विश्व जल दिवस-जल ही जीवन है
परमार्थ निकेतन में आयोजित विश्व जल दिवस पर आयोजित स्लोगन एवं चित्रकला प्रतियोगिया में 40 विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने किया सहभाग
परमार्थ निकेतन, गंगा एक्शन परिवार, ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस (जीवा), डिवाइन शक्ति फाउण्डेशन, स्वरोस्की वाॅटर स्कूल के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने छात्र-छात्राओं को जल संरक्षण का कराया संकल्प
जल के संरक्षण हेतु समेकित एवं वैश्विक प्रयास नितांत आवश्यक-स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश, 22 मार्च। परमार्थ निकेतन में गंगा जी के तट पर ’विश्व जल दिवस’ के अवसर पर जल के प्रति जागरूकता लाने के लिये स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के पावन संरक्षण मे स्लोगन एवं चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें 40 विद्यालयों के लगभग 500 छात्र-छात्राओं ने सहभाग किया।
विश्व जल दिवस कार्यक्रम का आयोजन, परमार्थ निकेतन, गंगा एक्शन परिवार, ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस (जीवा), डिवाइन शक्ति फाउण्डेशन, स्वरोस्की वाॅटर स्कूल के संयुक्त तत्वाधान में किया गया। इस अवसर पर 40 विद्यालयों के लगभग 500 बच्चों ने जल संरक्षण एवं महत्ता विषय पर सुन्दर चित्र एवं स्लोगन लिखे। उत्कृष्ट कृतियों को पुरस्कृत किया गया। प्रथम पुरस्कार पाने वाले छात्रों को विद्यालय का ’जल संरक्षण राजदूत’ घोषित किया गया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को जल संरक्षण का विशेष प्रशिक्षण दिया जायेगा जिससे नई तकनीकी क्षमताओं का निर्माण हो सके तथा इस क्षेत्र में कार्य करने की दक्षता सशक्त हो, जिससे परिवार, विद्यालय और समाज के स्तर पर अर्थपूर्ण परिणाम प्राप्त हो सकें।
तत्पश्चात परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने पपेट शो के माध्यम से जल संरक्षण एवं जागरूकता का संदेश दिया। जी. जे. एच. एस. मनीराम मार्ग, ऋषिकेश विद्यालय के बच्चों द्वारा ’जल बचाओ स्किट’, जी. जे. एच. एस.-01, देहरादून रोड़, ऋषिकेश विद्यालय के बच्चों द्वारा ’जल बचाओ गीत’, प्रकाश भारती विद्यालय ऋषिकेश द्वारा ’जल बचाओ गीत’, परमार्थ गंगा तट से योगा गार्डन तक स्वच्छता और जल संरक्षण के झण्डे एवं नारों के साथ रैली निकाली गयी। कार्यक्रम के समापन अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने जल संरक्षण का संकल्प कराया।
आज के समारोह में परमार्थ निकेतन में पानी, प्लास्टिक और पापुलेशन इन तीनों मुद्दों पर गंभीर चिंतन किया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि भूमिगत जल का संकट गहरा रहा है, अतः जल के महत्व को समझना होगा। पर्यावरण के लिये प्लास्टिक सबसे खतरनाक है, एक बार उपयोग किये गये प्लास्टिक को समाप्त करना होगा। प्लास्टिक जहर है, इस विषय में छात्रों को जानकारी देेनी होगी ताकि बच्चों को इसका आभास हो सके। स्वामी जी ने कहा कि बच्चे इन शिक्षाओं के साथ बड़े होंगे तो वे परिवार को भी शिक्षित करेंगे। पापुलेशन पर बात करते हुये कहा कि अब समय आ गया है कि ’हम दो, हमारे दो और सब के दो’ इस पर चिंतन होना जरूरी है। जनसंख्या पर नियंत्रण करना जरूरी है, यह किसी धर्म, जाति या प्रांत के कारण नहीं बल्कि जनसंख्या नियंत्रण इसलिये जरूरी है कि हमारे पास संसाधन कितने हैं, उन संसाधनों का कितना दोहन हम कर सकेंगे। संसाधनों की कमी को देखते हुये जनसंख्या पर नियंत्रण करना होगा, इसलिये सभी को आगे आना होगा सभी जुड़ेंगे तो ही काम बनेगा। संसाधन पर्याप्त अब नहीं है नदियाँ सूखती जा रही, भूजल समाप्त हो रहा है, खनिजों का दोहन अन्धाधुंध तरीकों से हो रहा है, पेड़ कट रहें है, तमाल छट रहे है, यमुना की दुर्दशा सामने है, अतः बहुत जरूरी है कि भावी पीढ़ी को बेगारी और बीमारी से बचाने के लिये एक ही समाधान है कि हम जनसंख्या नियंत्रण करें अन्यथा गली-गली में हिंसा और प्रदूषण का सामना करना पड़ेगा।
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने छात्रों को सम्बोधित करते हुये कहा, ’दुनिया में रहने वाले प्रत्येक मनुष्य को जल की एक-एक बूंद के महत्व को समझना होगा तभी हम जल रूपी वैश्विक त्रासदी से उबर सकते हैं। जल का संरक्षण समेकित प्रयासों से ही सम्भव हो सकता है और इस हेतु स्कूली छात्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है। ’जल हमारा भविष्य ही नहीं बल्कि वर्तमान भी है, अतः जल की हर एक बूंद को संरक्षित करना हमारा दायित्व हैं। वर्तमान समय में 665 मिलियन लोगों तक सुरक्षित एवं स्वच्छ जल की पहुंच नहीं है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि गर्मी का मौसम आ रहा है इस मौसम में शरीर में पानी की कमी होना खतरनाक साबित हो सकता है। हार्वर्ड विश्व विद्यालय के वैज्ञानिकों ने दावा किया कि पानी की कमी के कारण दिमाग की नसों में खून के थक्के बन जाते हैं और वे मस्तिष्क के आघात का सबसे बड़ा कारण बनते हैं। ईस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि पानी दिमाग में रक्त प्रवाह को बढ़ाने में सहायक है। उनके अनुसार एक गिलास पानी पीने से हमारा दिमाग 14 फीसदी अधिक तेजी से काम करने लग जाता है। पानी की कमी से दिमाग से हृदय तक खून पहुंचाने वाली रक्त वाहिकाओं में खून का थक्का जमने का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही शरीर में पानी की कमी से सिर दर्द और चक्कर आना आम बात है अतः शरीर में जल का संतुलन बनायें रखे और धरा पर भी।
वैज्ञानिकों के अनुसार कितना जल शरीर के लिये आवश्यक है इस हेतु सुबह अपना वजन नापें और उसका औसत निकाल लें और जो औसत आये उसे 30 से भाग दें, जो आयेगा उतना पानी पीयें और स्वस्थ रहें।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, स्वामिनी आदित्यनन्दा जी सरस्वती जी, सुश्री गंगा नन्दिनी त्रिपाठी, विभिन्न विद्यालयों से आये शिक्षकों एवं छात्रों ने विश्व स्तर पर स्वच्छ जल की अपूर्ति हेतु वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन्न की। इस अवसर पर परमार्थ गुरूकुल, जी. जे. एच. एस. गढ़ी श्यामपुर, जी. पी. एस. गढ़ी श्यामपुर, जी. पी. एस. मायाकुण्ड, जी. पी. एस. कुम्हारबाद, चन्द्रेश्वर पब्लिक स्कूल, जी. पी. एस शीशमझाड़ी, जी. पी. एस. नभा हाउस, शारदा पब्लिक स्कूल, जी. पी. एस. सब्जीमंड़ी, जी. पी. एस. बापुग्राम, जी. जे. एच. एस. बापुग्राम, जी. जे. एच. एस. खारास्रोत, जी. पी. एस. खारास्रोत, जी. आई. सी. लक्ष्मणझूला, जी. पी. एस. लक्ष्मणझूला, जी. जे. एच. एस. मनीराम मार्ग, ऋषिकेश, दर्शन महाविद्यालय मुनि की रेती, जी. जे. एच. एस. देहरादून रोड, केन्द्रीय विद्यालय आई. डी. पी. एल., जी. पी. एस. काली की ढ़ाल, न्यू इरा पब्लिक स्कूल, हिल्स एकेडमी, जी. पी. एस. सोमेश्वर नगर, जी. पी. एस. पशुलोक, एस व्ही एन चन्द्रेश्वर नगर, जी. पी. एस.रायवाला, जी. पी. एस. मोतीचूर और अन्य स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने स्लोगन और चित्रकला प्रतियोगिता में सहभाग किया। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन में भण्डारे का आयोजन किया स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने बच्चों को बड़े प्रेम से भोजन कराया।
परमार्थ निकेतन में आयोजित विश्व जल दिवस पर आयोजित स्लोगन एवं चित्रकला प्रतियोगिया में 40 विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने किया सहभाग
परमार्थ निकेतन, गंगा एक्शन परिवार, ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस (जीवा), डिवाइन शक्ति फाउण्डेशन, स्वरोस्की वाॅटर स्कूल के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने छात्र-छात्राओं को जल संरक्षण का कराया संकल्प
जल के संरक्षण हेतु समेकित एवं वैश्विक प्रयास नितांत आवश्यक-स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश, 22 मार्च। परमार्थ निकेतन में गंगा जी के तट पर ’विश्व जल दिवस’ के अवसर पर जल के प्रति जागरूकता लाने के लिये स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के पावन संरक्षण मे स्लोगन एवं चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें 40 विद्यालयों के लगभग 500 छात्र-छात्राओं ने सहभाग किया।
विश्व जल दिवस कार्यक्रम का आयोजन, परमार्थ निकेतन, गंगा एक्शन परिवार, ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस (जीवा), डिवाइन शक्ति फाउण्डेशन, स्वरोस्की वाॅटर स्कूल के संयुक्त तत्वाधान में किया गया। इस अवसर पर 40 विद्यालयों के लगभग 500 बच्चों ने जल संरक्षण एवं महत्ता विषय पर सुन्दर चित्र एवं स्लोगन लिखे। उत्कृष्ट कृतियों को पुरस्कृत किया गया। प्रथम पुरस्कार पाने वाले छात्रों को विद्यालय का ’जल संरक्षण राजदूत’ घोषित किया गया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को जल संरक्षण का विशेष प्रशिक्षण दिया जायेगा जिससे नई तकनीकी क्षमताओं का निर्माण हो सके तथा इस क्षेत्र में कार्य करने की दक्षता सशक्त हो, जिससे परिवार, विद्यालय और समाज के स्तर पर अर्थपूर्ण परिणाम प्राप्त हो सकें।
तत्पश्चात परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने पपेट शो के माध्यम से जल संरक्षण एवं जागरूकता का संदेश दिया। जी. जे. एच. एस. मनीराम मार्ग, ऋषिकेश विद्यालय के बच्चों द्वारा ’जल बचाओ स्किट’, जी. जे. एच. एस.-01, देहरादून रोड़, ऋषिकेश विद्यालय के बच्चों द्वारा ’जल बचाओ गीत’, प्रकाश भारती विद्यालय ऋषिकेश द्वारा ’जल बचाओ गीत’, परमार्थ गंगा तट से योगा गार्डन तक स्वच्छता और जल संरक्षण के झण्डे एवं नारों के साथ रैली निकाली गयी। कार्यक्रम के समापन अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने जल संरक्षण का संकल्प कराया।
आज के समारोह में परमार्थ निकेतन में पानी, प्लास्टिक और पापुलेशन इन तीनों मुद्दों पर गंभीर चिंतन किया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि भूमिगत जल का संकट गहरा रहा है, अतः जल के महत्व को समझना होगा। पर्यावरण के लिये प्लास्टिक सबसे खतरनाक है, एक बार उपयोग किये गये प्लास्टिक को समाप्त करना होगा। प्लास्टिक जहर है, इस विषय में छात्रों को जानकारी देेनी होगी ताकि बच्चों को इसका आभास हो सके। स्वामी जी ने कहा कि बच्चे इन शिक्षाओं के साथ बड़े होंगे तो वे परिवार को भी शिक्षित करेंगे। पापुलेशन पर बात करते हुये कहा कि अब समय आ गया है कि ’हम दो, हमारे दो और सब के दो’ इस पर चिंतन होना जरूरी है। जनसंख्या पर नियंत्रण करना जरूरी है, यह किसी धर्म, जाति या प्रांत के कारण नहीं बल्कि जनसंख्या नियंत्रण इसलिये जरूरी है कि हमारे पास संसाधन कितने हैं, उन संसाधनों का कितना दोहन हम कर सकेंगे। संसाधनों की कमी को देखते हुये जनसंख्या पर नियंत्रण करना होगा, इसलिये सभी को आगे आना होगा सभी जुड़ेंगे तो ही काम बनेगा। संसाधन पर्याप्त अब नहीं है नदियाँ सूखती जा रही, भूजल समाप्त हो रहा है, खनिजों का दोहन अन्धाधुंध तरीकों से हो रहा है, पेड़ कट रहें है, तमाल छट रहे है, यमुना की दुर्दशा सामने है, अतः बहुत जरूरी है कि भावी पीढ़ी को बेगारी और बीमारी से बचाने के लिये एक ही समाधान है कि हम जनसंख्या नियंत्रण करें अन्यथा गली-गली में हिंसा और प्रदूषण का सामना करना पड़ेगा।
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने छात्रों को सम्बोधित करते हुये कहा, ’दुनिया में रहने वाले प्रत्येक मनुष्य को जल की एक-एक बूंद के महत्व को समझना होगा तभी हम जल रूपी वैश्विक त्रासदी से उबर सकते हैं। जल का संरक्षण समेकित प्रयासों से ही सम्भव हो सकता है और इस हेतु स्कूली छात्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है। ’जल हमारा भविष्य ही नहीं बल्कि वर्तमान भी है, अतः जल की हर एक बूंद को संरक्षित करना हमारा दायित्व हैं। वर्तमान समय में 665 मिलियन लोगों तक सुरक्षित एवं स्वच्छ जल की पहुंच नहीं है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि गर्मी का मौसम आ रहा है इस मौसम में शरीर में पानी की कमी होना खतरनाक साबित हो सकता है। हार्वर्ड विश्व विद्यालय के वैज्ञानिकों ने दावा किया कि पानी की कमी के कारण दिमाग की नसों में खून के थक्के बन जाते हैं और वे मस्तिष्क के आघात का सबसे बड़ा कारण बनते हैं। ईस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि पानी दिमाग में रक्त प्रवाह को बढ़ाने में सहायक है। उनके अनुसार एक गिलास पानी पीने से हमारा दिमाग 14 फीसदी अधिक तेजी से काम करने लग जाता है। पानी की कमी से दिमाग से हृदय तक खून पहुंचाने वाली रक्त वाहिकाओं में खून का थक्का जमने का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही शरीर में पानी की कमी से सिर दर्द और चक्कर आना आम बात है अतः शरीर में जल का संतुलन बनायें रखे और धरा पर भी।
वैज्ञानिकों के अनुसार कितना जल शरीर के लिये आवश्यक है इस हेतु सुबह अपना वजन नापें और उसका औसत निकाल लें और जो औसत आये उसे 30 से भाग दें, जो आयेगा उतना पानी पीयें और स्वस्थ रहें।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, स्वामिनी आदित्यनन्दा जी सरस्वती जी, सुश्री गंगा नन्दिनी त्रिपाठी, विभिन्न विद्यालयों से आये शिक्षकों एवं छात्रों ने विश्व स्तर पर स्वच्छ जल की अपूर्ति हेतु वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन्न की। इस अवसर पर परमार्थ गुरूकुल, जी. जे. एच. एस. गढ़ी श्यामपुर, जी. पी. एस. गढ़ी श्यामपुर, जी. पी. एस. मायाकुण्ड, जी. पी. एस. कुम्हारबाद, चन्द्रेश्वर पब्लिक स्कूल, जी. पी. एस शीशमझाड़ी, जी. पी. एस. नभा हाउस, शारदा पब्लिक स्कूल, जी. पी. एस. सब्जीमंड़ी, जी. पी. एस. बापुग्राम, जी. जे. एच. एस. बापुग्राम, जी. जे. एच. एस. खारास्रोत, जी. पी. एस. खारास्रोत, जी. आई. सी. लक्ष्मणझूला, जी. पी. एस. लक्ष्मणझूला, जी. जे. एच. एस. मनीराम मार्ग, ऋषिकेश, दर्शन महाविद्यालय मुनि की रेती, जी. जे. एच. एस. देहरादून रोड, केन्द्रीय विद्यालय आई. डी. पी. एल., जी. पी. एस. काली की ढ़ाल, न्यू इरा पब्लिक स्कूल, हिल्स एकेडमी, जी. पी. एस. सोमेश्वर नगर, जी. पी. एस. पशुलोक, एस व्ही एन चन्द्रेश्वर नगर, जी. पी. एस.रायवाला, जी. पी. एस. मोतीचूर और अन्य स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने स्लोगन और चित्रकला प्रतियोगिता में सहभाग किया। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन में भण्डारे का आयोजन किया स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने बच्चों को बड़े प्रेम से भोजन कराया।


Post A Comment: