उत्तराखंड जब से वजूद में आया है यहां अपराध की संख्या दूसरे पड़ोसी राज्यों के मुकाबले बेहद कम है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के पिछले साल की रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड में वरिष्ठ नागरिकों के मामले में केवल एक ही आपराधिक केस दर्ज हुआ है. महाराष्ट्र देश में सीनियर सिटीजन क्राइम रेट में पहले पायदान पर है, तो उत्तराखंड अस्सी प्रतिशत की कमी के साथ आखिरी सी दूसरे पायदान पर है. इस सरकारी रिपोर्ट के आधार पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए उत्तराखंड को सबसे सुरक्षित राज्यों में से एक मान सकते हैं, लेकिन राज्य के मानवाधिकार आयोग ने उत्तराखंड पुलिस के आकड़ों और एनसीआरबी की रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए हैं.

मानवाधिकार आयोग को लगता है कि इस मामले में कहीं न कहीं आंकड़ों की बाजीगरी की गई है.मानवाधिकार आयोग उत्तराखंड के रजिस्ट्रार एस.के गुप्ता ने बताया कि आयोग ने इस विषय में संज्ञान लेते हुए पुलिस से तथ्य मांगे है, जिनकी जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी.

जब इस मामले में हमने राज्य के पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार का कहना है कि आयोग के नोटिस पर मुख्यालय स्तर पर गंभीरता से जांच कराई जाएगी. जांच पूरी होने के बाद जिसकी रिपोर्ट भी भेजी जाएगी.

एनसीआरबी की रेटिंग के अनुसार भले ही उत्तराखंड बेहतरीन स्थिति में खड़ा हो, लेकिन मानवाधिकार आयोग ने जिस तरह से राज्य पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों पर सवालिया निशान लगाया है. पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि क्या उत्तराखंड वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षित है या नहीं.

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