ऋषिकेश,15जुलाई (AKA)। श्री गीता आश्रम के उत्तराधिकारी के रुप की गई प्रकाशानंद सरस्वती के नाम की घोषणा को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है । जिसके चलते सोमवार को आयोजित आश्रम में पत्रकार वार्ता के दौरान जानकारी देते हुए महामंडलेश्वर स्वामी वेदव्यासानंद सरस्वती श्री गीता आश्रम इंटरनेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष दीपक गुप्ता व सचिव मुनेश त्यागी ने बताया कि उनका ट्रस्ट एक रजिस्टर्ड संस्था है। जिसकी समस्त गतिविधियां वर्षों से संचालित की जा रही है। परंतु उन्हें उस समय भारी आघात लगा ,जब 28 मई के कुछ समाचार पत्रों में गीता आश्रम के उत्तराधिकारी प्रकाशानंद सरस्वती बनाए जाने के समाचार प्रकाशित हुए। जिसे लेकर उन्होंने संत समाज द्वारा घोषित तेरह अखाड़ों के पदाधिकारियों से बातचीत की। जिन्होने बताया कि उन्हें इस मामले में पूरी तरह गुमराह किया गया है। दीपक गुप्ता का कहना था की उनके आश्रम में 27 मई को एक संत सारंग द्वारा भंडारा आयोजित किया गया था ।जिसमें आश्रम के उत्तराधिकारी प्रकाशानंद सरस्वती को चादर उढाई जाने की बात प्रकाश में आई जो कि पूरी तरह अवैध है। दीपक गुप्ता ने बताया कि जिन्हे चादर ओढाई गई है ।उनका वास्तविक नाम विद्या प्रकाश मिश्रा है ।जिनके विरूद्ध फर्जी वसीयत बनाकर ट्रस्ट की संपत्तियों को खुर्द बुर्द किए जाने संबंधी वाद न्यायालय में चल रहे हैं। और यह व्यक्ति 6 महीने तक जेल में रहने के उपरांत जमानत पर है ।
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श्री गीता आश्रम के उत्तराधिकारी के रूप में प्रकाशानंद सरस्वती को उढाई गई अखाड़ों की चादर को ट्रस्ट ने अवैध बताया


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