देहरादून। सरकार ने औली में विंटर गेम्स की तारीख 15 से 21 जनवरी तो बड़े जोर-शोर से जारी कर दी थी, लेकिन अब समय से बर्फबारी न होने से इन खेलों का समय पर होना असंभव ही लग रहा है। पिछले 10 सालों में उत्तराखंड में जो भी सरकार रही, उसने औली में विंटर गेम्स कराने की ठानी तो जरूर, लेकिन उसका मकसद पूरा नहीं हो सका। इसका कारण कभी मशीनें तो कभी बर्फबारी न होना है। उत्तराखंड में त्रिवेंद्र सरकार के पास औली में विंटर गेम्स के आयोजन का ये आखिरी मौका है, अगर इस बार औली में विंटर गेम्स नहीं हुए, तो फेडरेशन ऑफ इंटरनेशनल स्कीनिंग (फीस) से उत्तराखंड की मान्यता रद्द हो जाएगी।
औली विंटर गेम्स के लिए प्रदेश सरकार ने तैयारियां तो खूब कर दी थी, लेकिन बर्फबारी न होने से सरकार की चिंता बढ़ी हुई हैं। बर्फबारी न होने से औली में विंटर गेम्स पर तलवार लटकी हुई है। अगर इस साल भी औली में विंटर गेम्स का आयोजन नहीं हुआ तो फिर उत्तराखंड से मान्यता छीन लेगी।
पूरे साउथ एशिया में औली एकमात्र स्कींग रिसॉर्ट है, जिसे फीस की मान्यता प्राप्त है। संभवत मान्यता बचाने के लिए ये आखिरी साल है, अगर औली में इस काल विंटर गेम्स का आयोजन हो जाता है तो मान्यता बची रहेगी अन्यथा औली से मान्यता वापस लेना तय है। 10 सालों से विंटर गेम्स का आयोजन न होने से फीस दूसरे देशों का रुख कर सकती है।
विंटर गेम्स के लिए उत्तराखंड सरकार इतनी भाग दौड़ भी इसलिए ही कर रही है, क्योंकि अगर त्रिवेंद्र सरकार विंटर गेम्स करवा देती है, तो इतिहास के सुनहरे पन्नों में सरकार का नाम लिखा जाएगा। तभी तो पहले पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज 3 बार औली पहुंचे और फिर सीएस उत्पल कुमार और फिर खुद मुख्यमंत्री अचानक औली पहुंच गए।
औली में बर्फबारी न होने की सूरत में कृत्रिम तरीके से बर्फ तैयार करने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से स्नो मेकिंग मशीन भी खरीदी गई हैं, जो मशीनें खराब थी उन्हें ठीक करने का दावा भी किया जा चुका है। इन खेलों के लिए बर्फबारी हो इसके लिए देवताओं की पूजा भी उत्तराखंड सरकार कर रही है। बहराल खिलाड़ी, पर्यटक और उत्तराखंड सरकार यहीं चाहते हैं कि औली में जल्द से जल्द बर्फबारी हो और खेलों का संचालन किया जा सके।

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