देहरादून। सत्ता से बाहर होकर भी हरीश रावत न सिर्फ राजनीतिक गलियारों मे अपितु उत्तराखण्ड के सरोकारों से जुड़कर देश की राजधानी दिल्ली मे उत्तराखण्ड के परम्परागत व्यंजनों की साख बढ़ाने मे मगन है। उन्ही की मेजबानी मे दिल्ली के फिरोजशाह रोड पर हुई एक पर्वतीय व्यंजन पार्टी मे नारसन के गन्ने और गुड़ ने जमकर मिठास पैदा की। कौसानी की दुनिया की सबसे महंगी चाय की चुस्कियो के बीच अल्मोड़ा की बाल मिठाई, झिंगोरे की खीर, मण्डवे की रोटी, उत्तराखण्ड का माल्टा और कुलत की दाल महक ने ठण्ड के मौसम मे भी ऐसी राजनीतिक गर्मी पैदा की कि लोग हरीश रावत की इस पार्टी को 2019 के चुनाव की सियासत के चश्मे से देखने लगे। पार्टी मे लजीज व्यंजनों का स्वाद लेते हुए लोग यह कहते भी सुने गए कि पर्वतीय व्यंजनों को प्रमोट करने के लिए जो काम भाजपा की डबल इंजन सरकार को करना चाहिए था वह काम सत्ता मे न रहने पर भी उत्तराखण्ड के किसानो के लिए हरीश रावत कर रहे है। मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटने के बाद भी पहले से कही अधिक उत्साह के साथ हरीश रावत सियासत की पगडंडियों पर न सिर्फ कदम बढ़ा रहे है बल्कि ज्वलन्त मुद्दों पर धरना प्रदर्शन के माध्यम से अपनी जन शक्ति का एहसास भी करा रहे है। बिना किसी विशेष तैयारी व बिना किसी विशेष रूप रेखा के आयोजित इस पर्वतीय व्यंजन पार्टी मे करीब एक हजार समर्थको का उमड़ आना उनकी हाल की लोकप्रियता को प्रमाणित करता है। बहरहाल इस पार्टी मे प्रवासी उत्तराखण्डियो के साथ साथ उत्तराखण्ड के लगभग हर जिले व क्षेत्र से हरीश रावत को चाहने वाले पहुंचे थे।

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