अपनी जुबान के फ़िसलने की वजह से कई बार विवादों में आने वाले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय की ज़ुबान एक बार फिर फ़िसली और इस बार ऐसी फ़िसली कि उन्होंने भारतीय सेना की चयन प्रक्रिया को ही सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया.
किशोर उपाध्याय के निशाने पर पौड़ी के मौजूदा सांसद भुवन चंद्र खण्डूड़ी थे. उन्होंने कहा कि खंडूड़ी की किस्मत अच्छी थी कि बिना राजनैतिक उपल्बधियों के वह सांसद बन गए और फिर पूर्व मुख्यमंत्री.
लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री रहे खण्डूड़ी पर आरोप लगाते हुए उपाध्याय सीमा रेखा पार कर गए और यह कह दिया कि खंडूड़ी सेना में मेजर जनरल कभी नहीं बन पाते अगर हेमवती नंदन बहुगुणा उनकी सिफारिश नहीं करते.
उपाध्याय को शायद ध्यान नहीं रहा कि भारतीय सेना हमेशा राजनीति से दूर रही है और यही इसकी बड़ी ताकत भी मानी जाती है. सेना में पदोन्नति सिफ़ारिश से होती है, यह कहकर उपाध्याय ने विवादों का पिटारा खोल दिया है.
लेकिन किशोर उपाध्याय ने बीजेपी पर सैन्य पदों के राजनीतिकरण का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि जिस तरह से चुनावों से ऐन पहले विपिन रावत को जनरल बनाया गया और रॉ चीफ़ व डीजीएमओ पद पर नियुक्तियां की गईं, भाजपा ने इन सबका राजनीतिकरण किया है.
लेकिन ये पहला मौका नहीं है जब पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने ऐसे बयान दिए हों. वह इससे पहले भी कई बार उन्होंने विवादित बयान देकर अपनी पार्टी को अजीब परिस्थितियों में डालते रहे हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंगा से किया वादा पूरा न करने का आरोप लगाते हुए उपाध्याय ने कहा था, “अगर मोदी अपनी मां की अस्थियां विसर्जित करने हरिद्वार आएं तो ऐसा न हो कि मां गंगा उनकी अस्थियां लेने से इन्कार कर दे”.
त्रिवेंद्र सरकार के कॉलेजों के वंदे अनिवार्य करने के बयान के बाद जोश में आकर उपाध्याय ने कह दिया था, “में वंदेमातरम नहीं बोलूंगा. चाहे मुझे उत्तराखण्ड से कोई बाहर निकाल दे”.
यूपी के सीएम आदित्यनाथ की लोकप्रियता पर पूछे गए के जवाब में किशोर उपाध्याय बोल गए थे, “कहीं आदित्यनाथ पर भी राम रहीम जैसे आरोप न लग जाएं.”


Post A Comment: