परमार्थ निकेतन में गणतंत्र दिवस के जश्न के साथ आरम्भ हुई तीन दिवसीय सीखें, जाने और जीवन बचायें कार्यशाला
जिला स्वच्छ भारत प्रेरक बिहार के प्रतिभागियों ने परमार्थ में सीखे स्वच्छता तकनीकी गुर
स्वच्छता का बने संविधान, स्वच्छता ही समाधान-स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में गणतंत्र दिवस धूमधाम से बनाया गया। परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमार, लद्दाख से आयी युवा बौद्ध भिक्षुनियां, विदेशी सैलानियों, बिहार से आये स्वच्छ भारत मिशन के जिला समन्वयक एवं जिला स्वच्छ भारत प्रेरक बिहार के 50 से अधिक प्रतिभागियों की उपस्थित में महामण्डलेश्वर पूज्य स्वामी अंसगानन्द सरस्वती जी महाराज ने ध्वाजारोहण किया। ध्वजारोहण के पश्चात सैकड़ों की संख्या में उपस्थित प्रतिभागियों ने एक स्वस्थ एवं स्वच्छ गणराज्य के लिये एकीकृत शपथ ग्रहण की।
 परमार्थ निकेतन आश्रम में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज की प्रेरणा से सार्वभौमिक स्वच्छता एवं शौचालयों के उपयोग को सुनिश्चित करने हेतु  तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें बिहार प्रांत के 50 से अधिक स्वच्छ भारत मिशन के जिला समन्वयक एवं जिला स्वच्छ भारत प्रेरक बिहार के प्रतिभागियों ने सहभाग किया।
 ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस संगठन एवं गंगा एक्शन परिवार परमार्थ निकेतन द्वारा बिहार मंे स्वच्छता एवं शौचालय के विषय में जागरण हेतु कई महिनों से जाग्रति अभियान चलाया जा रहा है जिससे तहत स्थानीय लोगो को स्वच्छता, स्वच्छ जल, शौचालय एवं अन्य कुरीतियों के विषय में जागरूक किया जा रहा है। 
 जीवा एवं गंगा एक्शन परिवार परमार्थ निकेतन द्वारा आयोजित इस ऐतिहासिक पहल का उद्देश्य स्वच्छता सेक्टर में विशेष संगठनात्मक कौशल के साथ जिला स्तर के समन्वयक तैयार करना जो सार्वभौमिक स्वच्छता, शौचालय के उपयोग को सुनिश्चित करने के लिये ऐतिहासिक भूमिका अदा कर सके।  प्रशिक्षण में विषय विशिष्ट जानकारी और प्रबंधकीय कौशल के क्षेत्र में प्रभावी तालमेल लाने के लिये पारंपरिक और अभिनव दृष्टिकोणों के संयोजन के साथ ही नेतृत्व क्षमता, टीमवर्क, समय प्रबंधन सहित स्वच्छता के पाठ्यक्रम की जानकारी स्वच्छता तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा दी गई।
 परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, ग्लोबल इण्टरफेश वाश एलायंस के संस्थापक एवं गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा, ’स्वच्छता के लिये संविधान बनाने की जरूरत है क्योंकि स्वच्छता ही है समाधान। स्वच्छता, संविधान के साथ हमंे समर्पित, तकनीकी विशेषज्ञों एवं नायकों की जरूरत है जो प्रेरणा के साथ परिवर्तन की इबारत लिख सके। उन्होने कहा कि स्वच्छता के मुद्दों एवं प्रक्रियाओं पर विशेष ध्यान केन्द्रित करने का उद्देश्य है कि स्वच्छता के अभाव में भारत में ही प्रतिदिन पांच वर्ष से कम उम्र के 1600 बच्चों की मौत हो जाती है। भारत एक धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से युक्त राष्ट्र है; विश्व स्तर पर एक पहचान स्थापित की है ऐसे समय अगर हम मिलकर स्वच्छता के क्षेत्र में भारत को स्वच्छता आइकाॅनिक राष्ट्र के रूप में स्थापित करते है तो यह एक विशेष उपलब्धि होगी।’
 स्वामी जी ने दुःख व्यक्त करते हुये कहा, ’आज मैंने पढ़ा कि विश्व के 180 देशों मंे 177 वाँ नम्बर भारत का स्वच्छता के क्षेत्र में है जो चिंता और चिंतन दोनों का विषय है। एक ओर भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी भारत को विश्व में पहला स्थान दिलाने कि लिये निरन्तर प्रयासरत है और दूसरी ओर प्रदूषण एवं स्वच्छता के क्षेत्र में हमारे राष्ट्र की यह स्थिति है। माननीय प्रधानमंत्री जी पूरे विश्व में अपनी टीम के साथ बेहतर भविष्य के लिये कार्य कर रहे है तो पूरे देशवासियों का भी यह कर्तव्य है कि वे इस स्वच्छता की मुहिम को अपने हाथों में लें और मिलकर कार्य करें। इसके लिये हमें बस अपनी आदतों में परिवर्तन करना होगा, अपने कचरे को स्वंय सम्भालना सीखना होगा। उन्होने समाज के सभी अगों चाहे वह व्यक्ति हो, संस्था हो, स्कूल हो, नगर पंचायतें हो, नगर निकाय हो, नगर पालिका हो या अन्य कोई भी बस अपने कूडे़ को सम्भालें इस गणतंत्र दिवस की परेड के साथ हम भी स्वच्छता की परेड करे।’
 जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव एवं डिवाइन शक्ति फाउण्डेशन की अध्यक्ष डाॅ साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि कुछ वर्षों पूर्व भारत को खुले में शौच से मुक्त करना एक स्वप्न सा लगता था परन्तु अब उसे सरकार, समाज, सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं की मदद से साकार होते देखा जा सकता है।  उन्होेने कहा कि इस प्रयास को इसी मिलकर आगे भी जारी रखे ताकि स्वच्छता और स्वच्छ जल के अभाव में किसी भी माँ को अपने संतान को खोने का दर्द न सहना पड़े।’
 प्रतिभागियों ने कहा कि यहां आकर हमने जाना कि वास्तविक स्वच्छता क्या है और इसे कैसे सहजता से अपने जीवन में ला सकते है और दूसरों को भी प्रेरित कर सकते है।
 आईआईटी रूड़़की के एमबीए विभाग के प्रोफेसर रजत अग्रवाल ने कहा कि जीवा का यह प्रयास सराहनीय है मुझे लगता है निश्चित ही इसके विलक्षण परिणाम सामने आयेंगे।
 सभी प्रतिभागियों ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर स्वच्छ एवं स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण का संकल्प लिया।

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