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नई दिल्ली: सोनिया गांधी एक बार फिर कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष बन गई हैं। उन्हें अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में पार्टी की कमान सौंपी गई। लोकसभा चुनाव 2019 में हार के बाद राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था और इसके बाद से ही पार्टी में अध्यक्ष पद को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई थी। अब कांग्रेस एक बार फिर गांधी परिवार से ही सबसे लंबे समय तक कांग्रेस अध्यक्ष पद पर रहने वाली सोनिया गांधी को फिर से यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। आइए एक नजर डालते हैं सोनिया गांधी के राजनीतिक जीवन पर।
कांग्रेस के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक सोनिया गांधी का जन्म 9 दिसंबर 1946 को इटली में हुआ लेकिन भारत और भारतीय राजनीति में उनका नाम उस समय गूंजना शुरु हुआ जब साल 1968 में उनकी शादी राजीव गांधी से हुई। कैब्रिज यूनिवर्सिटी में पढ़ने के दौरान राजीव गांधी ने सोनिया गांधी को पहली बार एक रेस्टोरेंट में देखा था और बाद में दोनों की शादी हो गई। सोनिया पहली विदेशी मूल की राजनेता थीं जो हिंदुस्तानी सियासत के शिखर तक पहुंचीं। उन्होंने साल 1983 में भारत की नागरिकता स्वीकार की थी।
ऐसे बनी कांग्रेस की नेता: साल 1991 में जब सोनिया गांधी के पति राजीव गांधी की एक आत्मघाती हमले में हत्या हुई तो पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया गांधी से अध्यक्ष बनने की गुजारिश की थी लेकिन उस समय पति की हत्या से सदमें में और डरी हुईं सोनिया गांधी ने इससे इनकार कर दिया था। कई रिपोर्ट्स के अनुसार ऐसा भी कहा जाता है कि सोनिया गांधी ने उस समय कहा था, 'मैं अपने बच्चों को सड़क पर भीख मांगते देख लूंगी लेकिन राजनीति में नहीं आऊंगी।' इंदिरा गांधी और इसके बाद राजीव गांधी की मौत के बाद जाहिर तौर पर सोनिया सियासी दुनिया के खतरों से वाकिफ थीं।
बाद में सोनिया गांधी ने राजनीति में आने के पीछे कारण बताते हुए कहा था कि वह राजनीति में इसलिए आईं क्योंकि कांग्रेस पार्टी मुश्किल में थी। अगर वह उस समय सियासत से किनारा किए रहतीं तो लोग उन्हें एक कायर के तौर पर जानते।
एक के बाद एक चढ़ती गईं सियासत की सीढ़ियां: सोनिया गांधी ने पहला चुनाव साल 1999 में जीता था। वह कांग्रेस का गढ़ के रूप में चर्चित रही अमेठी से चुनाव जीती थीं जिस पर साल 2019 में बीजेपी की स्मृति ईरानी ने जीत हासिल की है। साल 2004 में और 2009 में सोनिया रायबरेली की सांसद बनीं और साथ ही कांग्रेस पार्टी को भी आम चुनाव में जीत दिलाई। उनके कांग्रेस अध्यक्ष रहते कांग्रेस नीत यूपीए की 10 साल तक केंद्र में सरकार रही। अब एक बार फिर कांग्रेस मुश्किल स्थिति में है और बेहद बुरे दौर से गुजर रही है ऐसे में सोनिया गांधी से सामने एक बार फिर बड़ी चुनौती है।
नई दिल्ली: पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज अब हमारे बीच नहीं रहीं। 66 साल की सुषमा का कार्डियक अरेस्ट के कारण मंगलवार रात को निधन हो गया। दिल का दौरा पड़ने के बाद एम्स में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन के बाद अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में कुलभूषण जाधव का केस लड़ने वाले वकील हरीश साल्वे से बातचीत की। 
साल्वे ने बताया कि मैं बहुत स्तब्ध हूं। मेरी मंगलवार को ही शाम 8:45 बजे सुषमा जी से बात हुई थी। इस दौरान सुषमा ने उनसे कहा कि वो कल (बुधवार) 1 रुपये की फीस ले लें। कुलभूषण का केस साल्वे ने सिर्फ 1 रुपए में लड़ा था। 
साल्वे ने कहा, 'ये ना सिर्फ देश का नुकसान है, बल्कि ये मेरा व्यक्तिगत नुकसान है। मेरी उनसे काफी भावुक बात हुई। उन्होंने मुझसे कहा कि तुम मुझसे मिलने आओ और जो तुमने 1 रुपए की फीस मांगी थी, वो ले जाओ। वो वास्तव में बहुत बड़ी लीडर थीं। वो बहुत ताकतवर नेता थीं। ऐसा लग रहा है जैसे मैंने अपनी बहन को खो दिया है।'
नई दिल्ली I जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में बांटने और आर्टिकल 370 के प्रावधानों को हटाने संबंधी विधेयक को केंद्र सरकार ने दोनो सदनों में बहुमत से पारित करा लिया। इसके बाद बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 के प्रावधानों को हटाने की मंजूरी दे दी। राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद अब यह विधेयक कानूनी रूप से लागू किया जा सकेगा। 

लोकसभा में बहुमत से पारित हुआ बिल 
बता दें कि मंगलवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने संबंधी आर्टिकल 370 के प्रावधानों को हटाने के लिए लोकसभा में प्रस्ताव रखा था। यहां इसे 72 के मुकाबले 352 मतों से पारित करा लिया गया। वहीं, राज्यसभा में इस प्रस्ताव को पहले ही पारित करा लिया गया था। इसके बाद बिल को राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा गया था। मंगलवार को राष्ट्रपति ने बिल पर हस्ताक्षर कर दिए। गौरतलब है कि गृह मंत्री द्वारा प्रस्तावित बिल पर मंगलवार को सदन में घंटो चर्चा चली थी। 
नई दिल्ली I कश्मीर में बीती रात से हलचल बहुत तेज हो गई है. महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला नजरबंद किए गए हैं. किसी भी हालात से निपटने के लिए जम्मू और श्रीनगर में धारा 144 लगा दी गई है. कांग्रेस ने घाटी के हालात को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा है. पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि मैंने जम्मू-कश्मीर में गंभीर घटना की पहले ही चेतावनी दी थी, लेकिन लग रहा है कि सरकार इस चेतावनी को दरकिनार करने के लिए दृढ़ संकल्पित है.
नई दिल्ली I राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तीन तलाक बिल को मंजूरी दे दी है. इस मंजूरी के साथ ही देश में तीन तलाक कानून 19 सितबंर, 2018 से लागू हो गया. बता दें, मंगलवार को राज्यसभा से तीन तलाक बिल पास हुआ था. इसके बाद इसे राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा गया था.

दो दिन पहले लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी तीन तलाक बिल पास हो गया था. बिल के पक्ष में 99 और विपक्ष में 84 वोट पड़े. उसके बाद इस बिल को राष्ट्रपति के पास भेजा गया.

इससे पहले राज्यसभा में तीन तलाक बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने का प्रस्ताव वोटिंग के बाद गिर गया. प्रस्ताव के पक्ष में 84 और विपक्ष में 100 वोट पड़े थे. बिल का विरोध करने वाली कई पार्टियां वोटिंग के दौरान राज्यसभा से वॉकआउट कर गई थीं. इस बिल में तीन तलाक को गैर कानूनी बनाते हुए 3 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान शामिल है.

तीन तलाक देने पर ये हैं प्रावधान

1. मौखिक, लिखित या किसी अन्य माध्यम से पति अगर एक बार में अपनी पत्नी को तीन तलाक देता है तो वह अपराध की श्रेणी में आएगा.

2. तीन तलाक देने पर पत्नी स्वयं या उसके करीबी रिश्तेदार ही इस बारे में केस दर्ज करा सकेंगे.

3. महिला अधिकार संरक्षण कानून 2019 बिल के मुताबिक एक समय में तीन तलाक देना अपराध है. इसलिए पुलिस बिना वारंट के तीन तलाक देने वाले आरोपी पति को गिरफ्तार कर सकती है.

4. एक समय में तीन तलाक देने पर पति को तीन साल तक कैद और जुर्माना दोनों हो सकता है. मजिस्ट्रेट कोर्ट से ही उसे जमानत मिलेगी.

5. मजिस्ट्रेट बिना पीड़ित महिला का पक्ष सुने बगैर तीन तलाक देने वाले पति को जमानत नहीं दे पाएंगे. 

6. तीन तलाक देने पर पत्नी और बच्चे के भरण पोषण का खर्च मजिस्ट्रेट तय करेंगे, जो पति को देना होगा.

7. तीन तलाक पर बने कानून में छोटे बच्चों की निगरानी और रखावाली मां के पास रहेगी.

8. नए कानून में समझौते के विकल्प को भी रखा गया है. हालांकि पत्नी के पहल पर ही समझौता हो सकता है लेकिन मजिस्ट्रेट की ओर से उचित शर्तों के साथ.

नई दिल्ली: आम जनता के लिए अच्छी खबर आई है। एक महीने के अंदर बिना सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर के दामों में दो बार कटौती हुई है। बिना सब्सिडी वाली रसोई गैस (LPG) की कीमत में बुधवार को अंतरराष्ट्रीय दरों में नरमी के कारण 62.50 रुपए प्रति सिलेंडर की कटौती की गई। बुधवार आधी रात से इनकी कीमत 574.50 रुपए होगी। घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को अब जुलाई 2019 के 637 रुपए प्रति सिलेंडर के स्थान पर अगस्त 2019 में केवल 574.50 रुपए प्रति सिलेंडर देने होंगे।

इससे पहले 30 जून को एलपीजी सिलेंडर के दाम में 100.50 रुपए की कटौती की गई थी। इस कटौती से रसोई गैस की कीमत 1 जुलाई से 637 रुपए प्रति सिलेंडर हो गई थी, जो कि 737.50 रुपए थी। कुल मिलाकर एक महीने में बिना सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत 163 रुपए कम हुई है।सब्सिडी वाली रसोई गैस की कीमत 494.35 रुपए प्रति सिलेंडर है।

उससे पहले 1 जून को बिना सब्सिडी वाला घरेलू एलपीजी सिलेंडर 25 रुपए महंगा हो गया था। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क दर और विदेशी मुद्रा विनिमय दर के अनुरूप एलपीजी सिलेंडर के दाम तय होते हैं, जिसके आधार पर सब्सिडी राशि में हर महीने बदलाव होता है। जब अंतरराष्ट्रीय दरों में वृद्धि होती है तो सरकार अधिक सब्सिडी देती है और जब दरें नीचे आती हैं तो सब्सिडी में कटौती की जाती है। 
नई दिल्ली कर्नाटक में जारी सियासी संकट के बीच आज का दिन काफी अहम होने वाला है. दरअसल आज कर्नाटक में मौजूदा सरकार रहेगी या नहीं, इसका फैसला होने वाला है. आज होने वाले विश्वास मत से कर्नाटक की सियासी तस्वीर के पूरी तरह से साफ होने की उम्मीद है.

कर्नाटक में जब से कांग्रेस और जनता दल सेक्यूलर (जेडीएस) के गठबंधन की सरकार बनी है, तब से ही इस सरकार पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं. हालांकि कांग्रेस-जेडीएस विधायकों के इस्तीफे के बाद से कर्नाटक सीएम एचडी कुमारस्वामी की कुर्सी पर खतरा और ज्यादा बढ़ गया. ऐसे में अब विश्वास मत की नौबत आ चुकी है. राजनीतिज्ञों का दावा है कि कर्नाटक सरकार गिर सकती है.

224 सदस्यीय वाली कर्नाटक विधानसभा में विधायकों के इस्तीफे के ड्रामे से पहले बीजेपी के 105 सदस्य थे. इसके अलावा कांग्रेस 75+1 (स्पीकर) और जेडीएस के 37 सदस्य थे. हालांकि अब विधायकों के इस्तीफे देने के बाद समीकरण मौजूदा सरकार के लिए बिगड़ गए हैं. बागी विधायकों के कारण बीजेपी के विधानसभा में सदस्यों की संख्या तो फिलहाल उतनी ही है, लेकिन कांग्रेस और जेडीएस को इस मामले में नुकसान उठाना पड़ सकता है क्योंकि कांग्रेस के अब 65+1 (स्पीकर) और जेडीएस के 34 विधायक ही बच गए हैं. जिसके कारण दोनों पार्टियां का कुल आंकड़ा विधानसभा में बीजेपी से कम आ रहा है. इसके अलावा कर्नाटक में निर्दलीय 2, बीएसपी का एक और नॉमिनेटेड एक सदस्य मौजूद है.

इसके अलावा गुरुवार को 15 विधायकों के विधानसभा नहीं पहुंचने पर पूरा समीकरण ही बदल जाएगा. कर्नाटक की 224 सदस्यीय विधानसभा में तब कुल 209 सदस्य रह जाएंगे. वहीं दूसरी ओर सत्तारूढ़ गठबंधन संख्या बल घटने के कारण बहुमत साबित करने में परेशानी झेल सकता है. इस स्थिति का फायदा उठाते हुए बीजेपी निर्दलीय विधायकों की मदद से सरकार बनाने में सक्षम होगी.
नई दिल्ली I बालाकोट एयरस्ट्राइक के 140 दिन बाद पाकिस्तान ने अपने एयरस्पेस को मंगलवार को खोल दिया है. पाकिस्तान सिविल एविएशन अथॉरिटी की ओर से जारी नोटिस में कहा गया कि तत्काल प्रभाव से पाकिस्तान एयरस्पेस को सभी प्रकार के नागरिक यातायात के लिए खोल दिया गया है. इस कदम से एयर इंडिया को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. पाकिस्तानी एयरस्पेस बंद होने से एयरइंडिया को 491 करोड़ रुपये का भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा.

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को आत्मघाती बम विस्फोट के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने के कारण भारतीय उड़ानों के लिए पाकिस्तानी एयर स्पेस को बंद कर दिया गया है. नई दिल्ली से उड़ान भरने वाले विमानों की उड़ान की अवधि बढ़ जाने से एयर एंडिया को अतिरिक्त ईंधन की खपत और कर्मचारियों पर होने वाले खर्च में वृद्धि और उड़ानों में कमी आने के कारण रोजाना छह करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था.

पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र पर रोक के कारण एयर इंडिया की उड़ान को नई दिल्ली से अमेरिका जाने में अब दो-तीन घंटे अधिक लगते हैं. वहीं, यूरोप की उड़ानों को करीब दो घंटे अधिक लगते हैं, जिससे वित्तीय नुकसान होता है. भारतीय वायुसेना की ओर से पाकिस्तान के बालाकोट स्थित जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शिविरों पर 27 फरवरी को हमला करने के बाद से पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र में उड़ान भरने पर रोक लगा दी गई थी, जिससे नई दिल्ली से यूरोप और अमेरिका के लिए विमान सेवा देने वाली अधिकांश एयरलाइंस प्रभावित हुई थीं.
नई दिल्ली: कर्नाटक में सरकार बचाने की कवायद में कांग्रेस और जेडीएस जुटे हुए हैं। कुमारस्वामी सरकार का दावा है कि सरकार को किसी तरह का खतरा नहीं है। इन सबके बीच मुंबई में ठहरे हुए कांग्रेस के बागी विधायकों ने डी के शिवकुमार से अपनी जान का खतरा बताया है। बागी विधायकों की मांग पर उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। 

मुंबई के जिस होटल रैनिसेंस में बागी विधायक रुके हुए हैं उसकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। एडिश्नल पुलिस कमिश्नर ने होटल की सुरक्षा का जायजा लिया।बागी विधायकों की मांग पर महाराष्ट्र स्टेट रिजर्व पुलिस फोर्स और रॉयट कंट्रोल पुलिस ने होटल रैनिसेंस की घेरेबंदी की है। बागी विधायकों का कहना है कि उन्हें इस बात की जानकारी मिली है कि सीएम एच डी कुमारस्वामी और डी के शिवकुमार होटल में तोड़फोड़ करने आ रहे हैं। इस तरह की जानकारी के बाद वो लोग डरे हुए हैं। 

कर्नाटक राजनीतिक संकट अपडेट्स
कांग्रेस और जेडीएस के बागी विधायकों ने अब स्पीकर के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। विधायकों का कहना है कि स्पीकर अपने संवैधानिक कर्तव्य को निर्वाह नहीं कर रहे हैं। वो जानबूझकर उनके इस्तीफे को मंजूर करने में देरी कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई अब गुरुवार को होगी। 
रेनिसंस होटल ने आपातकाल का हवाला देते हुए कांग्रेस नेता डी के शिवकुमार के होटल बुकिंग को कैंसिल कर दिया है। इस बीच शिवकुमार ने कहा कि राजनीति में कुछ भी स्थाई नहीं है। न तो कोई स्थाई दोस्त है और न ही कोई स्थाई तौर पर दुश्मन। हम चाहते हैं कि कांग्रेस के वो साथी जिनके दिल और दिमाग में किसी तरह का रोष है उसे कम किया जा सके।

नई दिल्ली कर्नाटक का सियासी 'नाटक' रविवार को भी जारी रहा. एक तरफ जहां मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने बेंगलुरु के ताज वेस्ट एंड होटल में पार्टी नेताओं के साथ बैठक की. वहीं कांग्रेस-जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) से इस्तीफा दे चुके विधायकों ने कहा कि उनके दोबारा बेंगलुरु लौटने और इस्तीफा वापस लेने का कोई सवाल नहीं है. हालांकि बीजेपी इस पूरे मामले पर वेट एंड वॉच की मुद्रा में है. हालांकि बीजेपी कर्नाटक के प्रदेश अध्यक्ष येदियुरप्पा ने तमुकुर जिले के सिद्धगंगा मठ में अपने समर्थकों को विक्ट्री साइन दिखाकर उनका अभिवादन किया. विधानसभा स्पीकर छुट्टी पर हैं और मंगलवार को इस्तीफों पर फैसला ले सकते हैं.

लेकिन सोमवार का दिन कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के लिए बेहद अहम है. दोनों पार्टियां लगातार नाराज विधायकों से बात करके उन्हें मनाकर वापस लाने की कोशिश कर रही हैं. सियासी संकट के बीच कर्नाटक सरकार के मंत्री रहमान खान सोमवार को कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल से मुलाकात करेंगे. वह भी कुछ मुद्दों पर वेणुगोपाल से चर्चा करना चाहते हैं.

इसके अलावा कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर ने अपने आवास पर सुबह 9.30 बजे कांग्रेस के सभी मंत्रियों को चर्चा के लिए बुलाया है. उम्मीद है कि इसमें आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी. कर्नाटक के गृह मंत्री एमबी पाटिल ने कानूनी सलाह लेने का संकेत दिया. उन्होंने कहा कि क्या गठबंधन कोर्ट जा सकता है, इसके लिए कानूनी सलाह भी ली जाएगी. हालांकि दोनों पार्टियों के कई नेताओं ने यह भी कहा कि विधायकों को मनाकर वापस बुला लिया जाएगा और सरकार पूरी तरह सुरक्षित है.

इसके अलावा मंगलवार को भी कांग्रेस की अहम बैठक होगी, जिसमें सभी 78 विधायकों को बुलाया गया है. 13 विधायकों के इस्तीफे के बाद कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन वाली कुमारस्वामी सरकार गिरने की कगार तक पहुंच गई है. लिहाजा सोमवार का दिन बेहद अहम रहेगा. अगर विधायक अपना फैसला बदल लेते हैं तो कुमारस्वामी सरकार से खतरे के बादल खत्म हो जाएंगे. लेकिन अगर ऐसा नहीं होता तो पार्टी का अल्पमत में आना तय माना जा रहा है.

बागी विधायक मानने को तैयार नहीं

कर्नाटक संकट के बीच बागी विधायक मुंबई में हैं. उन्होंने कहा कि हम 10 लोग यहां हैं. हम इस्तीफा दे चुके हैं और इस बारे में राज्यपाल को भी बता दिया है.  हम सभी साथ हैं. रामलिंगा, आनंद सिंह और मुनीरत्ना सोमवार को मुंबई आएंगे. सोमशेखर ने कहा, हम 13 विधायक इस्तीफा वापस नहीं लेंगे और न ही कांग्रेस विधायक दल की बैठक में हिस्सा लेंगे.

सोमशेखर ने कहा कि हमने मुख्यमंत्री बदलने की मांग भी नहीं की. 12 जुलाई से कर्नाटक विधानसभा का सत्र शुरू होने जा रहा है. स्पीकर ने फिलहाल इन विधायकों के इस्तीफे मंजूर नहीं किए हैं. लेकिन सत्र के दौरान इस पर चर्चा जरूर होगी. अगर कुमारस्वामी सरकार से बहुमत साबित करने को कहा गया और वह ऐसा नहीं कर पाई तो सरकार गिर जाएगी.

यह है मौजूदा गणित

225 सदस्यों वाली कर्नाटक विधानसभा में गठबंधन सरकार के 118 विधायक थे. यह बहुमत के आंकड़े 113 से पांच ज्यादा है. कांग्रेस के 80 विधायक (विधानसभा अध्यक्ष सहित) हैं. जबकि 37 विधायक जेडीएस के हैं. अन्य तीन विधायक बहुजन समाज पार्टी, कर्नाटक प्रगन्यवंथा जनता पार्टी और एक निर्दलीय विधायक है. बीजेपी के 105 विधायक हैं.

कांग्रेस के 10 विधायक इस्तीफा दे चुके हैं, जिससे उसके विधायकों की संख्या 70 हो गई है. जबकि जेडीएस के 3 विधायकों ने इस्तीफा दिया है और उसके सदस्य 34 हो गए हैं. दोनों पार्टियों के अब मिलाकर 106 विधायक हैं, जिनमें बसपा, प्रगन्यवंथा जनता पार्टी और एक निर्दलीय विधायक शामिल है.
नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को मनाने के लिए सैकड़ों कार्यकर्ता अकबर रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय के बाहर धरने पर बैठे हैं। इन सभी की मांग है कि राहुल गांधी अपना इस्तीफा वापस ले लें। शाम को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अहमद पटेल भी कार्यकर्ताओं के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए धरना स्थल पर आए और उनसे बातचीत की।

लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार की जिम्मेदारी लेते हुए राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। तभी से पार्टी के शीर्ष नेता और कार्यकर्ता उनसे इस्तीफा वापस लेने की मांग कर रहे हैं। इससे पहले मंगलवार को दिन में एक स्थानीय पार्टी कार्यकर्ता ने अकबर रोड के बाहर एक पेड़ से लटककर आत्महत्या का प्रयास किया, लेकिन अंततः वहां मौजूद कांग्रेस नेताओं द्वारा उसे रोक दिया गया था।

स्थानीय नेता हनीफ खान ने दावा किया कि अगर गांधी पार्टी प्रमुख के पद से इस्तीफा देने के अपने फैसले को वापस नहीं लेते, तो वे पेड़ से लटककर आत्महत्या कर लेंगे। 

बैठक के बाद गहलोत ने कहा था, 'बैठक में अच्छी बातचीत हुई। चुनाव में हार-जीत होती रहती है। राहुल गांधी के इस्तीफे पर अभी कोई फैसला नहीं। राहुल को कार्यकर्ताओं की भावनाएं बताईं। उम्मीद हो वो हमारी बात पर गौर करेंगे। वो सही समय आने पर फैसला करेंगे। वर्तमान हालात पर उनसे खुलकर बात हुई।'
नई दिल्ली: तेलुगु देशम पार्टी (TDP) को एक के बाद एक झटका लग रहा है। प्रवक्ता लंका दिनकर ने बुधवार को पार्टी छोड़ दी और दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा की उपस्थिति में भाजपा में शामिल हो गए। दिनाकर ने टीडीपी प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू को भी अपना इस्तीफा सौंप दिया। 

उन्होंने अपने इस्तीफा पत्र में कहा, 'मैं लंका दिनकर अपने परिवार के सदस्यों के सर्वसम्मति से निर्णय के बाद पार्टी में राष्ट्रीय प्रवक्ता और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता के रूप में अपना इस्तीफा सौंप रहा हूं।' बीजेपी में शामिल होने पर दिनकर ने कहा, 'मैं बीजेपी में शामिल होकर बहुत खुश हूं। मैं इस राष्ट्र के निर्माण के लिए पीएम मोदी और अमित शाह जी के दिखाए मार्ग पर चलना चाहता हूं। मैं आंद्र प्रदेश में पार्टी के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगा।' 

इनके अलावा टीडीपी बिजनेस सेल के सचिव, कोनेरू वेंकट कृष्णन भी बुधवार को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के राज्यसभा सदस्य राम कुमार कश्यप और पूर्व सांसद एपी अब्दुल्लाकुट्टी भी बुधवार को भाजपा में शामिल हो गए। 

इससे पहले, टीडीपी के राज्यसभा सांसद- वाईएस चौधरी, सी एम रमेश, टी जी वेंकटेश सभी आंध्र प्रदेश के और तेलंगाना के रहने वाले जी मोहन राव पिछले हफ्ते भाजपा में शामिल हुए। चारों सांसदों ने राज्यसभा के चेयरमैन और उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू से मिलकर अपना इस्तीफा सौंपा था। हालांकि इनके इस्तीफे के बाद भी इनकी राज्यसभा की सदस्यता नहीं जाएगी क्योंकि पार्टी के मौजूदा राज्यसभा सदस्यों में से आधे से अधिक सांसद एक साथ पार्टी छोड़ रहे थे। इन चार सदस्यों के पार्टी से इस्तीफा देने के बाद अब राज्यसभा में पार्टी  के सांसदों की संख्या 6 से घटकर अब 2 हो गई है। 

आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में टीडीपी के महज 23 सीटों पर सिमटने के एक महीने बाद यह बात पार्टी को ये झटके लगे हैं, जबकि जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआरसीपी को 175 में से 151 सीटों पर जीत हासिल हुई। हाल के लोकसभा चुनावों में भी टीडीपी केवल 3 सीटें जीत सकी।

2014 के लोकसभा चुनाव में टीडीपी एनडीए की साथी थी लेकिन 2018 में पार्टी ने गठबंधन का साथ छोड़ दिया था। जबकि अविश्वास प्रस्ताव के दौरान विपक्ष के समर्थन में वोट किया था। टीडीपी ने कहा था कि बीजेपी सरकार ने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा न देकर, यहां के लोगों  के साथ विश्वासघात किया है। 
नई दिल्ली। आगामी वर्ष में दिल्ली में विदानसभा चुनाव है। ऐसे में राजनेताओं द्वारा वादों-इरादों का पिटारा भी लगातार खुल रहा है। महिलाओं को मुफ्त मेट्रो सुविधा की बात कहने वाली दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने एक और बड़ा ऐलान किया है। आप सरकार ने दिल्ली में 2.5 लाख से 6 लाख की सालाना आय वाले परिवार के छात्रों को फीस की 25% स्कॉलरशिप देने का ऐलान किया है। इसके अलावा 1 लाख से 2.5 लाख की सालाना आय वालों को फीस की 50% स्कॉलरशिप व 1 लाख से कम सालाना आय वालों को 100% स्कॉलरशिप देने की घोषणा की है। 

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने  त्यागराज स्टेडियम में 12वीं कक्षा में टॉप करने वाले छात्रों के सम्मान समारोह के दौरान सिसोदिया ने यह ऐलान किया। बता दें कि अभी तक छात्रों को 1500 रुपये सीबीएसई बोर्ड की फीस देनी पड़ती थी। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मुख्य अतिथि रहे।

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि पीएम की लोकप्रियता इतनी थी कि कोई उनके सामने खड़ा नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि उनकी सुनामी थी और सबकुछ बह गया। कम से कम हम जिंदा तो हैं। खुर्शीद ने कहा, 'आज तो हम यही जानते हैं चुनाव हुआ और चुनाव में पीएम की लोकप्रियता इतनी थी कि उसके सामने कोई खड़ा नहीं हो पाया। लेकिन एक अच्छी बात थी कि सुनामी आई उसने सबकुछ बहा दिया, लेकिन कम से कम हम जिंदा रहे और आपसे बात तो कर सकते हैं।' 
जब उनसे पूछा गया कि आप पीएम मोदी की लोकप्रियता को मानते हैं तो उन्होंने कहा, 'अगर नहीं मानते तो कहना पड़ेगा जो चुनाव हुआ वो गलत हुआ। आपको चुनाव को तो मानना पड़ेगा ना।'
हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनावों में कांग्रेस सिर्फ 52 सीटें ही जीत सकी। खुर्शीद उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद से चुनाव लड़े और 55258 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। 2014 के लोकसभा चुनाव में वह चौथे स्थान पर आए और उनकी जमानत जब्त हुई। वह 2009 के आम चुनाव में फर्रुखाबाद लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए थे। वह फर्रुखाबाद क्षेत्र के हैं। इससे पहले वह फर्रुखाबाद लोकसभा क्षेत्र से 10वीं लोकसभा (1991-1996) के लिए चुने गए थे।
उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1981 में इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में स्पेशल ड्यूटी पर एक अधिकारी के रूप में की। यूपीए-2 में खुर्शीद विदेश मंत्री भी रहे। वो कानून और न्याय  और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री भी रहे।
नई दिल्ली : तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के राज्यसभा के छह में से चार सांसदों के गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लेने से सत्तारूढ़ दल को उच्च सदन में अपने विधेयकों को पारित कराने में अब असानी होगी। भाजपा के पास राज्यसभा में बहुमत नहीं है और उसे अपने विधेयकों को पारित कराने के लिए बहुत हद तक विपक्ष पर निर्भर रहना पड़ता है। अब तेदेपा के चार सदस्यों का साथ मिलने से उसकी आगे की राह आसान होगी। आने वाले समय में भाजपा राज्यसभा में अपने अहम बिल पेश करने वाली है जिनमें तीन तलाक विधेयक प्रमुख है।
छह में से चार सांसदों का पाला बदलने से वह दलबदल कानून के दायरे में नहीं आएंगे। दलबदल कानून से बचने के लिए पार्टी से अलग हुए नेताओं की संख्या पार्टी के दो तिहाई आंकड़े के बराबर होनी चाहिए। ऐसे में देखा जाए तो तेदेपा के राज्यसभा में छह सांसद हैं और इनका दो तिहाई आंकड़ा चार होता है इसलिए ये सांसद दलबदल कानून के दायरे में नहीं आएंगे। यह तेदेपा नेताओं के लिए राहत की बात है।
राज्यसभा में कुल 245 सदस्य हैं और भाजपा के पास सबसे ज्यादा 71 सदस्य हैं। मीडिया रिपोर्टों की मानें तो लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद तेदेपा में खलबली मची हुई है। ऐसी चर्चा है कि ककीनाडा के एक होटल में तेदेपा के कई वरिष्ठ नेताओं एवं पूर्व विधायकों ने अपनी राजनीतिक किस्मत को लेकर बंद दरवाजे में चर्चा की है। ऐसी चर्चा है कि ये नेता आने वाले समय में पार्टी छोड़ सकते हैं। 
हाल के दिनों में भाजपा नेताओं ने दावा किया है कि आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना में विभिन्न दलों के नेताओं ने भगवा पार्टी में शामिल होने की इच्छा जताई है। भाजपा के इस दावे के बाद तेदेपा में ये टूट हुई है। लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों में तेदेपा की बड़ी हार हुई है। आंध्र प्रदेश में विधानसभा की 151 सीटों में से तेदेपा को महज 23 सीटें मिली हैं जबकि लोकसभा की 25 सीटों में से उसे महज तीन सीटों पर जीत हासिल हुई है। तेदेपा प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर एनडीए से अलग हुए और चुनाव के दौरान उन्होंने भाजपा एवं नरेंद्र मोदी का विरोध किया। बताया जा रहा है कि चंद्रबाबू इस समय देश में नहीं हैं।
नई दिल्ली: चमकी बुखार के कहर के बाद बिहार और केंद्र सरकार विपक्षी दलों के निशाने पर है। विपक्ष का आरोप है कि पिछले 15 वर्षों से नीतीश कुमार बिहार की सत्ता पर काबिज हैं। लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए उन्होंने क्या कुछ ये आत्मचिंतन का विषय है। इन सबके बीच केंद्र सरकार ने कुछ और पुख्ता कदम उठाए हैं।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि प्रभावित जिलों में आठ अतिरिक्त एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस को शामिल किया गया है। इसके साथ ही घर घर जाकर एईएस या जेईएस मरीजों की पहचान के विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

एसकेएमसीएच अस्पताल में तैनात किया गया है। इसके साथ ही विरोलॉजी लैब की स्थापना के लिए उपाय किए जा रहे हैं। इसके अलावा विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम एईएस से जुझ रहे मरीजों के केस रिकॉर्ड की जांच करेगी ताकि बीमारी का विस्तृत रूप से अध्ययन किया जा सके।

आप को बता दें कि मुजफ्फरपपुर में चमकी बुखार के शिकार हुए बच्चों की मौत की प्रमाणिक जानकारी नहीं मिल पा रही है। कोई उसे एईएस बता रहा है तो कोई कुपोषड़ को मुख्य वजह बता रहा है। चमकी बुखार से मरने वालों की संख्या 121 हो चुकी है। इस संबंध में बिहार के सीएम ने एसकेएमसीएच अस्पताल का दौरा किया था जहां उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा था। इस सिलसिले में पत्रकारों ने उनसे कई सवाल पूछे। लेकिन जवाब में उन्होंने चुप्पी साध ली थी। 
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को अपने दूसरे कार्यकाल के प्रथम बजट से पहले वित्त और अन्य मंत्रालयों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने और रोजगार सृजन को ध्यान में रखते हुए सरकार के 100 दिन के एजेंडा को अंतिम रूप देने पर जोर रहा। सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास पर हुई बैठक में वित्त मंत्रालय के सभी पांच सचिवों के अलावा कुछ अन्य मंत्रालयों के अधिकारी और नीति आयोग के शीर्ष अधिकारी भी मौजूद थे। समझा जाता है कि इस उच्च स्तरीय बैठक में कम से कम समय में देश को पांच हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को ध्यान रखते हुए सरकार के पांच वर्ष के दृष्टिकोण को स्पष्ट किया गया।
माना जा रहा है कि बैठक में किसानों की आय दोगुना करने, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री आवास योजना, सबको पेयजल, सबको बिजली समेत प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की भविष्य की रूपरेखा पर भी विचार विमर्श हुआ। कृषि क्षेत्र की समस्याओं को देखते हुए पिछले हफ्ते मोदी ने कृषि क्षेत्र में ढांचागत सुधार किए जाने, निजी निवेश बढ़ाए जाने, किसानों को बाजार समर्थन उपलब्ध कराने और लॉजिस्टिक व्यवस्था को दुरुस्त करने पर जोर देने की बात कही थी। 
प्रधानमंत्री मोदी ने संभवत: सभी विभागों के साथ सुधारों की रूपरेखा पर विचार किया ताकि देश में कारोबार करने की व्यवस्थाएं और सुगम की जा सकें तथा अर्थव्यवस्था को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके। सूत्रों ने कहा कि बैठक में राजस्व बढ़ाने तथा सुधारों के जरिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि की रफ्तार तेज करने के उपायों पर भी संभवत: चर्चा हुई। उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2018-19 में जीडीपी की वृद्धि दर घटकर 6.8 प्रतिशत पर आ गई है जो इसका पांच साल का निचला स्तर है। 
आंकड़ों के अनुसार मुद्रास्फीति भारतीय रिजर्व बैंक के संतोषजनक स्तर के दायरे में है, लेकिन जनवरी-मार्च तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 5.8 प्रतिशत के पांच साल के निचले स्तर पर आ गई। इससे वृद्धि दर के मामले में भारत अब चीन से पिछड़ गया है। वित्त वर्ष 2019-20 का पूर्ण बजट पांच जुलाई को पेश किया जाना है। मोदी ने उससे पहले शीर्ष अधिकारियों के साथ विचार विमर्श शुरू किया है। इन विचारों को बजट में शामिल किया जा सकता है। 
माना जा रहा है कि मोदी के नेतृत्व में नई सरकार जहां विनिर्माण में निवेश को प्रोत्साहन देने का प्रयास करेगी वहीं वह आगामी बजट में कृषि क्षेत्र की परेशानियों को दूर करने और किसानों की आय बढ़ाने के कदम भी उठाएगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए जाने वाले बजट में अर्थव्यवस्था की धीमी रफ्तार, फंसे कर्ज में वृद्धि और गैर-बैंकिग वित्तीय कंपनियों के नकदी संकट जैसी वित्तीय क्षेत्र की मुश्किलों, रोजगार सृजन, निजी निवेश, निर्यात पुनरोद्धार और कृषि संकट समेत अन्य मुद्दों से निपटने के लिए कदम उठाए जाने की उम्मीद है।
नई दिल्ली: सत्रहवीं लोकसभा का पहला सत्र सोमवार से शुरू होगा जिसमें केंद्रीय बजट पारित किया जाएगा और तीन तलाक जैसे अन्य महत्वपूर्ण विधेयक इसमें सरकार के एजेंडे में प्रमुख रहेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नयी लोकसभा के पहले सत्र की पूर्वसंध्या पर रविवार को सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने 19 जून को सभी दलों के प्रमुखों को ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के मुद्दे पर तथा अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया है।
लोकसभा में इस बार कई नये चेहरे होने की बात को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि निचले सदन का पहला सत्र नये उत्साह और सोच के साथ शुरू होना चाहिए।
सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस ने सरकार के साथ बेरोजगारी, किसानों की समस्या, सूखा और प्रेस की आजादी जैसे विषय उठाये। विपक्षी दल ने जम्मू कश्मीर में जल्द विधानसभा चुनाव कराने की मांग की।

भाजपा ने भी रविवार को संसदीय दल की बैठक की। इसके माध्यम से प्रधानमंत्री ने सभी भारतीयों को आश्वासन दिया कि उनकी सरकार ऐसे विधेयकों को लाने में अग्रणी रहेगी जो ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ की भावना को परिलक्षित करें। बैठक के बाद मोदी ने ट्वीट किया, ‘लोगों के आशीर्वाद के लिए भाजपा उनका आभारी है। हम अपने देशवासियों को आश्वस्त करते हैं कि हम जन समर्थक प्रशासन देंगे और ऐसे कानून बनाएंगे जिसमें ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ की भावना समाहित हो।’
लोकसभा के प्रथम सत्र से एक दिन पहले राजग की बैठक भी यहां हुई। 26 जुलाई को समाप्त होने वाले सत्र में 30 बैठकें होंगी। पहले दो दिन लोकसभा के सभी सांसदों को शपथ दिलाई जाएगी। कार्यवाहक लोकसभा अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार शपथ दिलाएंगे। लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव 19 जून को होगा और अगले दिन दोनों सदनों के संयुक्त सत्र की बैठक में राष्ट्रपति का अभिभाषण होगा।
नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल में डॉक्टर के साथ हिंसा के विरोध में देशभर में डॉक्टरों की हड़ताल थमी नहीं है। सोमवार को भी कई राज्यों में डॉक्टरों ने हड़ताल जारी रखने की चेतावनी दी है। इंडियन मेडिकल असोसियेशन (IMA) ने सोमवार को भी बड़ी संख्या में डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने की बात कही है। आईएमए ने 17 जून को देशभर में हड़ताल की घोषणा की है। हालांकि इस हड़ताल से राजधानी दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल ने किनारा कर लिया है।
आईएमए त्रिपुरा यूनिट के जनरल सेक्रेटरी डॉ. एस देब्बारमा ने कहा कि ऑल त्रिपुरा सरकारी डॉक्टर असोसियेशन और आईएमए त्रिपुरा 24 घंटों के लिए ओपीडी सेवाएं नहीं देने का फैसला किया है। बंगाल में डॉक्टरों के साथ हिंसा के विरोध में हमने ये कदम उठाना है। ओपीडी सेवाओं के अलावा अन्य सभी मेडिकल सुविधाएं पहले की ही तरह होंगी।  
आईएमए ने 17 जून को देशभर में हड़ताल की घोषणा की है। एसोसिएशन के सदस्य यहां उसके मुख्यालय पर धरना भी देंगे।
केंद्र सरकार के सफदरजंग अस्पताल, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज अस्पताल, आरएमएल अस्पताल और दिल्ली सरकार के जीटीबी अस्पताल, डॉ बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल, संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल तथा दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के डॉक्टर सोमवार को काम नहीं करेंगे।
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों की हड़ताल से गंभीर संकट पैदा हो गया है। पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था बिल्कुल तहस नहस हो गई है। समुचित इलाज नहीं मिलन से मरीज काफी परेशान हैं। एक बच्चे की मौत भी हो गई है। राज्य भर के मेडिकल कॉलेज और अस्‍पतालों से करीब 500 से अधिक डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया है। उधर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर आंदोलनकारी जूनियर डॉक्टरों को बातचीत के लिए बुलाया है। उन्होंने शुक्रवार को भी बुलाया था लेकिन डॉक्टरों ने यह कहते हुए वार्ता करने से ठुकरा दिया था कि यह उनकी एकता को तोड़ने की एक चाल है।
सीनियर डॉक्टर सुकुमार मुखर्जी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को डॉक्टरों के नहीं आने पर उन्हें शनिवार शाम 5 बजे राज्य सचिवालय नाबन्ना में मिलने का समय दिया। मुखर्जी, आंदोलन में शामिल नहीं हुए अन्य सीनियर डॉक्टरों के साथ ममता से मिलने गए और इस समस्या का हल निकालने के लिए सचिवालय में मुख्यमंत्री के साथ दो घंटे तक बैठक की। ममता ने चार दिनों से मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में सामान्य सेवाओं को बाधित करने वाले गतिरोध का हल खोजने के लिए बैठक बुलाई थी। 
न्यूज एजेंसी के मुताबिक ममता ने मेडिकल एजुकेशन के निदेशक प्रदीप मित्रा 3-4 जूनियर डॉक्टरों को बैठक के लिए सचिवालय में बुलाने के लिए कहा था। हालांकि जूनियर डॉक्टरों के संयुक्त मंच के एक प्रवक्ता ने कहा, 'यह हमारी एकता और आंदोलन को तोड़ने की चाल है। हम राज्य सचिवालय में किसी बैठक में शिरकत नहीं करेंगे। मुख्यमंत्री को यहां (एनआरएस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल) आना होगा और एसएसकेएम अस्पताल के दौरे के दौरान उन्होंने हमें जिस तरह से संबोधित किया, उसके लिए बिना शर्त माफी मांगनी होगी।'
ममता ने बृहस्पतिवार को एसएसकेएम अस्पताल का दौरा करते वक्त कहा था कि बाहरी लोग मेडिकल कॉलेजों में गतिरोध पैदा करने के लिए यहां घुस आए हैं और यह आंदोनल सीपीएम तथा बीजेपी का षडयंत्र है। जूनियर डॉक्टर एक रोगी के परिजन द्वारा डॉक्टर से मारपीट के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं।