अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों का फाउंडेशन कोर्स विधिवत शुरू हो गया। एमबीबीएस के 12 दिवसीय बुनियादी पाठ्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिया। सर्जिकल ऑडिट एंड रिसर्च विषय पर प्रजेंटेशन में निदेशक एम्स प्रो. रवि कांत ने बताया कि क्लिनिकल ऑडिट का मुख्य प्रेरणा स्रोत फाइनेंशियल ऑडिट है। क्लिनिकल ऑडिट से हम किसी भी दवा अथवा शल्य चिकित्सा का मरीजों पर पड़ने वाले प्रभाव की  जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही कौन शल्य चिकित्सक अपने कार्य को सफलतापूर्वक अंजाम दे रहे हैं इससे इसकी जानकारी मिल सकती है। निदेशक ने बताया कि इससे हम हास्पिटल में भर्ती होने वाले और उपचार के बाद पूर्णरूप से स्वस्थ होने वाले मरीजों का लेखाजोखा भी रख सकते हैं। एम्स निदेशक पद्मश्री प्रो. रवि कांत ने बताया कि इसके जरिए हम अस्पताल में नई- नई तकनीक व सुविधाओं की जरुरत को भी चिह्नित कर सकते हैं। इस दौरान उन्होंने छात्रों को बताया कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर), नई दिल्ली की तर्ज पर एम्स ऋषिकेश में भी विद्यार्थियों के लिए शोध कार्य की मुकम्मल व्यवस्था है, इसके लिए उन्हें हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। निदेशक प्रो. रवि कांत ने एविडेंस बेस्ड मेडिसिन (ईवीएम) पर बोलते हुए छात्र-छात्राओं को विभिन्न लेवल्स ऑफ एविडेंस के बारे में भी विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को कोक्रेन डाटा बेस और मैटा एनालेसिस के बारे में भी अवगत कराया। उन्होंने बताया कि संस्थान विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई के साथ- साथ उनके रिसर्च ओरिएंटेशन को भी बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। निदेशक ने कहा कि यदि कोई छात्र एक या दो महीने में कोई रेंडमाइज्ड कंट्रोल ट्रायल (आरसीटी) करके उस पर आधारित कोई रिसर्च पेपर प्रकाशित करता है, तो यह उसके शोध कौशल (रिसर्च एप्टिट्यूड) का सर्वश्रेष्ठ मापदंड माना जाएगा। इस अवसर पर निदेशक एम्स ने बताया कि छात्र-छात्राओं की सभी प्रकार की समस्याओं के निराकरण के लिए कॉलेज प्रशासन व डीन स्टूडेंट वैलफेयर उपलब्ध हैं, जिनसे विद्यार्थी अपने पाठ्यक्रम, हाॅस्टल आदि से संबधित समस्याओं पर चर्चा कर सकते हैं। इस अवसर पर डीन एकेडमिक प्रो. सुरेखा किशोर, डीन स्टूडेंट्स वैलफेयर प्रोफेसर मनोज गुप्ता, प्रो. सौरभ वार्ष्णेय, डा. हरीश चंद्र, डा. सतीश रवि,, डा. पूर्वी कुलश्रेष्ठा, डा. जयंती पंत,डा.गीतांजलि खोरवाल आदि मौजूद थे।

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