ऋषिकेश 28 जुलाई।  श्रावण मास सौर एवं चंद्र दोनों पद्धतियों से दूसरे सोमवार का व्रत आज रखा जाएगा आज प्रातः काल से द्वादशी एवं सायंकाल त्रयोदशी होने से सोम प्रदोष का अद्भुत संयोग बनने से जब तक मंत्र एवं यंत्र साधना के लिए विशेष फलदाई योग बन रहा है
राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज आईडीपीएल में संस्कृत प्रवक्ता आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने बताया कि इस बार सावन के सोमवार ओं पर साधकों के लिए अत्यंत शुभ फलदाई योग बन रहे हैं य शंभु पूजन परम पठति प्रदोषे   तस्य   स्थिराम रथ  गजेंद्र तुरंग  युक्ताम  लक्ष्मी सदैव सुमुखी  प्रददाति शंभू शिव पुराण के उपरोक्त मंत्र से सिद्ध है कि सावन मास में सोमवार को यदि प्रदोष व्रत आ जाए तो विशिष्ट फलदायक हो जाता है
  मुख्यमंत्री द्वारा ज्योतिष वैज्ञानिक की उपाधि से सम्मानित डॉ घिल्डियाल बताते हैं कि इस दिन शिव के मस्तक पर स्थित चंद्रमा सायं काल राहु के नक्षत्र में तथा भोगों के कारक शुक्र कर्क राशि में रहेंगे इस समय पर विधान से किया पूजन राहु तथा शुक्र ग्रह जनित सकल पीड़ा को हरने वाला होगा
 सभी मनोकामना की पूर्ति हेतु इस प्रकार करें शिवलिंग का चयन
  विवाह लक्ष्मी एवं ग्रह शांति हेतु स्फटिक का शिवलिंग सभी मनोकामना ओं की पूर्ति हेतु नदी तट की मिट्टी से बना शिवलिंग पारिवारिक ग्रह शांति के लिए कपूर एवं कुमकुम का शिवलिंग राजनीतिक सफलता के लिए सफेद कनेर अथवा कमल पुष्प का शिवलिंग संतान प्राप्ति के लिए आते या फलों से बना शिवलिंग सम्मान प्राप्ति के लिए पारद का शिवलिंग उत्तम स्वास्थ्य के लिए गुण एवं शक्कर का बना हुआ शिवलिंग तथा अकाल मृत्यु से रक्षा के लिए दूर्वा घास से बना शिवलिंग का उपयोग करें
   चारों पहर में पूजा हेतु मंत्र
    डॉ चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने बताया कि श्रावण मास के सोमवार को दिन एवं रात के चारों पहर में पूजन फलदाई होता है परंतु उसमें सामग्री एवं मंत्र अलग-अलग प्रयोग होते हैं जो इस प्रकार हैं प्रथम पहर दूध से ओम  ईशानाय नमः  वित्तीय पहर में दही से स्नान ओम अघोराय नमः तीसरे पहर में भी से स्नान ओम वाम देवाय नमः तथा चौथे पहर में शहद से स्नान ओम सधयोजाताय नमः  इस प्रकार सामग्री और इन मंत्रों से श्रद्धा पूर्वक पूजन करने से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।

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