ऋषिकेश। ऋषिकेश में गंगा से पानी चोरी हो रहा है। गंगा किनारे कमर्शियल भवन जैसे होटल, रिसोर्ट, रेस्टोरेंट व आश्रम संचालक गंगा से पानी चोरी कर रहे हैं। किसानों से गंगा का पानी इस्तेमाल करने पर पैसा वसूला जाता है लेकिन इन कमर्शियल गतिविधियां करने वालों को लेकर विभाग क्यों मौन है। जबकि एनजीटी के साफ आदेश है कि इस तरह की गतिविधियां गंगा किनारे नहीं की जा सकती है। 
तीर्थनगरी ऋषिकेश के गंगा तटो से सटे व्यवसाय व धार्मिक संस्थान माँ गंगा के दोहन करने में पीछे नहीं है। जिसके चलते आज गंगा के तटों पर मोटर लगा कर गंगा जल चोरी हो रहा है जिसके चलते राज्य सरकार सहित एनजीटी के लिए गंगा संरक्षण की मुहिम एक चुनौती सी बन कर रहा गयी है ।
बताते चले की तीर्थनगरी ऋषिकेश में रामझूला तथा लक्ष्मणझूला दोनों तरफ राष्ट्रीय नदी पतित पावनी माँ गंगा से मोटर के माध्यम से अवैध तरीके से गंगाजल खींच रहे है। लक्ष्मणझूला जिलाधिकारी कैंप के पास एक आश्रम में लंबे समय से मोटर से गंगाजल खींच रहे है। जिसे कहने सुनाने वाले जिम्मेदार प्रशासन भी चुप बैठी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आश्रम किसी रसूकदार महिला का है जिस कारण कोई अधिकारी कार्यवाही करने से बचते है। बात उठती है कि आखिर माँ गंगा के संरक्षण में कई संस्थाएं काम करती है तो क्या उनकी नजर नही पड़ती ऐसे ही चलता रहा तो माँ गंगा को मनुष्यो से आने वाले समय में बहुत दूर हो जाएंगी। नदियों का पानी इस्तेमाल करने पर किसानों को इसका राजस्व देना पड़ता है लेकिन क्या गंगा से पानी चोरी करने वालों के खिलाफ कोई कानून नहीं है। अगर किसान पानी का राजस्व नहीं दे पाता है तो उसकी रिकवरी जारी कर दी जाती है। अब यहां यह कहना है कि इन गंगा के पानी चोरों के खिलाफ विभाग क्यों मौन है। 

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