ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश, अतुल्य  मंत्रालय, के सहयोग से परमार्थ निकेतन द्वारा आयोजित 30 वें वार्षिक विश्व विख्यात अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव  में प्रतिभाग करने के लिये पूज्य संत, योगाचार्य, प्रतिभागी, योग जिज्ञासु एवं योग विद्यार्थी परमार्थ निकेतन में पहुंच रहे हैं। इस बार अन्तर्राष्ट्रीय योग महापर्व में सम्मिलित होने के लिये सम्पूर्ण विश्व के लगभग 70 से 80 देशों के 1100 से अधिक प्रतिभागी सहभाग कर रहे हैैं। अब तक लगभग 65 देशों के प्रतिभागियों ने अपना पंजीयन करवाया है।
योग की कक्षायें प्रातः 4:00 बजे से रात 9:30 बजे तक सम्पन्न होंगी जिसमें प्रमुख रूप से अष्टांग योग, आयंगार योग, विन्यास योग, कुण्डलिनी योग, जीवमुक्ति योग, सिन्तोह योग, सेमैटिक योग, हठ योग, राज योग, भक्ति योग, गंगा योग, लीला योग, डीप योग आदि एक सप्ताह तक प्रस्तुत किये जाने वाले योग के मुख्य प्रारूप हैं। इसके अतिरिक्त  ध्यान, मुद्रा, वैदिक मंत्र, संस्कृतवाचन, आयुर्वेद, रेकी एवं भारतीय दर्शन की भी कक्षायें सम्पन्न होंगी। देश-विदेश से आये हुये आध्यात्मिक महापुरूषों एवं धर्मगुरूओं द्वारा धार्मिक सवांद, जिज्ञासा सामाधान एवं  प्रश्नोत्तरी का भी विशेष आयोजन इस अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में किया जायेगा।
अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की पूर्व संध्या पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, साध्वी भगवती सरस्वती जी ने योगाचार्यो एवं प्रतिभागियों के साथ मिलकर आज की पावन गंगा आरती में सबसे पहले भारत के महान शहीदोें को श्रद्धांजलि दी गयी। तदनन्तर 100 वर्ष से ज्यादा समय तक योग के क्षेत्र में अद्भुत कार्य करने वाली संस्था ’’योग इन्स्टीटयूट, मुम्बई के वरिष्ठ योगाचार्य डाॅ जयदेव योगेन्द्र जी, योग क्षेत्र के अन्य दिग्गज श्री कृष्णमाचारी जी के पुत्र श्री टी. के. वी. देशिकाचार्य, प्रसिद्ध अष्टांग योगाचार्य के पट्टाभि जोयस तथा विश्व प्रसिद्ध योग परम्परा के दिग्गज  पूज्य बी. के. एस. आंयगार जिन्होंने विज्ञान और अध्यात्म का समन्वय कर योग की उत्कृष्ट विधा आंयगार योग को जन्म दिया, पूज्य स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज जिनका पावन सानिध्य एवं आशीर्वाद प्रतिवर्ष अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव को मिलता रहा है एंव महामण्डलेश्वर पूज्य स्वामी वेद भारती जी महाराज जिन्होने योग एवं ध्यान का वैज्ञानिक स्तर पर समन्वय कर योग के नये आयामों को विकसित किया तथा जगद्गुरू रामानुजाचार्य हंसदेवाचार्य जी महाराज आदि को भावभीनी श्रद्धाजंलि अर्पित की। पूज्य स्वामी जी ने इन सभी योगियों एवं महापुरूषों को याद करते हुये कहा कि इन्होने केवल योग को किया ही नहीं बल्कि जिया है, उनके जीवन का हर क्षण योगमय था।’
अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव का उद्घाटन 1 मार्च, 4:00 बजे, उत्तराखण्ड के माननीय कर्मयोगी मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत जी के कर कमलों से होगा। कार्यक्रम का समापन 7 मार्च को सायंकाल 5 बजे उत्तराखण्ड की महामहिम राज्यपाल श्रीमती बेबी रानी मौर्या जी की पावन उपस्थिति में होगा। योग सम्राट योगगुरू स्वामी रामदेव जी महाराज, आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर जी महाराज, आदरणीय श्री शंकराचार्य जी, विश्व प्रसिद्ध अध्यात्म प्रिय आदरणीय मूजी जी, श्री स्वामी राधानाथ स्वामी जी, व्यासा विश्वविद्यालय के कुलपति तथा भारतीय योग संस्थान के अध्यक्ष डाॅ नागेन्द्र जी, विश्व प्रसिद्ध पर्यावरणविद् डाॅ वन्दना शिवा एवं अनेक पूज्य संतों, वरिष्ठ योगाचार्यों एवं पर्यावरणविदों  का समागम होगा। साथ ही इस बार योग महोत्सव में अनेक नवोदित कार्यक्रम और कई विशेष आकर्षण होंगे, जिसमें पहली बार मध्य अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, उत्तरी अमेरिका एवं हजारों मील दूर से आये आदिवासी, जनजाति और आदिम जाति के प्रमुख अपनी संस्कृति और संस्कारों को सांझा करेंगे तथा योग महोत्सव में उनकी संस्कृति का भी समावेश होगा। साथ ही 3 मार्च को ’’शक्ति पैनल’’ का आयोजन किया जायेगा जिसमें देश और विदेश की विख्यात महिला लीडर्स सहभाग कर योग और महिला सशक्तिकरण पर चर्चा करेगी। 4 मार्च को धूमधाम से शिवरात्रि पर्व मनाया जायेगा।
’’योगा फाॅर आवर प्लानेट’’ जिसमें योग के माध्यम से जलवायु परिवर्तन एवं धरती माता के संरक्षण के लिये योगियों की सक्रिय भूमिका विषय पर 6 मार्च, तथा 7 मार्च को म्यूजिक ’’बीटल्स योगा’’ आदि  ऐेसे अनेकों कार्यक्रम आकर्षण के केन्द्र होंगे जो पूरे विश्व में उत्तराखण्ड की शान बढ़ायेंगे और उत्तराखण्ड की संस्कृति और और संस्कारों को रखेंगे। महोत्सव की समाप्ति पर हर शहीद की याद में स्मृति वन में पौधों लगायें जायेंगे।
  अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में इस बार फिल्म जगत के अभिनेता और भारत की जानी मानी बालीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी भी सिखायेंगी जीवन में फिट रहने तथा व्यस्त रहते हुये भी कैसे योगमय जीकर स्वस्थ रहा जा सकता उनके साथ योग का अद्भुत और विशेष सत्र सम्पन्न होगा।
5 मार्च को इक्वेडोर, कोलम्बिया, ग्वाटेमाला, चिले, पेरू और अन्य देशों की विशिष्ट विभूतियाँ पहली बार एक स्वेट लाज (जैसे भारत में धूनी पर बैठकर साधना होती है) अग्नि के आसपास बैठकर एक विशेष प्रकार की ध्यान प्रक्रिया एवं सकीर्तन का आयोजन किया जा रहा है जिसमें सब बैठकर विश्व शान्ति के लिये प्रार्थना करेंगे।
1 मार्च को 8:00 से 9:30 सांय काल योग घाट पर प्रसिद्ध तालवादक एवं ड्रम वादक शिवमणि जी के ड्रम और संगीत की मनमोहक प्रस्तुति होगी इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, विश्व से पधारे योग साधक और योगाचार्य को भारतीय संस्कृति, विश्व बन्धुत्व, सादगी, सद्भाव, समरसता एवं स्वच्छता का संदेश प्रसारित करेंगे। अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की निदेशक साध्वी भगवती सरस्वती जी योग और ध्यान की विभिन्न विधायों का अभ्यास और सत्संग के माध्यम से जीवन की समस्याओं का समाधान करेगी।
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने देश और विदेश से आये पूज्य संतों, प्रतिभागियों एवं योग जिज्ञासुओं का योग और धर्म की नगरी ऋषिकेश में पतित पावनी माँ गंगा के तट पर एवं हिमालय की तलहटी में स्थित परमार्थ निकेतन में सम्पन्न अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में सभी का अभिनन्दन करते हुये कहा कि आप सभी इस योग महापर्व में ध्यान व योग की उच्चस्तरीय विधाओं के साथ आत्मिक एवं आध्यात्मिक उन्नति के शिखर को प्राप्त कर पायेंगे। योग, हमें स्वस्थ तन और प्रफुल्लित मन के साथ विश्व एक परिवार है का मूल मंत्र सिखाता है। माँ गंगा हमारे रोम-रोम में दिव्यता का संचार करती हैं। स्वामी जी महाराज ने कहा कि योग तो संयोग कराता है, विश्व बन्धुत्व का संदेश देता है। योग हमें सद्भाव, समरसता और विश्व एकता का संदेश देता है। भारत कोई भूमि का टुकडा नहीं, बल्कि यह तो जीता जागता राष्ट्र है। इसके मूल में ही शान्ति के बीज समाहित हैं। भारत योग का जन्मदाता और शान्ति का उद्घोषक है।
अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की निदेशक डाॅ साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा, भारत में आकर योग को आत्मसात करना सचमुच दैवीय अनुकम्पा है। योग के केन्द्र तो पूरे विश्व में है परन्तु भारत के पास केवल योग ही नहीं है बल्कि योगमय जीवन पद्धति भी है। उन्होने सभी योगियों को कहा कि जब आप माँ गंगा के तट पर आते हैं; हिमालय की गोद में आते हैं; योग की जन्मभूमि में अपने कदम रखते हैं, तब आप जो हैं उसमें एक अद्भुत परिवर्तन होता है। योग, आपके लिये क्षण मात्र का अनुभव नहीं है अपितु चारों पहर की अनुभूति कराता है।
अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में  भारत, स्पेन, ब्राजील, पुर्तगाल, चीन, मैक्सिको, बेल्जियम, अमेरिका, कोलम्बिया, नीदरलैण्ड, पेरू, अर्जेन्टीना, जर्मनी, आस्ट्रेलिया, इटली, नार्वे,  जर्मनी, तिब्बत, भूटान, रूस, इजरायल, इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, कनाडा, स्वीडन, हांगकाग, बेल्जियम, स्विट्जरलैण्ड, बहरीन, अफगानिस्तान, अफ्रीका, सिंगापुर, ताईबान, फिलिस्तीन, ईरान, जापान, केन्या, यमन, पेलस्टाईन, चीन, सिंगापुर, ताईबान, बैंकाक, नामिबिया, इक्वेडोर, कोलम्बिया, ग्वाटेमाला, आॅस्ट्रिया, क्यूबा, चिले, थाईलैण्ड, तुर्की, ब्रिटेन, दक्षिण अमेरिका सहित विश्व के विभिन्न देेशों के योग जिज्ञासु सहभाग कर रहे हैं।
अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में आये योग साधकों ने कहा कि हम परमार्थ निकेतन आकर आत्मिक शान्ति का अनुभव कर रहे हैं। वास्तव में यह एक योग सेन्टर नहीं बल्कि योगमय जीवन पद्धति सिखाने की प्रयोगशाला है।

Post A Comment: