देहरादून । यूपी राजकीय निर्माण निगम पर लग रहे घोटाले के आरोप से उसका मनोबल गिर रहा है। निर्माण निगम अगर टैक्निकल जांच में सही नहीं पाया जाता है तो उसे उत्तराखण्ड में काम मिलना बिल्कुल बंद हो जायेगा। अगर गुणवत्ता सही निकली तो उसके सारे दाग धुल जायेेगें। यूपी निर्माण निगम के एमडी से मुलाकात के बाद सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने जांच के आदेश दिये थे।
उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम के उत्तराखण्ड के जनरल मैनेजर प्रदीप कुमार शर्मा ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम को सूबे में 482 काम मिले हुए है। जिनकी कुल लागत 45 सौ करोड़ रुपये हैं। जिनको पूरा करने का लक्ष्य 2019 तक निर्धारित किया गया है। इनकों में 75 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है जबकि उत्तराखण्ड सराकर पर निर्माण निगम के 1410 करोड़ रुपये बकाया हैं। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम पर प्रदेश में लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद काम मिलने बंद हो गये जिसके बाद निगम के एमडी ने सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत से मुलाकात की। इसके बाद मुख्यमंत्री से निर्माण निगम के कार्याे की तकनीकि जांच के आदेश दिये। साथ ही यह भी कहा कि अगर जांच में निर्माण निगम खरा नहीं उतरता है तो उसे मिलने वाले काम बंद कर दिये जायेंगे तथा अगर तकनीकि जांच सही निकलती है तो फिर से निर्माण निगम का काम मिलेंगे। उन्होंने कहा कि विभाग के अधिकारी हर जांच के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड के अलाव निगम देश के 21 राज्यों में अरबों के काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम द्वारा किये जा रहे कार्यो में 80 से 90 प्रतिशत लोग उत्तराखण्ड के निवासी काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम पर बाहरी होने का आरोप लगाया जा रहा है। जबकि उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने 1976 में उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम की नीव रखी थी। उन्होंने बताया कि प्रदेश गठन से पहले से ही निगम काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि निगम को वर्ष 2008 में 12.5 प्रतिशत सेन्टेज चार्जेज मिलता था लेकिन यह अब मात्र 6.5 प्रतिशत कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में निर्माण निगम की 14 यूनिट कार्यरत है जिनमें लगभग 140 कर्मचारी कम कर रहे हैं। काम पर रोक लगने के कारण यह युनिट बंदी की कगार पर है जिसके कारण कर्मचारियों के सामने रोजी रोटी के लाले पड़ने लगे।

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