ऋषिकेश। उत्तराखण्ड सरकार ने संयोजित तरीके से शहर बसाने के लिए हरिद्वार- रुड़की विकास प्राधिकरण का गठन किया था। लेकिन प्राधिकरण अवैध निर्माण को लेकर आंखे बंद किये हुए है। हरिद्वार- रुड़की विकास प्राधिकरण के अन्तगर्त आने वाले ऋषिकेंश में खाना पूर्ति के लिए प्राधिकरण से निर्माण को सीज कर दिया लेकिन विभाग की सील लगने के बाद भी निर्माण बादस्तूर जारी है यह विभाग की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
धर्मनगरी व तीर्थनगरी हरिद्वार-ऋषिकेश में रसूखदारों और पैसे वालों के सामने हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण बौना साबित होता नजर आ रहा है। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण अवैध निर्माण पर लगाम लगाने पर फेल होती नजर आ रही है। हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के द्वारा अवैध रूप से खड़ी इमारतें सीज करने के बावजूद भी गुपचुप तरीके से निर्माण बदस्तूर जारी रहता है, इससे साफ जाहिर होता है कि हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की बिल्डरों से सांठगांठ है और अधिकारी उक्त अवैध निर्माण पर रोक लगाने एवं कार्यवाही करने से कतराते हैं। उस स्थान पर जाने से भी डरते हैं। तीर्थनगरी ऋषिकेश लक्ष्मण झूला व धर्मनगरी हरिद्वार गंगा तट के किनारे कई जगहों पर अवैध निर्माणों की बढ़ा आ गई है। अब देखना यह होगा कि त्रिवेंद्र सरकार इस अवैध निर्माण पर क्या कार्यवाही करती है जिस तरह से तीर्नथनगरी और धर्म नगरी में अवैध निर्माण से बन रही ईमारते और बिल्डिरों के खिलाफ क्या कार्यवाही करती हैं।
हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट ने गंगा किनारे निर्माण पर रोक लगा दी है और ग्रीन ट्यूबनल ने भी निमार्ण पर मनाही की हुई है। लेकिन हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकारण पर क्या ग्रीन ट्यूबनल, हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के आदेश लागू नहीं होते कि गंगा किनारे अवैध निर्माण जारी हैं।


Post A Comment: