गांव को छोड़ खेतों से सड़क निकाल रहा पीएमजीएसवाई विभाग
ठेकेदार पर लगाया हाथापाई का आरोप
देहरादून। लोकसभा चुनावों में पहाड़ के बहुत से गांवों ने चुनाव बहिष्कार किया है और ज्यादातर जगह इसकी वजह सड़क की मांग या वायदे का पूरा न हो पाना है। लेकिन रुद्रप्रयाग में यह अजीब मामला सामने आया है जहां ग्रामीण सड़क बनाने का विरोध कर रहे हैं। ऐसा नहीं कि यहां लोगों को सड़क नहीं चाहिए लेकिन जहां से सड़क गुजर रही है इन ग्रामीणों का विरोध उससे है लेकिन प्रशासन का कहना है कि स्वीकृत सर्वे के अनुसार ही काम हो रहा है।
रुद्रप्रयाग के बजणू, चामक, चमस्वाड़ा, चापड़, गड़विला और उत्स्यूं गावों को सड़क से जोड़ने के लिए 1980 से सर्वे किए जा रहे हैं और एक से ज्यादा सर्वे किए जा चुके हैं। सड़क बनने लगी तो चमस्वाड़ा के ग्रामीण इसके विरोध में उतर आए। ग्रामीणों का कहना है कि पीएमजेएसवाई ने जो सर्वे किया था उसमें उनका गांव शामिल था लेकिन अब विभाग बिना सर्वे किए ही उनके गांव को छोड़कर कई किमी दूर सड़क बना रहा है। ग्रामीणों का कहना यह भी कहना है कि जिस सर्वे पर पीएमजीएसवाई काम कर रहा है वह सड़क लोक निर्माण विभाग ने पहले सर्वे कर प्रस्तावित की थी। इससे उनका गांव सड़क से तो नहीं जुड़ा लेकिन सड़क के लिए जबरन उनके खेतों को काटा जा रहा है। प्रमिला देवी के खेतों से सड़क गुजर रही है। उनका कहना है कि जबरन उनके खेतों को बर्बाद किया जा रहा है। वह खुद दिव्यांग हैं और उनके पति भी गुजर चुके हैं। प्रमिला कहती हैं ठेकेदार ने उनसे हाथापाई भी की। अपने खेतों को बचाने के लिए वह तीन-चार दिन से यहीं हैं और उनका, उनके बच्चों को खाना-पीना सब मुश्किल हो रखा है।
चमस्वाड़ा के ग्राम प्रधान भरत सिंह नेगी कहते हैं कि ठेकेदार के लोग गांव के महिला, पुरुषों, बच्चों को धमका रहे हैं। खुद उन्हें भी धमकाया गया है। नेगी कहते हैं कि अब लोगों ने कसम खा ली है कि चाहे उन्हें कुचल दिया जाए वह यहां से सड़क नहीं बनने देंगे। ग्रामीणों ने जेसीबी को भी कब्जे में ले लिया। लेकिन पीएमजीएसवाई के अधिशासी अभियंता रमेश चंद्र उनियाल के अनुसार सड़क से डेढ़ किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों तक सड़क की पहुंच मानी जाती है। वह कहते हैं कि सर्वे के अनुसार ही काम हो रहा है और मानकों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है। लेकिन कहीं न कहीं कोई न कोई गड़बड़ तो है वरना जिस सड़क का इंतजार ग्रामीण सालों से कर रहे थे उसका विरोध नहीं करते।
ठेकेदार पर लगाया हाथापाई का आरोप
देहरादून। लोकसभा चुनावों में पहाड़ के बहुत से गांवों ने चुनाव बहिष्कार किया है और ज्यादातर जगह इसकी वजह सड़क की मांग या वायदे का पूरा न हो पाना है। लेकिन रुद्रप्रयाग में यह अजीब मामला सामने आया है जहां ग्रामीण सड़क बनाने का विरोध कर रहे हैं। ऐसा नहीं कि यहां लोगों को सड़क नहीं चाहिए लेकिन जहां से सड़क गुजर रही है इन ग्रामीणों का विरोध उससे है लेकिन प्रशासन का कहना है कि स्वीकृत सर्वे के अनुसार ही काम हो रहा है।
रुद्रप्रयाग के बजणू, चामक, चमस्वाड़ा, चापड़, गड़विला और उत्स्यूं गावों को सड़क से जोड़ने के लिए 1980 से सर्वे किए जा रहे हैं और एक से ज्यादा सर्वे किए जा चुके हैं। सड़क बनने लगी तो चमस्वाड़ा के ग्रामीण इसके विरोध में उतर आए। ग्रामीणों का कहना है कि पीएमजेएसवाई ने जो सर्वे किया था उसमें उनका गांव शामिल था लेकिन अब विभाग बिना सर्वे किए ही उनके गांव को छोड़कर कई किमी दूर सड़क बना रहा है। ग्रामीणों का कहना यह भी कहना है कि जिस सर्वे पर पीएमजीएसवाई काम कर रहा है वह सड़क लोक निर्माण विभाग ने पहले सर्वे कर प्रस्तावित की थी। इससे उनका गांव सड़क से तो नहीं जुड़ा लेकिन सड़क के लिए जबरन उनके खेतों को काटा जा रहा है। प्रमिला देवी के खेतों से सड़क गुजर रही है। उनका कहना है कि जबरन उनके खेतों को बर्बाद किया जा रहा है। वह खुद दिव्यांग हैं और उनके पति भी गुजर चुके हैं। प्रमिला कहती हैं ठेकेदार ने उनसे हाथापाई भी की। अपने खेतों को बचाने के लिए वह तीन-चार दिन से यहीं हैं और उनका, उनके बच्चों को खाना-पीना सब मुश्किल हो रखा है।
चमस्वाड़ा के ग्राम प्रधान भरत सिंह नेगी कहते हैं कि ठेकेदार के लोग गांव के महिला, पुरुषों, बच्चों को धमका रहे हैं। खुद उन्हें भी धमकाया गया है। नेगी कहते हैं कि अब लोगों ने कसम खा ली है कि चाहे उन्हें कुचल दिया जाए वह यहां से सड़क नहीं बनने देंगे। ग्रामीणों ने जेसीबी को भी कब्जे में ले लिया। लेकिन पीएमजीएसवाई के अधिशासी अभियंता रमेश चंद्र उनियाल के अनुसार सड़क से डेढ़ किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों तक सड़क की पहुंच मानी जाती है। वह कहते हैं कि सर्वे के अनुसार ही काम हो रहा है और मानकों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है। लेकिन कहीं न कहीं कोई न कोई गड़बड़ तो है वरना जिस सड़क का इंतजार ग्रामीण सालों से कर रहे थे उसका विरोध नहीं करते।


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