ऋषिकेश, आज का आदित्य। पार्शव गायक नरेन्द्र चंचल ने कहा कि जय माता दी नाम स्मरण करने से ही मनुष्य के सभी कष्ठदूर हो जाते हैं। माॅ की भक्ति व पूजन से सभी को सुख व शांति मिलती है। जो सच्चे मन से उनका स्मरण करता है ताॅ उसकी मनोकामना जरूर पूरी करती हैं। उन्होंने कहा कि धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। झूठ, लालच तथा हिंसा का त्याग करना चाहिए। जीवन में सुख पाना है तो संसार के कुछ पदार्थो को छोड़ने का प्रयास करें। इसके लिए माॅ की भक्ति, पूजा और सामाजिक विश्वास करने हुए जीवन आगे बढ़ायें। यही जीवन का सार है। जब कुछ नहीं आज तक हर तरफ तूरी खुशबु आती है।
नरेन्द्र चंचल उत्तराखंड की धार्मिक नगरी हरिद्वार के मातेश जी द्वारा आयोजित माता की चैकी में मां का गुणगान करने के लिए पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि भाव जब-जब एक भक्ट के ह्दय से निकलते हैं तब तक वह भक्त की भक्ति को निहार देते हैं। इसलिए कहा है कि भरा नजीं जो भावों से बहती जिसमें प्रमें की रस धार नहीं, ह्दय नहीं वह पत्थर हैं जिसमें मां का प्यार नहीं। उन्होंने कहा कि यदि हम मां को पाना चाहते हैं तों हमारे पास भक्ति का धन होना आवश्यक है। एक प्रश्न के जवाब में भजन सम्राट नरेंद्र चंचल ने कहा कि बेटियां बेटो से कम नहीं है। ऐसे में हमें भ्रूण हत्या जैसे कलंक को समाज से मिटाना चाहिए। लोगों को बेटियों के जन्म पर अपनी सोच को बदलने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि भारतवासी देश के शहीदों को शत-शत नमन करते हुए सलूट है। उन्होंने अमन शांति की कामना करते हुए कहा कि हमें देश के लिये भी काम करना होगा। देश का भला होने पर ही हम सभी का भला होगा। भजन सम्राट चंचन ने कहा कि गंगा हमारी मां है। हम उसकी गोद में खेलते हैं। गंगा के राफ्टिंग के प्रदूषण फैलता है। लोग गंगा में अस्थियां प्रवाह करते हैं। ये सब होने के बावजूद भी मां गंगा पवित्र है। लोग इसका जल ग्रहण करते है, जो निर्मल व स्वच्छ हैं। एक प्रश्न के जवाब में नरेंद्र ने बताया कि उनकी मां दुर्गा की भक्ति भी इसलिए वह भजन व आरती गाया करती थी और उनके पिता म्यूजिक से ज्यादा पढाई में जोर देते थे।
नरेन्द्र चंचल गायक के अलावा कवि व अच्छे लेखक भी हैं। उनके कई लेख प्रकाशित भु हुए हैं। अब तक उनकी हजारों सीड़ी मार्केट में आ चुकी हैं और समय-समय पर उनकी भेंटो की रिकार्डिंग भी होती है।
नरेन्द्र चंचल ने कहा कि चारों धाम आस्था का केंद्र हैं। प्राकृतिक का नियम है उसके खाते में सब जुड़ता है और उसी का भुगतान भी करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जब-जब उत्तराखण्ड में विपत्ति आई है उन्होंने मां के प्रत्येक जागरणो व चैकियों में से बड़ी मात्रा में धन निकालकर उन लोगों की मद्द की थी।
उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड देवभूमि है जहां देवतागण वास करते हैं कण-कण में वास करते हैं। केदारनथा में जो घटना हुई थी उसका जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस विपत्ति की घड़ी में भी उन्होंने सैकड़ो दुखी लोगों की मदद की थी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंडवासी तो भाग्यशाली है उनके तो हम सबको पैर धोने चाहिए। नरेंद्र चंचल के साथ सतीश आरोड़ा, मातेश, टी सीरीज के डायरेक्टर दर्शन कुमार व डीपी नारंग, महेन्द्र उपस्थित थे।


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