ऋषिकेश,15अप्रैल। श्रेष्ठ व्यक्ति वही होता है जिसका आचरण भी श्रेष्ठ हो यह विचार अंतरराष्ट्रीय मोटिवेशनल  तथा मानवीय चेतना संघ के संस्थापक वक्ता स्वामी विवेकानंद सरस्वती ने यहां आर्य समाज वैदिक आश्रम ऋषिकेश में  सोमवार को आयोजित संत सम्मेलन के दौरान व्यक्त कहा कि सनातन धर्म में आर्य समाज पद्धति है जिसमे  वैदिक मंत्रों का महत्वपूर्ण स्थान बताया गया है उनका कहना था कि वैदिक मंत्रों की शक्ति को आज भारत में ही नहीं विश्व भी मांन रहा है और वह भारतीय वैदिक मंत्रों पर शोध कार्य में जुटे हैं स्वामी विवेकानंद का क्या नाम था कि आज अंतरराष्ट्रीय मोटिवेशनल स्पीकर एंड ट्रांसफार्मर भी भारतीय मंत्रों की शक्ति पर शोध में जुटा है उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद हमारे प्रेरणा स्रोत रहे हैं उनके बताए मार्ग पर चलने का हम सभी आर्य जनों से अपील करते हैं कि वह नित्य वैदिक मंत्रों के साथ हवन आदि करें जिसमें एक आहुति अवश्य देने से उसके कष्टों का निवारण भी होता है । स्वामी विवेकानंद का कहना था इस सत्संग का उद्देश्य भी समाज का का परोपकार करना है और यही वेदों का सार भी बताया गया है उनका कहना था कि आर्य समाज एक वैचारिक क्रांति के रूप में अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहा है जिसका उद्देश्य समाज में पवित्रता को लाया जाना है यह एक आरे सामाजिक आंदोलन भी है जिसे आर्य समाज से जुड़े लोग एक आंदोलन के रूप में चला रहे हैं समाज को अज्ञानता से जगाने के लिए वेद मंत्र के उच्चारण के साथ उनके अध्ययन की आवश्यकता भी है जिससे मनुष्य के जीवन का सार बदल जाता है उन्होंने कहा कि जिसने भारत माता  को स्वतंत्रता का ताज पहनाया उस संस्था का नाम आर्य समाज है। स्वामी विवेकानंद ने कहा कि सच्चे ज्ञान की प्राप्ति के लिए मनुष्य को जिस प्रकार पानी की प्यास लगती है उसी प्रकार एक प्यास को शरीर में  उद्वेलित करने की आवश्यकता है। इस अवसर पर सतीश कुमार माखनलाल सूरी अभय आर्य भी उपस्थित थे।

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