अफ्रीकी देशों से आये जल राजदूतों और वैज्ञानिको ने परमार्थ में सीखे “जल प्रबंधन के साथ जीवन प्रबंधन के गुर”
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन मंे जल प्रबंधन हेतु तीन दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय
सम्मेलन का आयोजन किया गया। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, ग्लोबल
इण्टरफेथ वाश एलायंस के संस्थापक एवं गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता स्वामी
चिदानन्द सरस्वती महाराज के आशीर्वाद से इस अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन का
आयोजन किया गया।
इस अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में केन्या, युगांडा, तंजानिया, लाइबेरिया, नाइजीरिया, जाम्बिया, नामीबिया, मोजाम्बिक, मेडागास्कर अन्य अफ्रीकी देशों के जल विशेषज्ञों ने सहभाग किया।
इस सम्मेलन में आईआईटी रूड़की के जल विज्ञान विभाग के प्रमुख, प्रोफेसर डाॅ डी एस आर्य के मार्गदर्शन में विश्व के 13 देशों के 25 विश्व स्तरीय जल राजदूत, जल वैज्ञानिक एवं विशिष्ट अधिकारियों ने सहभाग किया।
अफ्रीकी देशों से आये जल राजदूतों के दल ने परमार्थ निकेतन में वेद मंत्र, प्राणायाम, ध्यान, सूर्य नमस्कार, योग आसनों का अभ्यास कर ’’जल प्रबंधन के साथ जीवन प्रबंधन के गुर’’ भी सीखे। साथ ही जल राजदूतों ने विश्व शौचालय काॅलेज का भ्रमण कर ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस एवं गंगा एक्शन परिवार के माध्यम से जल प्रबंधन, जल की स्वच्छता एवं पर्यावरण स्वच्छता में सुधार लाने हेतु किये जा रहे व्यापक प्रयासों, विचारों एवं अनुभवों का आदान-प्रदान किया।
जीवा के विशेषज्ञों ने जल संरक्षण एवं स्वच्छता पर बनायी शार्टफिल्मों एवं पाठ्यक्रमों के माध्यम से भारत की जल समस्यां के विषय में जल राजदूतों को अवगत कराया ताकि मिलकर इस वैश्विक समस्यां का समाधान किया जा सके।
अफ्रीकी देशों से आये वैज्ञानिक अब्देलहैम एडीएस, केन्या फिलिप विल्सन, केन्या, वेस्ले किपोनो, अस्ब्दिहाकीम शेख मोहम्मद, रामबोसालामा, मेडागास्कर गणराज्य, एंडरसन फिलिपो, मलावी, ग्रेगरी ए सी, मवाले, सूश्री हन्ना, एमएस मेमोरी, मवाले, इब्राहिम शेहू, मोसेस फ्रांसिस नाइजीरिया, इग्बा मेथियास नाइजीरिया, नसीरू एम डांगे नाइजीरिया, सुश्री अर्न थेरेसे मलावी, नांगु नगुसा तंजानिया, सोंडा सिनी जिदला तंजानिया, मैथ्यूज जाम्बिया एवं अन्य जल विशेषज्ञों एवं जल राजदूतों ने संायकालीन परमार्थ गंगा आरती और हवन में सहभाग किया। उन्होने यहां पर सीखा की आस्था आधारित व्यवहार से भी विलक्षण परिवर्तन हो सकता है। वैज्ञानिकों ने परमार्थ गंगा तट पर प्रतिदिन उपस्थित होने वाले सैंकड़ों श्रद्धालुओं को आपने आध्यात्मिक गुरू से प्रेरित होकर पर्यावरण एवं जल के लिये संकल्प करते देखा वे इससे अत्यधिक प्रभावित हुये।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने अपने लाइव संदेश में कहा, ’’अफ्रीका को मानव सभ्यता की जन्मभूमि माना जाता है और भारत मानव संस्कारों की भूमि है मुझे लगता है अब दोनों देशों के जल विशेषज्ञ मिलकर इस वैश्विक जल समस्या का समाधान अवश्य खोज लेंगे। उन्होने कहा कि अफ्रीकी संस्कृति विविधता की संस्कृति है और भारत की संस्कृति विविधता में एकता की संस्कृति है, वसुधैव कुटुम्बकम की संस्कृति हैै दोनों संस्कृतियां मिलकर एक नई जल संस्कृति को जन्म देगी जो दुनिया के लिये मिसाल बनेगी। स्वामी जी ने कहा कि जल समस्या व्यक्तिगत नहीं बल्कि वैश्विक समस्या है अतः समाधान भी वैश्विक स्तर पर होने चाहिये। जल वैज्ञानिक यह घोषणा कर रहे है कि भारत में 2030 तक भूजल स्तर वर्तमान समय से आधा हो जायेगा और 2040 तक विश्व का भूजल स्तर भी तीव्र वेग से कम होता जायेगा इसलिये हमें प्रयास भी क्रान्ति के रूप में करने चाहिये। जल के बिना सृष्टि पर किसी भी जीव के जीवन की कल्पना करना असंभव है। वर्तमान समय में जीवन आधारित आवश्यकतायें स्वच्छ जल और शुद्ध वायु दोनों समस्याओं का हल वृक्षारोपण में निहित है। जब तक पर्याप्त मात्रा में पृथ्वी पर वृक्ष मौजूद थे दोनों समस्यायें भी नही थी जब से वृक्षों को काटकर कंक्रीट के जगंल खड़े हुये समस्यायें भी बढ़ती गयी। अब वृक्षों की बलि नहीं बल्कि वृक्षों के लिये बलिदान का समय है तभी हम भावी पीढ़ियों के लिये प्राकृतिक सम्पदा सुरक्षित रख सकते है।’’
प्रोफेसर डाॅ डी एस आर्य ने कहा कि ’’जल के संरक्षण के लिये तकनीकी, मार्गदर्शन, सहकारिता और जन सहभागिता नितांत आवश्यक है। जल का अशुद्ध होना प्रकृति प्रदत्त समस्या नहीं मानव निर्मित समस्या है। मानव व्यवहार में परिवर्तन कर कुछ हद तक हम समाधान प्राप्त कर सकते है।’’
केन्या से आये जल विशेषज्ञ फिलिप विल्सन ने कहा, ’’जहां तक मैने जाना कि भारत की जल समस्या के लिये तकनीकी के साथ जागरूकता नितांत आवश्यक है। विचारों में परिवर्तन के पश्चात ही लोग समस्याओं को जानेगे और फिर तकनीकी को अमल मंे ला सकते है। जब तक यह समझ में नहीं आता की समस्या का उद्भव क्या है तब तक समाधान भी कारगर सिद्ध नहीं हो सकता अतः समाधान से पहले समस्याओं पर गैर करना जरूरी है।’’
नाइजीरिया से आये प्रोफेसर ग्रेगरी ए सी ने जीवा द्वारा स्वच्छता एवं शौचालय के लिये चलाये जा रहे अभियान की सराहना करते हुये कहा कि निश्चित ही रोचकता से पूर्ण जागरूकता का अभियान है। उन्होने परमार्थ गंगा आरती में व्यतित किये पलों को अपनी तीन सप्ताह की भारत यात्रा का सबसे यादगार समय बताया और कहा कि जब भी भारत की यात्रा होगी उसमें हिमालय होम ऋषिकेश का प्रवास अवश्य होगा।’’
अफ्रीकी जल राजदूतों के दल ने स्वामिनी आदित्यनन्दा सरस्वती , नन्दिनी त्रिपाठी , प्रोफेसर डाॅ डी एस आर्य, राजेन्द्र बोहरा, श्रुति पंत , सैमुअल, टोपो, विशाल एंव परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों के साथ विश्व स्तर पर स्वच्छ जल की आपूर्ति की कामना करते हुुये वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन्न की। सभी ने पूज्य स्वामी जी द्वारा कराये जाने वाले जल संरक्षण के संकल्प को स्मरण करते हुये जल के लिये मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया। परमार्थ परिवार के सदस्यों ने गंगा तट पर जल राजदूतों को शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया जिसे आईआईटी रूड़की के प्रांगण में रोपित किया जायेगा।
अफ्रीकी जल राजदूत परमार्थ गंगा आरती से अत्यधिक प्रभावित हुये। उन्होने इस सत्र को यादगार बताता। पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने एवं जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव डॅा साध्वी भगवती सरस्वती जी ने अमेरीका यात्रा के दौरान अफ्रीकी जल राजदूतों के साथ फोन पर वार्तालाप की और ’वाटर जर्नी टू वल्र्ड जर्नी’ के लिये सभी को पुनः परमार्थ आने के लिये आमंत्रण दिया। दल के सदस्यों ने प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि इतनी व्यस्तता के बाद भी स्वामी जी एवं साध्वी जी ने उनसे वार्तालाप किया और पुनः आने का आमंत्रण दिया। आमंत्रण स्वीकार करते हुये दल के सदस्यों ने जल के लिये गंगा और नील नदियों के लिये मिलकर कार्य करने की इच्छा व्यक्त की। इस सम्मेलन में आईआईटी रूड़की के प्रोफेसर एवं छात्र उपस्थित थे।
इस अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में केन्या, युगांडा, तंजानिया, लाइबेरिया, नाइजीरिया, जाम्बिया, नामीबिया, मोजाम्बिक, मेडागास्कर अन्य अफ्रीकी देशों के जल विशेषज्ञों ने सहभाग किया।
इस सम्मेलन में आईआईटी रूड़की के जल विज्ञान विभाग के प्रमुख, प्रोफेसर डाॅ डी एस आर्य के मार्गदर्शन में विश्व के 13 देशों के 25 विश्व स्तरीय जल राजदूत, जल वैज्ञानिक एवं विशिष्ट अधिकारियों ने सहभाग किया।
अफ्रीकी देशों से आये जल राजदूतों के दल ने परमार्थ निकेतन में वेद मंत्र, प्राणायाम, ध्यान, सूर्य नमस्कार, योग आसनों का अभ्यास कर ’’जल प्रबंधन के साथ जीवन प्रबंधन के गुर’’ भी सीखे। साथ ही जल राजदूतों ने विश्व शौचालय काॅलेज का भ्रमण कर ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस एवं गंगा एक्शन परिवार के माध्यम से जल प्रबंधन, जल की स्वच्छता एवं पर्यावरण स्वच्छता में सुधार लाने हेतु किये जा रहे व्यापक प्रयासों, विचारों एवं अनुभवों का आदान-प्रदान किया।
जीवा के विशेषज्ञों ने जल संरक्षण एवं स्वच्छता पर बनायी शार्टफिल्मों एवं पाठ्यक्रमों के माध्यम से भारत की जल समस्यां के विषय में जल राजदूतों को अवगत कराया ताकि मिलकर इस वैश्विक समस्यां का समाधान किया जा सके।
अफ्रीकी देशों से आये वैज्ञानिक अब्देलहैम एडीएस, केन्या फिलिप विल्सन, केन्या, वेस्ले किपोनो, अस्ब्दिहाकीम शेख मोहम्मद, रामबोसालामा, मेडागास्कर गणराज्य, एंडरसन फिलिपो, मलावी, ग्रेगरी ए सी, मवाले, सूश्री हन्ना, एमएस मेमोरी, मवाले, इब्राहिम शेहू, मोसेस फ्रांसिस नाइजीरिया, इग्बा मेथियास नाइजीरिया, नसीरू एम डांगे नाइजीरिया, सुश्री अर्न थेरेसे मलावी, नांगु नगुसा तंजानिया, सोंडा सिनी जिदला तंजानिया, मैथ्यूज जाम्बिया एवं अन्य जल विशेषज्ञों एवं जल राजदूतों ने संायकालीन परमार्थ गंगा आरती और हवन में सहभाग किया। उन्होने यहां पर सीखा की आस्था आधारित व्यवहार से भी विलक्षण परिवर्तन हो सकता है। वैज्ञानिकों ने परमार्थ गंगा तट पर प्रतिदिन उपस्थित होने वाले सैंकड़ों श्रद्धालुओं को आपने आध्यात्मिक गुरू से प्रेरित होकर पर्यावरण एवं जल के लिये संकल्प करते देखा वे इससे अत्यधिक प्रभावित हुये।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने अपने लाइव संदेश में कहा, ’’अफ्रीका को मानव सभ्यता की जन्मभूमि माना जाता है और भारत मानव संस्कारों की भूमि है मुझे लगता है अब दोनों देशों के जल विशेषज्ञ मिलकर इस वैश्विक जल समस्या का समाधान अवश्य खोज लेंगे। उन्होने कहा कि अफ्रीकी संस्कृति विविधता की संस्कृति है और भारत की संस्कृति विविधता में एकता की संस्कृति है, वसुधैव कुटुम्बकम की संस्कृति हैै दोनों संस्कृतियां मिलकर एक नई जल संस्कृति को जन्म देगी जो दुनिया के लिये मिसाल बनेगी। स्वामी जी ने कहा कि जल समस्या व्यक्तिगत नहीं बल्कि वैश्विक समस्या है अतः समाधान भी वैश्विक स्तर पर होने चाहिये। जल वैज्ञानिक यह घोषणा कर रहे है कि भारत में 2030 तक भूजल स्तर वर्तमान समय से आधा हो जायेगा और 2040 तक विश्व का भूजल स्तर भी तीव्र वेग से कम होता जायेगा इसलिये हमें प्रयास भी क्रान्ति के रूप में करने चाहिये। जल के बिना सृष्टि पर किसी भी जीव के जीवन की कल्पना करना असंभव है। वर्तमान समय में जीवन आधारित आवश्यकतायें स्वच्छ जल और शुद्ध वायु दोनों समस्याओं का हल वृक्षारोपण में निहित है। जब तक पर्याप्त मात्रा में पृथ्वी पर वृक्ष मौजूद थे दोनों समस्यायें भी नही थी जब से वृक्षों को काटकर कंक्रीट के जगंल खड़े हुये समस्यायें भी बढ़ती गयी। अब वृक्षों की बलि नहीं बल्कि वृक्षों के लिये बलिदान का समय है तभी हम भावी पीढ़ियों के लिये प्राकृतिक सम्पदा सुरक्षित रख सकते है।’’
प्रोफेसर डाॅ डी एस आर्य ने कहा कि ’’जल के संरक्षण के लिये तकनीकी, मार्गदर्शन, सहकारिता और जन सहभागिता नितांत आवश्यक है। जल का अशुद्ध होना प्रकृति प्रदत्त समस्या नहीं मानव निर्मित समस्या है। मानव व्यवहार में परिवर्तन कर कुछ हद तक हम समाधान प्राप्त कर सकते है।’’
केन्या से आये जल विशेषज्ञ फिलिप विल्सन ने कहा, ’’जहां तक मैने जाना कि भारत की जल समस्या के लिये तकनीकी के साथ जागरूकता नितांत आवश्यक है। विचारों में परिवर्तन के पश्चात ही लोग समस्याओं को जानेगे और फिर तकनीकी को अमल मंे ला सकते है। जब तक यह समझ में नहीं आता की समस्या का उद्भव क्या है तब तक समाधान भी कारगर सिद्ध नहीं हो सकता अतः समाधान से पहले समस्याओं पर गैर करना जरूरी है।’’
नाइजीरिया से आये प्रोफेसर ग्रेगरी ए सी ने जीवा द्वारा स्वच्छता एवं शौचालय के लिये चलाये जा रहे अभियान की सराहना करते हुये कहा कि निश्चित ही रोचकता से पूर्ण जागरूकता का अभियान है। उन्होने परमार्थ गंगा आरती में व्यतित किये पलों को अपनी तीन सप्ताह की भारत यात्रा का सबसे यादगार समय बताया और कहा कि जब भी भारत की यात्रा होगी उसमें हिमालय होम ऋषिकेश का प्रवास अवश्य होगा।’’
अफ्रीकी जल राजदूतों के दल ने स्वामिनी आदित्यनन्दा सरस्वती , नन्दिनी त्रिपाठी , प्रोफेसर डाॅ डी एस आर्य, राजेन्द्र बोहरा, श्रुति पंत , सैमुअल, टोपो, विशाल एंव परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों के साथ विश्व स्तर पर स्वच्छ जल की आपूर्ति की कामना करते हुुये वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन्न की। सभी ने पूज्य स्वामी जी द्वारा कराये जाने वाले जल संरक्षण के संकल्प को स्मरण करते हुये जल के लिये मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया। परमार्थ परिवार के सदस्यों ने गंगा तट पर जल राजदूतों को शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया जिसे आईआईटी रूड़की के प्रांगण में रोपित किया जायेगा।
अफ्रीकी जल राजदूत परमार्थ गंगा आरती से अत्यधिक प्रभावित हुये। उन्होने इस सत्र को यादगार बताता। पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने एवं जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव डॅा साध्वी भगवती सरस्वती जी ने अमेरीका यात्रा के दौरान अफ्रीकी जल राजदूतों के साथ फोन पर वार्तालाप की और ’वाटर जर्नी टू वल्र्ड जर्नी’ के लिये सभी को पुनः परमार्थ आने के लिये आमंत्रण दिया। दल के सदस्यों ने प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि इतनी व्यस्तता के बाद भी स्वामी जी एवं साध्वी जी ने उनसे वार्तालाप किया और पुनः आने का आमंत्रण दिया। आमंत्रण स्वीकार करते हुये दल के सदस्यों ने जल के लिये गंगा और नील नदियों के लिये मिलकर कार्य करने की इच्छा व्यक्त की। इस सम्मेलन में आईआईटी रूड़की के प्रोफेसर एवं छात्र उपस्थित थे।

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