देहरादून। ऐसा लगता है देहरादून के जिलाधिकारी अपनी कोर्ट को नैनीताल हाई कोर्ट से भी ऊपर समझने लगे हैं। 10 अगस्त 2018 के आदेश में हाई कोर्ट ने नदी श्रेणी की जमीनों पर किए गए सभी आवंटन को निरस्त करने के आदेश दिए थे, जबकि उत्तराखंड सचिवालय आवासीय सहकारी समिति के भूखंडों के मामले में अधिकारी हाई कोर्ट के आदेश पर पर्दा डालने से भी नहीं चूक रहे। गंभीर यह कि समिति ने भारूवाला ग्रांट में जिन भूखंडों 374 प्लॉट प्रस्तावित किए हैं, उनमें से करीब 90 बीघा भूमि नदी श्रेणी की है और यह मामला लंबे समय से जिलाधिकारी की ही कोर्ट में लंबित है।
अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) बीर सिंह बुदियाल की अध्यक्षता वाली जांच टीम की रिपोर्ट में भी इस बात का जिक्र किया गया है कि भारूवाला ग्रांट में खसरा नंबर 51, 53, 50, 246, 957क, 958क व 959 नदी श्रेणी की भूमि के हैं। इस रिपोर्ट को ताजा मानकर अभी कार्रवाई को अपेक्षित माना जा सकता है। मगर, वर्ष 2016 में भी सचिवालय समिति के अंतर्गत आने वाले भूखंडों की जांच तत्कालीन अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) प्रताप शाह की अध्यक्षता वाली समिति कर चुकी है। तब भी यही बात निकलकर आई थी कि इस क्षेत्र की भूमि नदी श्रेणी है।


Post A Comment: