ऋषिकेश,23मार्च। शहीद-ए-आजम भगत सिंह स्मृति समारोह समिति ऋषिकेश द्वारा शहीद भगत सिंह की फांसी के 88वें शहादत दिवस के अवसर पर जहां नगर पालिका प्रांगण में स्थित शहीद भगत सिंह की मूर्ति पर माल्यार्पण किया गया ,वहीं शीशम झाड़ी स्थित भगत सिंह पार्क में एक विचार गोष्ठी आयोजित की गई ।शनिवार को शहीद भगत सिंह की 88 वींं शहादत दिवस के अवसर पर पूर्व नगरपालिका ऋषिकेश के अध्यक्ष वीरेंद्र शर्मा की अध्यक्षता तथा जगदीश कुलियाल के संचालन में आयोजित गोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने कहा ,कि आज भगत सिंह का जिन्हें भारत के आवाम की आजादी के लिए सर्वोच्च बलिदान के कारण शहीद-ए-आजम कहा जाता है ।का 88 वां शहादत दिवस मनाया जा रहा है। वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 1931 की 23 मार्च को समय से पूर्व ही भगत सिंह ,सुखदेव सिंह,राजगुरु को लाहौर जेल में सब नियमों और कानूनों को ताक पर रखकर अंग्रेजी हुकूमत ने फांसी के लिए निर्धारित समय से पहले ही फांसी दे दी थी ।फांसी के समय भगत सिंह मात्र 23 साल के थे ।देश के लिए शहीद होने वाले भगत सिंह का नाम युवाओं और जनमानस में जोश का संचालन तो करता ही है। लेकिन सच यही है, कि बहुत कम लोग उनके उन विचारों से परिचित हैं ।जिसने उन्हें इतनी कम उम्र में इतना लोकप्रिय बना दिया था। और उनके संगठन हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक एसोसिएशन के महत्वपूर्ण भूमिका में ला दिया था ।आज उनकी आवाज पूरे देश में क्रांतिकारी के रूप में सुनाई देती है ।वक्ताओं ने कहा कि भगत सिंह के विचार और आदेशों के बिना भारत को सही मायने में संविधान में दिए समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष ,लोकतांत्रिक, गणराज्य के लक्ष्य तक पहुंचाना मुश्किल लगता था ।उसके उलट आज देश एक ऐसे दौर से गुजर रहा है ।जहांं चंद पूंजीपति जो सत्ता की नीतियों और अपनी नीतियों के कारण लगातार मालामाल हो रहे हैं। जिसके कारण मजदूर, किसान, कर्मचारी ,काम धंधा करके जीवन गुजर करने वाली मेहनतकश जनता आर्थिक रूप से बदहाल हो चुकी है। वक्ताओं ने कहा कि आज आर्थिक गैर बराबरी लगातार बढ़ती जा रही है ।मेहनतकश जनता की मेहनत और सामूहिक संसाधनों की लूट के कारण आज देश की स्थिति हो गई है । पूंजीपतियों के पास देश की आधी आबादी के बराबर धन इन्हीं लोगोंं के पास है। जो कि स्वाभाविक रूप से आज की स्थिति में देश की सत्ता की दिशा और नीतियों को सेट कर रहे हैं ।जो कि देश के हित में नहीं है ।गोष्टी में हरिनारायण ,विनोद ध्यानी, धर्मानंद लखेडा, सुनील ठाकुर ,विष्णु वर्मा ,प्रीतम सैनी आदि ने भी अपने क्रांतिकारी विचार प्रकट किए ।


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