देहरादून । जनसंघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि सूबे के मुख्यमन्त्री त्रिवेन्द्र रावत द्वारा विधान सभा चुनाव 2017 में निर्वाचन आयोग के समक्ष दिये गये झूठे शपथ पत्र के मामले में भारत निर्वाचन आयोग नई दिल्ली ने संज्ञान लिया है। इस मामले में आयोग ने रावत द्वारा दर्शायी गयी सम्पत्ति की कीमत के मामले में पुनर्मूल्यांकन हेतु पत्र सभापति, केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, वित्त मन्त्रालय नई दिल्ली को पत्र जॉंच हेतु भेजा है।
नेगी ने कहा कि जनसंघर्ष मोर्चा द्वारा माह अक्टूबर 2017 में भारत निर्वाचन आयोग को पत्र भेजकर मांग की थी कि सूबे के मुख्यमन्त्री ने आयोग के समक्ष दिये गये शपथ-पत्र में अपनी पत्नी के नाम पॉंच भू-खण्ड दर्शायें हैं, जिनकी बाजारू कीमत मात्र 28 लाख दर्शायी गयी है तथा इनके द्वारा अपने नाम लगभग सवा चार बीघा भूमि की कीमत (वर्ष 2010 में खरीदी) मात्र 08 लाख दर्शायी गयी थी, जबकि उक्त समस्त सम्पत्तियों की कीमत करोड़ो रूपये है। इसी प्रकार श्री रावत द्वारा डिफंेस कॉलोनी स्थित (पैतृक सम्पत्ति) लगभग एक बीघा भूमि जिस पर लगभग आधे क्षेत्रफल में आवास बना है कि कीमत मात्र 50 लाख दर्शायी गयी है, जबकि विधान सभा भवन से लगती हुई एवं पॉस कॉलोनी में उक्त भूमि एवं आवास की कीमत 3 करोड़ से अधिक है। नेगी ने कहा कि हैरानी की बात यह है कि उक्त सभी भू-खण्ड (पैतृक सम्पत्ति को छोड़कर) ढैंचा बीज घोटाले से अर्जित काली कमाई कर वर्ष 2010 में खरीदे गये थे। जनसंघर्ष मोर्चा का भ्रष्टाचारियों के खिलाफ मोर्चा जारी रहेगा।

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