देश के तीर्थों में हरिद्वार का विशेष महत्व है. हर की पौड़ी में डुबकी लगाने देश-दुनिया से लाखों लोग पहुंचते हैं. लेकिन गंगा घाटों और बाज़ारों में फैले अतिक्रमण ने हरिद्वार की सूरत बिगाड़ कर रख दी है.
कहने को हरिद्वार के बाज़ारों और गंगा के घाटों पर काफी जगह है. लेकिन अब आलम ये है कि दुकानदारों ने गंगा घाट और बाज़ार की सड़कों, सभी पर अतिक्रमण कर लिया है. दुकानें बनाकर उन्हें किराए पर चढ़ा दिया है. घाट पर जहां देखो वहां रेहड़ी वाले बैठे रहते हैं.
गंगा घाट से गुजर रहे राहगीर राम कुमार ने बताया कि यहां से निकलना दूभर हो गया है. तीज-त्योहार पर जब यहां लाखों श्रद्धालु एक साथ आते हैं, उस दौरान यहां से गुजरने में काफी दिक्कत होती है. यहां के निवासी किशन ने बताया कि पुलिस-प्रशासन के लिए व्यवस्था संभालना मुश्किल होता है. इस अतिक्रमण के कारण शहर की सूरत भी बिगड़ गई है.
अतिक्रमण हटाने के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी की जाती है. बड़ी-बड़ी दुकानें वहीं रहती हैं. ठेलों-गुमटियां पर चालान काट दिया जाता है. थोड़े दिन में ये गुमठी और ठेले वाले फिर सड़क पर लौट आते हैं.
हर की पैड़ी और बाज़ार की व्यवस्था नगर निगम के अंतर्गत आती है. जनता कहती है, निगम के कर्मचारियों की सांठगांठ से ही शहर में अतिक्रमण हो रहा है.
कहने को हरिद्वार के बाज़ारों और गंगा के घाटों पर काफी जगह है. लेकिन अब आलम ये है कि दुकानदारों ने गंगा घाट और बाज़ार की सड़कों, सभी पर अतिक्रमण कर लिया है. दुकानें बनाकर उन्हें किराए पर चढ़ा दिया है. घाट पर जहां देखो वहां रेहड़ी वाले बैठे रहते हैं.
गंगा घाट से गुजर रहे राहगीर राम कुमार ने बताया कि यहां से निकलना दूभर हो गया है. तीज-त्योहार पर जब यहां लाखों श्रद्धालु एक साथ आते हैं, उस दौरान यहां से गुजरने में काफी दिक्कत होती है. यहां के निवासी किशन ने बताया कि पुलिस-प्रशासन के लिए व्यवस्था संभालना मुश्किल होता है. इस अतिक्रमण के कारण शहर की सूरत भी बिगड़ गई है.
अतिक्रमण हटाने के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी की जाती है. बड़ी-बड़ी दुकानें वहीं रहती हैं. ठेलों-गुमटियां पर चालान काट दिया जाता है. थोड़े दिन में ये गुमठी और ठेले वाले फिर सड़क पर लौट आते हैं.


Post A Comment: