राज्य बने 17 साल पूरे होने के बाद भी कोई सरकार पहाड़ के लोगों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई हो, लेकिन सरकार खुद को लोगों का महीसा साबित करने की कोई कसर बाकि नहीं छोड़ती है. त्रिवेन्द्र सरकार ने इसी कड़ी में मास्टर स्ट्रोक चला और गैरसैंण के भराड़ीसैंण में 7 दिसम्बर से 13 दिसम्बर के बीच विधानसभा सत्र कराने का फैसला किया.
सरकार के लिये यह सत्र किसी इम्तिहान से कम नहीं है. गैरसैंण में आज भी मूलभूत सुविधाओं की कमी है. कर्मचारियों के ठहरने से लेकर दूसरी जरूरतों का इंतजाम नहीं हो सका है. भराड़ीसैंण में भवन तो लगभग तैयार है, लेकिन काम अब भी अधूरा है.
उत्तराखंड के संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि गैरसैंण हमारी संवेदनाओं और भावनाओं से जुड़ा हुआ है. गैरसैंण राजधानी का विषय बहुत दिनों से बना हुआ है. राज्य आंदोलन कारी इसे महत्वपूर्ण स्थल के रूप में मानते आए हैं. उन्होंने कहा कि इसलिए भाजपा ने लोगों की भावना का सम्मान करते हुए साल में एक बार विधानसभा सत्र गैरसैंण में करने की पहल की है.
विधानसभा सत्र को लेकर विपक्ष ने अपने तेवर तल्ख कर लिये हैं. सदन के भीतर भी गरमा-गर्मी तय है. स्थाई राजधानी के सवाल पर सरकार को असहज होना पड़ सकता है, तो विपक्ष ने भी अपने तरकश में तीर संभाल कर रख लिये हैं. इससे पहले कांग्रेस इस सत्र को आयोजन गैरसैंण में आयोजित करवाने पर पहले से ही भाजपा पर हमलावर है.
कांग्रेस सरकार के दौरान तीन बार गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित किया जा चुका है, लेकिन अब तक भाजपा विपक्ष के तौर पर ही हिस्सा लेती आयी है. अब भाजपा के लिये भी ये सत्र राजनैतिक तौर पर बेहद अहम है क्योंकि सरकार भी भाजपा की है.


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