के आदेश बहाल कर दिए गए हैं।

बता दें कि तत्कालीन जांच अधिकारी मनोज चंद्रन की ओर से उठाए गए सवालों के बाद इस प्रकरण में हरिद्वार रेंज के तत्कालीन रेंजर अनूप सिंह गुसाई को वन संरक्षक यमुना वृत्त और वन दारोगा अशोक सिंह व वन आरक्षी प्रवेश कुमार को मुख्य वन संरक्षक अनुश्रवण मूल्यांकन एवं आडिट के कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया था। 

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