प्रदेश के सहकारिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉक्टर धन सिंह रावत की अध्यक्षता में आईसीएम राजपुर रोड में सहकारिता विभाग की योजनाओं की समीक्षा बैठक सम्पन्न हुई.
बैठक में डॉक्टर धन सिंह रावत ने प्राथमिक कृषिऋण सहकारी समितियों के व्यवसायिक विकास हेतु एनसीडीसी द्वारा प्रस्तावित परियोजना के डीपीआर का अवलोकन के दौरान सम्बन्धित एजेंसी को एनसीडीसी से मार्गदर्शन हेतु लगातार समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए.
उन्होंने राज्य को-आपरेटिव बैंक के प्रदेश एवं जिलाध्यक्षों तथा को-आपरेटिव फैडरेशन के अध्यक्ष, पंचायत प्रतिनिधियों, सहकारिता विभाग के अधिकारियों, सामान्य प्रबन्धक एवं प्रबन्धक को-आपरेटिव तथा प्रबन्धक सहकारी बैंकों से भी क्षेत्र से प्राप्त फीडबैक को परियोजना में शामिल करने के निर्देश दिए.
दीनदयाल उपाध्याय किसान कल्याण योजना को पलायन रोकने का सशक्त माध्यम बताते हुए रावत ने योजना में अधिकाधिक किसानों को ऋण देकर उनकी आय दोगुना करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के निर्देश दिए.
उन्होंने आईसीडीपी परियोजना को रेखीय विभागों यथा डेरी, उद्यान, कृषि के विशेषज्ञ अधिकारियों की राय से ठोस रूप में तैयार करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि विगत दिनों केन्द्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह जी द्वारा योजना के लिए हर सम्भव सहयोग का आश्वासन दिया गया है. डॉक्टर रावत ने कृषि, उद्यान, सहकारिता, पशुपालन तथा दुग्ध विकास की योजनाओं को समन्वित करते हुए समेकित विकास परियोजना तैयार करने के निर्देश दिए.
डॉक्टर रावत ने उत्तराखण्ड में दुग्ध विकास की पर्याप्त सम्भावना बताते हुए जानकारी दी कि 26 जनवरी से कामधेनु योजना का शुभारम्भ करने की जानकारी दी. योजना के शुरुआत में लाटरी सिस्टम से एक हजार पशुपालकों को लाभान्वित किया जाएगा जिनसे सरकारी डेरी को दुग्ध उत्पादन का 90 प्रतिशत हिस्सा सरकारी डेरी को बेचने करने की शर्त शामिल है. योजना के तहत लाभान्वित पशुपालकों को निशुल्क वेटनरी सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी.
उन्होंने आपदा से प्रभावित होने वाले काश्तकारों पर देय ऋणों की माफी पर भी विचार कराने पर चर्चा की. उन्होंने कहा कतिपय ऐसे किसान जिनकी माली हालत ठीक नहीं है के ऋण की प्रतिपूर्ति अन्य माध्यमों से करने हेतु प्रस्ताव उनकी जानकारी में लाई जाए. उन्होंने किसानों के बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने हेतु को-आपरेटिव बैंक से वर्तमान मे दिए जाने वाले शिक्षा ऋण की सीमा बढ़ाने और ब्याज दर कम करने की सम्भावना पर भी चर्चा की. वर्तमान में को-आपरेटिव बैंक द्वारा किसानों के बच्चों के शिक्षा हेतु 7 लाख तक ऋण दिया जाता है, जिसकी सीमा स्वदेश में 15 लाख तथा विदेश में शिक्षा मामले में 30 लाख तक करने पर विचार किया गया है जिसके लिए दो सदस्य की कमेठी गठित करने के निर्देश दिए.
देनदारी पर चर्चा के दौरान सहकारिता मंत्री ने बताया कि देनदारी के 24 करोड़ की धनराशि सरकार द्वारा अनुपूरक बजट में प्राप्त हो गयी है तथा 26 करोड़ की धनराशि वित्तीय वर्ष के अन्त में प्राप्त हो जाएगी. उन्होंने सभी बैंकर्स से विभिन्न योजनाओं में प्राप्त होने वाले धन को को-आपरेटिव बैंकों में जमा कराने के लिए सम्बन्धित विभागों से व्यक्तिगत सम्पर्क करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि जहां पर इस कार्य में उनकी सहयोग की आवश्यकता है सम्बन्धित बैंक अधिकारी उनसे सीधे सम्पर्क कर सकते हैं. उन्होंने शासन स्तर पर स्वयं भी पहल का आश्वासन दिया.
उन्होंने प्राथमिक बहुउद्देशीय कृषि ऋण सहकारी समितियों की समीक्षा के दौरान कहा कि जो समितियां अनुपयोगी हैं, उन्हें निकट की सहकारी समिति में मर्ज कर दिया जाए. उन्होंने कर्नाटक की तर्ज पर समितियों को मार्केटिंग सोसाईटी के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए. उन्होंने समितियों को रोजगार से जोड़ने के लिए शहद व्यवसाय तथा क्षेत्रीय उत्पादों पर आधारित व्यवसाय को बढ़ावा देने के निर्देश दिए. उन्होंने समितियों में पारदर्शिता लाने के लिए 31 मार्च, 2018 तक समस्त समितियों को कम्प्यूटराइज्ड करने तथा शतप्रतिशत किसानों को क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने के लक्ष्य को पूरा करने के निर्देश दिए.
उन्होंने प्रत्येक जनपद में महिला सहकारी बैंक शाखाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए इनके स्थापना के लक्ष्य को इस वित्तीय वर्ष तक पूरा करने के निर्देश दिए.
बैठक में राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष दान सिंह, अध्यक्ष को-आपरेटिव फेडरेशन घनश्याम नौटियाल, सहकारिता के निबन्धक बी.एम.मिश्रा, क्षेत्रीय निदेशक एनसीडीसी राकेश दुआ प्रबन्ध निदेशक राज्य सहकारी बैंक दीपक कुमार अपर निबन्धक ईरा उप्रेती, संयुक्त सचिव प्रदीप जोशी, उप निबन्धक एमपी त्रिपाठी सहित सामान्य प्रबन्धक जिला सहकारी बैंक एवं सहायक निबन्धक उपस्थित थे.


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