ऋषिकेश ,16अगस्त (AKA)। इस्कान न्यू वृंदावन ईस्ट ट्रस्ट मधुबन आश्रम ऋषिकेश व वर्तमान में संचालित कर रहे प्रबंधक के बीच चल रहे विवाद के दौरान ट्रस्ट के दोनों ओर से मुनि की रेती थाने में रिपोर्ट दर्ज करवा दिए जाने के बाद मामला और गहरा गया है । ट्रस्ट के सदस्य हेमंत ठाकुर द्वारा इस संबंध में देहरादून मार्ग पर बुलाई गई प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों को बताया कि उनके ट्रस्ट की स्थापना अंतरराष्ट्रीय कृष्णा भावना संघ परंपरा के अंतर्गत 1966 में कोलकाता निवासी श्री कृष्ण कृपा मूर्ति ए सी भक्तिवेदांत स्वामी श्री प्रभुपाद के द्वारा की गयी थी।। तबसे इस्कॉन के संचालन में इस ट्रस्ट को संचालित कर रहे हैं। हेमंत का कहना है कि ऋषिकेश मधुबन आश्रम भी उसी ट्रस्ट के अंतर्गत कार्यरत है ।लेकिन यह आश्रम न्यासी बोर्ड के अधिकार के अधीन हैं ।जिसकी स्थापना स्वामी कीर्तना नंद के मुंबई निवासी द्वारा 28 मई 1986 को की गई थी ।लेकिन यह संस्था इस्कॉन से अलग एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट के रूप में इस्कॉन न्यू वृंदावन ट्रस्ट के अंतर्गत गठित है ।जिसके चलते इसका सारा अधिकार भी ट्रस्ट को है। जिस के संचालन का अधिकार स्वामी भक्ति योग को दिया गया था ।लेकिन स्वामी भक्ति योग केे 2017 में निधन के बाद उनके आश्रम के कर्मचारी प्रेमप्रकाश राणा उर्फ परमानंद दास ने इस पर कब्जा जमा लिया ।जो कि पूरी तरह अवैधानिक है। वह ट्रस्ट के नियमों के विरूद्ध जाकर कार्य कर रहे हैं ।जिसमें वित्तीय अनियमितता भी शामिल है ।जिसे लेकर उन्होंने मुनी की रेती थाने में एक रिपोर्ट भी दर्ज कराई है ।जिससे वहां शांति भंग होने की आशंका है ।उन्होंने कहा कि वह न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए अपने अधिकारों को न्यायालय के द्वारा प्राप्त करेंगे ।जिसके लिए वह प्रयासरत है। पत्रकाार वार्ता में ट्रस्ट के मफतलाल, कुशल देसाई, रविंद्र नारायण माल्या, राजेश तलवार, रामकृष्ण रामनारायण ,हेमंत ठाकुर आदि भी उपस्थित थे ।


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