चालू वित्तीय वर्ष में उत्तराखण्ड से स्वास्थ्य योजनाओं के संचालन के लिए 411 करोड़ रुपये की कार्य योजना बनाकर केन्द्र को भेजी गई थी। जिसके बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने राज्य को भरपूर बजट जारी किया है, मगर अब तक इस साल जनवरी माह तक एनएचएम योजना से मात्र 150 करोड़ ही खर्च हो पायें हैं। सवाल यह उठता है कि वित्तीय वर्ष के 10 माह में मात्र 150 करोड़ ही खर्च हो पाया है तो 411 करोड़ की कार्य योजना कैसे समय पर पूरी हो पायेगी और बजट पूरी तरह कैसे खर्च हो सकेगा, जबकि वित्तीय वर्ष के मात्र दो माह बाकी रह गए हैं। इसलिए इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है कि यह कार्य योजना अपेक्षा के अनुरूप लक्ष्य हासिल कर पाये। इतना बजट तो तब खर्च हुआ है जब एनएचएम के तहत प्रदेश में काम करने वाले 3 हजार अफसरों व कार्मिकों के वेतन पर कुल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट का 9 प्रतिशत खर्च होता है। पिछले वित्तीय वर्ष में 423 करोड़ की कार्य योजना बनाकर भेजी गई थी जिसमें से मात्र 245 करोड़ खर्च हो पाया था। बजट के खर्च करने की गति को देखते हुए इसी माह एनएचएम के निदेशक युगल किशोर पंत ने जिला स्तर से संचालित सभी कार्यक्रमों के जिला कार्यक्रम प्रबन्धन ईकाई व अधिकारियों, कार्यक्रम प्रबन्धक, सलाहकार, फैसिलिटेटर व काॅडीनेटर आदि को पत्र भेजकर भेजी गई आरओपी के सापेक्ष पफरवरी व मार्च 2018 तक 80 से 95 प्रतिशत तक उपयोग करने के आदेश दिये थे। उन्होंने बजट खर्च को लेकर सख्त चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि स्वीकृत आरओपी का सही उपयोग नहीं किया जा रहा है और कार्यक्रमों में रूचि नहीं ली जा रही है। एमडी के इस लेटर के बाद एनएचएम की योजनाओं और कार्यक्रमों में कुछ तेजी आई है मगर परिणाम अभी अपेक्षा अनुरूप अब भी नहीं हैं। एनएचएम के तहत अनेक स्वास्थ्य योजनाएं राज्य में चल रही हैं। 31 मार्च तक एनएचएम का जितना भी बजट खर्च होगा उसी पर आने वाले साल की कार्य योजना का भविष्य भी निर्भर करेगा।
इसी माह जायेगी अगले साल की कार्य योजना
देहरादून। वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए उत्तराखण्ड से भेजे जाने वाली एनएचएम की कार्ययोजना पर तेजी से काम चल रहा है। स्टेट प्रोग्राम मैनेजर एमके मौर्या ने कहा कि एक सप्ताह में 2018-19 की कार्य योजना केन्द्र को भेज दी जायेगी ताकि एनएचएम की तहत प्रदेश को मिलने वाला बजट जल्द से जल्द आ सके। उन्होंने कहा कि आगामी वर्ष के लिए कोशिश यही है कि इस कार्य योजना को 2017-18 के मुकाबले केन्द्र से ज्यादा से ज्यादा बजट एनएचएम के तहत संचालित होने वाली स्वास्थ्य योजनाओं के लिए राज्य को मिल सके।
कार्य योजना बनाने वालों की मेहनत बेकार न जाएः युगल
देहरादून। एनएचएम उत्तराखण्ड के मिशन निदेशक युगल किशोर पंत ने कहा कि सूबे में स्वास्थ्य योजनाओं के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से कार्य योजना के अनुसार ही बजट मिलता है। प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारियों की अथाह मेहनत और प्रयासों से एनएचएम का बजट सूबे में लाते हैं। जिला स्तर पर स्वीकृत आरओपी का सही उपयोग करना वहां के अफसरों व कार्मिकों की जिम्मेदारी है। एनएचएम का काम स्वास्थ्य विभाग को पूरी तरह सहयोग करना है। उन्होंने कहा कि अगर एनएचएम के तहत स्वास्थ्य योजनाओं के लिए पैसा दिया जा रहा है तो उसके सही और तेजी से उपयोग के लिए भी जवाबदेही बनती है। उन्होंने कहा कि बजट खर्च में फिलहाल तेजी आई है और मार्च तक जो कार्य योजना बनाई गई थी उसका बजट काफी हद तक खर्च हो जायेगा।


Post A Comment: