देहरादून I कारगिल विजय दिवस (शौर्य दिवस) है। कहने को तो प्रतिवर्ष 26 जुलाई को प्रदेश सरकार की ओर से कारगिल विजय दिवस (शौर्य दिवस) पर सेना के इन जांबाजों की बहादुरी को याद कर इनकी शहादत को नमन किया जाता है। इन वीर सपूतों की स्मृतियों में लगाए गए शिलापट बदहाल हैं। कई जगह तो शिलापट मौजूद ही नहीं हैं।
इन सड़कों को इंगित करने के लिए सड़क किनारे संगमरमर के शिलापट भी लगाए गए थे, लेकिन अब कई स्थानों पर शिलापट गायब हैं। राजधानी में शायद ऐसा कोई मार्ग हो जिसे कारगिल शहीद के नाम से पहचाना जाता हो। यहां तक कि सरकारी फाइलों में भी सड़कों का पुराने नाम ही अंकित हैं।
दून के रहने वाले वीर सपूत मेजर विवेक गुप्ता, स्क्वाड्रन लीडर राजीव पुंडीर, राइफलमैन विजय भंडारी, नायक मेख गुरुंग, राइफलमैन जयदीप भंडारी, राइफलमैन नरपाल सिंह, सिपाही राजेश गुरुंग, नायक हीरा सिंह, नायक कशमीर सिंह, नायक देवेंद्र सिंह, लांस नायक शिवचरण सिंह, नायक बृजमोहन समेत 19 जांबाज कारगिल युद्ध में दुश्मनों से लोहा लेते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे।
फाइलों में कैद हैं राज्य सरकार के वादे
कारगिल युद्ध में शहीद सैनिकों के परिवारों के लिए तत्कालीन केंद्र सरकार के साथ ही राज्य सरकार ने कई घोषणाएं की थी। इनमें में केंद्र सरकार की ओर से की गई घोषणाएं तो लगभग पूरी हो गई हैं, लेकिन राज्य सरकार की ओर से की गई घोषणाएं आज तक भी फाइलों में कैद हैं।


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