देहरादून । केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डा. हर्षवर्धन ने वन अनुसंधान संस्थान में स्थित वनपाल स्मारक स्थल पर वनों की सेवा में अपना जीवन बलिदान करने वाले वनपालों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद संस्थान के कार्यकलापों की समीक्षा की। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि अनुसंधान कार्य समाज की आवश्यकतानुसार किए जाएं। उन्होंने बताया कि अनुसंधान तथा विकास के क्षेत्र में आधुनिक युग में समाज की बदलती जरूरतों के मुताबिक कुछ नए क्षेत्र भी जुड़े हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किए गए सभी अनुसंधान कार्य गुणवत्ता उत्पाद के रूप में आम आदमी तक पहुँचे साथ ही इनका कोई दुष्प्रभाव भी न हो। वैज्ञानिक संस्थान में अनुसंधान गतिविधियों के साथ तालमेल स्थापित करने और राष्ट्रीय स्तर के लक्ष्यों की दिशा में अनुसंधान उन्मुख कार्य करने के लिए सरकारी विभागों के भीतर समन्वय में भी सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने वनों की घटती उत्पादकता पर चिन्ता जाहिर की और कहा कि वन प्रजातियों की कुछ ऐसी किस्में तैयार की जायें जिससे वनों की उत्पादकता बढ़ सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारे अनुसंधान कार्य ऐसे होने चाहिए जिससे हरित क्षेत्र बढ़े तथा जलवायु परिवर्तन की समस्या का समाधान हो सके। हमे कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से अधिक आजीविका के विकल्प पैदा करने पर भी ध्यान केन्द्रित करना चाहिए जो समुदायों को स्थाई आधार पर वानिकी संसाधन का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। इस अवसर पर सिद्धान्तादास महानिदेशक (वन), डा0 शशि कुमार निदेशक इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी तथा डा0 सविता निदेशक वन अनुसंधान संस्थान उनके साथ उपस्थित रहे।
डा0 नीलू गेरा उपमहानिदेशक (अनुसंधान), भावा अनु.शि.प. ने परिषद में चल रहे अनुसंधान तथा विकास के कार्यों पर जानकारी देते हुए बताया कि सभी अनुसंधान व विकास कार्य समाज के हितों पर आधारित है। इसके अलावा परिषद सभी अनुसंधान संस्थानों एवं वन विभागों को अखिल भारतीय समन्वयन परियोजनाओं के माध्यम से आपस में जोड़ने का कार्य कर रही हैं। ये सभी परियोजानाएं ईंधन, चारा तथा इमारती लकड़ी की जरूरतों को ध्यान में रखकर चलाई जा रही हैं। डा. सविता, निदेशक वन अनुसंधान संस्थान ने भी संस्थान में चल रहे अनुसंधान तथा अन्य गतिविधियों पर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा कहा कि संस्थान में चल रहे अनुसंधान कार्य एक आम आदमी की आवश्यकता के अनुरूप तथा राष्ट्रीय हित की प्राथमिकता पर आधारित है। उन्होंने अपने सम्बोधन में बताया कि भा0 वाअनुशिप के प्रशासन तहत कार्यरत यह संस्थान, वन विभागों, गैर सरकारी संगठनों स्वयं सहायता समूहों तथा किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर अनुसंधान कार्य कर रहा है। साथ ही सभी अनुसंधान कार्य राष्ट्रीय एजेण्डा के अनुरूप हैं। संस्थान सभी अनुसंधान कार्यों की जानकारी विभिन्न प्रचार प्रसार के माध्यमों जैसे प्रशिक्षण, सेमीनार, आकाशवाणी, दूरदर्शन, मेला, विचार-विमर्श गोष्ठियों तथा स्थानीय जागरूकता कार्यक्रमों द्वारा विभिन्न हितग्राहियों तक पहुँचाता है। संस्थान ने अपनी तकनीकी जानकारी आम जन तक पहुँचाने तथा उनके का शंका समाधान करने के लिए एक वानिकी सहायता केन्द्र स्थापित किया जिसमें दूरभाष पर आम जनों के प्रश्नो को सुना जाता है तथा संस्थान के विषय विशेषज्ञ द्वारा यथा समय उनके प्रश्नों के जवाब दिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि संस्थान अनुसंधान कार्यों के अलावा वानिकी शिक्षा से भी सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु संस्थान एक विश्व विद्यालय भी संचालित कर रहा है, जिसके तहत वानिकी के विभिन्न विषयों में स्नात्कोत्तर तथा डॉक्टरेट कार्यक्रम चलाए जाते हैं। सिद्धान्तादास महानिदेशक (वन) ने भी उपस्थित सभी वैज्ञानिकों तथा अधिकारियों को सम्बोधित किया और आश्वस्त किया कि मंत्रालय परिषद तथा इसके अन्तर्गत कार्यरत सभी संस्थानों के सहयोग के लिए हमेशा तत्पर है साथ ही उन्होंने परिषद एवं संस्थान में चल रहे सभी कार्यकलापों की सराहना की।

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