उत्तराखंड के शिक्षा विभाग ने यह स्वीकार कर लिया है कि सरकारी स्कूलों की दशा सुधारना सरकार के बस का काम नहीं है इसलिए अब शिक्षा विभाग इस काम में निजी क्षेत्र की मदद लेगा.

उत्तराखंड के स्कूली शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे जब भी राज्य में स्कूलों (ज़ाहिराना तौर पर सरकारी) के बारे में बात करते हैं वह हमेशा ईमानदारी से इनकी स्थिति सुधारने की बात करते हैं. हालांकि इस बात पर मतभेद हो सकते हैं कि उनका विभाग इस दिशा में कितनी ईमानदारी से काम कर रहा है.

शिक्षा विभाग ने तो दबा ही दिया था प्रस्ताव 

न्यूज़ 18 ने शिक्षा मंत्री से प्रोग्रेसिव प्रिंसिपल्स स्कूल एसोसिएशन के प्रस्ताव के बारे में पूछा जो मुख्यमंत्री कार्यालय से होता हुआ शिक्षा सचिव के ऑफ़िस तक अगस्त में ही पहुंच चुका था. लेकिन शिक्षा मंत्री को इसकी जानकारी नहीं मिली.

शिक्षा मंत्री ने कहा कि उन्हें इस बारे में जानकारी है लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि स्कूलों की दशा और शिक्षा नीति की दिशा बदलने की क्षमता रखने वाले इस प्रस्ताव के बारे में शिक्षा मंत्री को विभाग से या ज़िम्मेदार अधिकारी से नहीं मिली.

उन्हें ‘प्रिंसिपल्स प्रोग्रेसिव स्कूल्स एसोसिएशन, उत्तराखंड’ के प्रतिनिधिमंडल ने मिलकर इस प्रस्ताव के बारे में जानकारी दी तभी शिक्षा मंत्री को पता चल पाया.

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