ऋषिकेश। एम्स प्रबंधन ने उत्तराखंड जन विकास मंच के चल रहे धरने को बेबुनियाद बताया। प्रबंधन के कहा है सभी मुद्दों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। मंच को बिना तथ्यों के दबाव नहीं बनाना नहीं चाहिए। 
एम्स ने 
1- पूरे धरने का कोई औचित्य नहीं है।यदि मंच के पास भ्रष्टाचार का कोई सबूत है तो वे प्रस्तुत करें, या फिर पुलिस या किसी भी जांच एजेंसी को दें ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाय।
2- मंच बार बार उत्तराखंड के मूल निवासियों को 70 प्रतिशत नौकरियों की बात कर के बेरोजगारों की भावनाओं से खेल रहा है। र्प इसको लागू करवाने के लिए अब तक एक भी भारत सरकार का आदेश प्रस्तुत नहीं कर सका। शायद मंच सरकारी कार्य प्रणाली से परिचित नहीं है।
3 -आउटसोर्सिंग तथा सिक्योरटी एजेंसी का चयन ओपन टेंडर प्रक्रिया  से हुआ है। इस समय ओरियन सिक्योरिटी साफ सफाई के लिए मनावबल प्रदान कर रही है, जो कि अगले माह से बदल जाएगी। कोर सिक्योरिटी दिसम्बर 2017 से नर्स सप्लाई कर रही है। 
प्रिन्सिपल सेक्यूरिटी नॉन टेक्निकल तथा सेक्यूरिटी के लिए मानव बल प्रदान कर रही है। इन सबका चयन ओपन टेंडर के जरिये हुआ है।
4 - जो एप्पलीकेशन फॉर्म कूड़े के ढेर में मिले थे उनके बारे में एम्स बार बार बता रहा है कि वे दस्तावेज पूर्व में मैनपॉवर सप्लाई करने वाली एजेंसी के है । किन्तु मंच बार बार इस बात को उठा कर बेरोजगारों को इमोशनल ब्लैकमेल कर रहा है। यदि वह इस मामले में जरा भी संवेदनशील है तो आज तक उसने इस मामले में पुलिस को शिकायत क्यों नहीं की?
मंच ने आज तक सिर्फ आधारहीन आरोप लगाकर सिर्फ एम्स की छवि धुमिल की है । उसका धरना राजनीति से प्रेरित है।

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