उत्तराखंड में राज्य गठन से मौजूदा समय तक स्वास्थ्य विभाग द्वारा खरीदे गए करोड़ों रुपये के उपकरण खरीदे हैं. जिनकी जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग के सचिव नितेश झा ने खरीदे गए उपकरणों की हकीकत को परखने के लिए सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों ने खरीदे गए उपकरणों की रिपोर्ट तलब की है.
स्वास्थ्य सचिव नितेश झा ने बताया कि जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के उदेश्य से ही बजट का एक बड़ा हिस्सा विभाग द्वारा उपकणों की खरीद में खर्च किया जाता है. यूं तो स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए विभागीय अधिकारी इलाज के नाम पर मंहगे उपकण खरीद लेते हैं. बावजूद इसके हकीकत में इन उपकणों का मरीजों को स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल पाता है.
उन्होंने बताया कि महंगे-महंगे उपकरण अक्सर चिकित्सालयों में धूल फांकते हुए ही नजर आते हैं. राजधानी के एक ओर जहां दून अस्पताल में मैमोग्राफी मशीन धूल फांक रही हैं, तो वहीं उत्तराकशी के थराली के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के उपकरणों का भी कमोवेश कुछ ऐसी ही हालात है.
स्वास्थ्य सचिव नितेश झा ने बताया कि प्रदेश के कुछ चिकित्सालयों में उपकरण तो हैं, लेकिन डॉक्टर नहीं हैं जबकि कुछ चिकित्सालयों में विशेषज्ञय चिकित्सक तो हैं, लेकिन उपकरण नहीं हैं. इस मिसमैच को दूर करने के उदेश्य से ही उपकणों का ब्यौरा तलब करने का निर्णय लिया है.


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