रुड़की। अक्सर सुनने को मिलता है कि फलां जगह विवाह समारोह या अन्य किसी खुशी के आयोजन में की जा रही हर्ष फायरिंग में गोली लगने से किसी व्यक्ति की मौत हो गयी। इसे देखते हुए पुलिस-प्रशासन द्वारा लोगों को कार्रवाई की चेतावनी देते हुए हर्ष फायरिंग से परहेज के निर्देश दिए जाते रहे हैं,किंतु रुड़की तहसीलके दो राजस्व अमीनों पर शायद यह निर्देश लागू नही होते। इन दोनों ने आज अपर तहसीलदार के सेवानिवृत्ति समारोह में पिस्टल से फायरिंग कर रुड़की तहसील परिसर को हिला डाला। दिलचस्प यह कि इस दौरान मौके पर मौजूद तमाम पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी चुप्पी साधे बैठे रहे।दरअसल अपर तहसीलदार अबरार हुसैन के रिटायरमेंट पर विदाई समारोह का आयोजन आज तहसील की दूसरी मंजिल स्थित लेखपाल कक्ष में किया गया था। इसके तुरंत बाद शाम लगभग साढ़े पांच बजे यहां मौजूद ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल ने सिविल लाइन में जीरो जोनव अतिक्रमण को लेकर व्यापारियों के साथ बैठक शुरू की। उधर ढोल की थाप के साथ राजस्व विभाग के अधिकारी व कर्मचारी अबरार हुसैन को मालाएं डालकर साथ ले नीचे तहसील प्रांगण में पहुंचे। इस दौरान दोनों राजस्वकर्मियों ने पिस्टलों से हवा में ताबड़तोड़ हर्ष फायरिंग की तो तहसील में सनसनी फैल गयी। गोली इन्होंने छत की ओर चलाई जो यहां मौजूद कुछ पत्रकारों व अन्य लोगों को लगने से बाल बाल बची। दिलचस्प बात यह कि फायरिंग के दौरान तहसीलदार मनजीत सिंह गिल भी इनके पास ही खड़े थे पर उन्होंने भी इस गलत काम पर कोई एक्शन रिएक्शन नही लिया। इधर जहां यहां मौजूद आम लोगों में हड़कम्प मच गया,वहीं हैरानी की बात यह कि ऊपर बैठक में मौजूद ज्वाइंट मजिस्ट्रेट व पुलिस अधिकारियों को शायद इस ताबड़तोड़ फायरिंग का बहुत कम शोर सुनाई दिया। पहले जेएम के अर्दली और बाद में एएसडीएम प्रेमलाल ने छज्जे पर आकर फायरिंग करने वालों को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट द्वारा ऊपर बुलाये जाने की जानकारी दी,लेकिनयह लोग तब ऊपर नही गए। बाद में जेएम से मिले हों और उन्होंने कोई कार्रवाई की हो तो पता नही। जहां तक घटना को लेकर प्रशासनिक पक्ष की बात है तो दैनिक रुड़की से बातचीत में एएसडीएम प्रेमलाल ने इतना कहा कि दोनों कर्मियों की पहचान की जा रही है और कार्रवाई कीजायेगी। वैसे जहां तक पहचान की बात है तो दोनों की पहचान सबके सामने उजागर हो चुकी है और मौके के कई वीडियो भी मौजूद हैं। दोनोंके नाम अमरदीप व तौसीफ बताये गए हैं। जिस हिसाब से पिस्टल इन दोनों ने डोरी के साथ लगा रखे थे,उससे वह लाइसेंसी ही लग रहे थे। खैर देखना होगा कि विभिन्न जरियों से शस्त्र दुरुपयोग के मामले सामने आने पर शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर देने वाले ऊर्जावान ईमानदार जिलाधिकारी दीपक रावत दोनों के शस्र यदि लाइसेंसी हैं तो इस दुरुपयोग को लेकर निरस्त करते हैं या नही? या फिर प्रशासन के अन्य आला अफसर दोनों के खिलाफ क्या कार्रवाई करते हैं ? या फिरसरकारी कर्मियों पर ऐसे मामलों में कोई नियम निर्देश लागू ही नहीहोता?

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