ऋषिकेश। सो जाते है फुट पाथ पे अखबार बिछा कर, मजदूर कभी नींद की गोली नहीं खाते*: मायाकुंड स्तिथ निशुल्क शिक्षण संस्थान उड़ान में आज विश्व श्रमिक दिवस के उपलक्ष्य में गोष्ठी का आयोजन किया गया।स्कूल परिसर में आयोजित गोष्ठी कार्यक्रम को संबोधित करते हुवे उड़ान शिक्षण संस्थान के निदेशक डॉ राजे नेगी ने बताया कि एक मई का दिन मजदूर दिवस (Ladour Day) के तौर पर मनाया जाता है. पिछले 132 साल से अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया जाता है, 1877 में मजदूरों ने काम के घंटे तय करने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया था, एक मई 1886 को पूरे अमेरिका के लाखों मजदूरों ने एक साथ हड़ताल शुरू की। इस हड़ताल में 11,000 फैक्टरियों के कम से कम 3,80,000 मजदूर शामिल हुए और इस तरह पहली मई को मजदूर दिवस के रूप में मनाने की शुरूआत हुई।भारत में मजदूर दिवस की शुरुआत लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान ने 1 मई 1923 को चेन्ने में की थी। उस समय इसे मद्रास दिवस के रूप में मनाया जाता था। डॉ नेगी ने कहा कि देश में लेबर क्लास के लोगों का जीवन स्तर सुधारने, मजदूर उत्पीड़न रोकने, न्यूनतम मजदूरी कानून और प्रवासी मजदूरों को लेकर जागरुकता फैलाई जा सके इसके लिए सयुक्त रूप से मिलकर सामूहिक प्रयास करना होगा।इस अवसर पर मीनाक्षी राणा,प्रिया क्षेत्री,प्रियंका कुकरेती,मंजू देवी,आशुतोष कुडियाल,अर्णव कोटियाल,रमेश लींगवाल उपस्थित थे।
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शिक्षण संस्थान उड़ान में विश्व श्रमिक दिवस के उपलक्ष्य में गोष्ठी का आयोजन किया गया


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