मोरी में अब तक एक दर्जन बार मच चुका है अग्नि का तांडव    
उत्तरकाशी। मोरी ब्लाॅक के सांवणी गांव में गुरुवार देर रात अचानक आग लग गई। आग लगने से गांव के 39 मकान जलकर राख हो गए। जबकि 6 मकानों को आंशिक रूप से नुकसान हुआ है। ग्रामीणों की गोशालाओं में बंधे सैकड़ों मवेशियां जिंदा जल गईं। हालांकि आग से किसी भी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं है। गांव में पहुंचकर प्रशासन की टीम की ओर से राहत बचाव कार्य किया जा रहा है। 
अग्नि से पीडितों को मदद को लेकर रेडक्राॅस के चेयरमैन डा. रामचन्द्र उनियाल ने बताया कि रेडक्राॅस के स्वयं सेवक त्वरित राहत लेकर मोरी के लिये रवाना हो गये है। गनीमत रही कि इतने बडे अग्निकांड में मानवीय हानि नहीं हुयी हालांकि डेढ सौ से अधिक जानवरों कीइजलने की सूचना है। प्रशासन से मिली जानकाी के अनुसार अग्नि से 40 भेड-बकरियां, 24 गाय, 26 बैल, 5 खच्चर, जिंदा जलकर राख हो गये। 
उल्लेखनिय है कि मोरी विकास सखण्ड में मकानों में लगी आग की 12 वीं घटना है। यहां हर वर्ष अग्किांड की घटनाएं होती रहती है, लेकिन इन घटनाओं से आज तक न तो मोरी के ग्रामीणों ने सबक लिया और ना ही प्रशसन ने। जिससे मोरी में लगभग हर वर्ष करोडों की संपत्ति का नुकसान होता है।   
मिली जानकारी के अनुसार मोरी ब्लाॅक के सांवणी गांव में देर रात सरदार सिंह के मकान में अचानक आग लग गई। परिवार के सदस्य बाहर निकलकर अपनी जान बचाने में सपफल तो रहे, लेकिन मकान में लगी विकराल आग ने गांव के अन्य मकानों को चपेट में ले लिया। देखते ही देखते गांव के 39 मकान आग से पूरी तरह से जलकर राख हो गए। वहीं आग से गांव के अन्य 6 मकानों को भी आंशिक रूप से नुकसान हुआ है। आग से घरों में रखा ग्रामीणों का सारा सामान जलकर राख हो गया। इसके साथ ही गोशालाओं में बांधे कई मवेशियों की भी आग से जलकर मौके पर ही मौत हो गई।
घरों में लगी आग के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। आग के कारण बेघर हुए ग्रामीणों के सामने सिर छुपाने की समस्या पैदा हो गयी है। आग लगने से ग्रामीणों में अफरा तफरी का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों के समक्ष खद्यान्न समस्या उत्पन्न हो गई है। वहीं आग लगने की सूचना मिलने पर प्रशासन की ओर से रात्रि को ही राहत एवं बचाव दल मौके के लिए रवाना कर दिया था।
उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से करीब 200 किमी दूरी पर सावणी गांव है। यह गांव हिमाचल प्रदेश की सीमा से लगा है। जखोल गांव तक सड़क है, यहां से सावणी पहुंचने के लिए सात किमी पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। 
आग लगते ही ग्रामीण घरों से बाहर निकल आए। बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। जैसे-जैसे आग बढ़ती गई तो ग्रामीण अपने बच्चों के साथ खेतों की ओर भागे। पूरे गांव में चीख-पुकार मचने लगी। इसके बाद मवेशियों को भी बचाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक करीब दो सौ मवेशियां आग की चपेट में आ गईं। देवदार की लड़कियां होने के चलते आग बुझाने में ग्रामीणों के सभी प्रयास असपफल रहे। 
मध्यरात्रि करीब रात ढाई बजे जिला प्रशासन को गांव में आग लगने की सूचना मिली। प्रशासन और पुलिस की टीम सावणी गांव के लिए रवाना हुई। जिलाधिकारी डाॅ आशीष चैहान ने बताया कि राहत और बचाव टीम तथा प्रशासन की टीम को मौके पर भेजा गया।

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