’व्यक्तित्व विकास एवं नैतिकता’’ प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारम्भ
ऋषिकेश, 25 फरवरी। परमार्थ निकेतन में ’’व्यक्तित्व विकास एवं नैतिकता’’ पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ हुआ। इस प्रशिक्षण कार्यशाला में राजस्थान राज्य के जल संसाधन एवं प्रबंधन विभाग के 30 इंजीनियरों, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के नेशनल सेन्टर फाॅर गुड गवर्नेंस के अधिकारियों ने सहभाग किया।
 ’’व्यक्तित्व विकास एवं नैतिकता’’ प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारम्भ परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, एनसीजीजी के कार्यक्रम निदेशक डाॅ बी एस बिष्ट, राजस्थान राज्य के जल संसाधन एवं प्रबंधन विभाग के 30 इंजीनियरों, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के नेशनल सेन्टर फाॅर गुड गवर्नेंस के अधिकारियों ने दीप प्रज्वलित कर किया।
 परमार्थ निकेतन में गंगा एक्शन परिवार एवं ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में कम्युनिकेशन स्किल, पर्यावरण शिक्षा, जल संसाधनों की स्वच्छता एवं सुरक्षा, वर्षा के जल का संचयन, नदियांे को निर्मल और अविरल बनाने एवं जल के पुनर्चक्रण पर विशेषज्ञों ने अपने विचार व्यक्त किये। 
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ’’व्यक्तित्व मनुष्य की पहचान है। अब हमें ऐसे व्यक्तित्व का निर्माण करना है जो प्रकृति के साथ ऐडजस्टमेण्ट (समायोजन) करे न कि प्रकृति को; पर्यावरण को अपने अनुसार ऐडजस्ट करें। प्रकृति और पर्यावरण को अपने सुविधानुसार ऐडजस्ट करके मनुष्य ने जल, वायु और सम्पूर्ण वातावरण को प्रदूषित कर दिया है। वैदिक काल में जब ऋषि-मुनि प्रकृति के अनुकूल कर्म करते थे तब न तो जल शोधक यंत्र की जरूरत थी न ही वायु शोधक यंत्र की। आज भी सृष्टि के पास वहीं सौन्दर्य मौजूद है आवश्यकता है तो उसे महसूस करने की और उसके प्रति मानवीय व्यवहार की। उन्होने कहा कि धरती पर जीवन के अस्तित्व को बनाये रखने के लिये प्रकृति के वास्तविक स्वरूप को बनाये रखना नितंात आवश्यक है।’’
जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव डाॅ साध्वी भगवती सरस्वती जी ने ’’भारतीय प्राचीन धर्मग्रन्थ में जल की महत्ता विषय में जानकारी देते हुये कहा कि जल स्वयं देवता है। सनातन धर्म में देवताओं को जल का अर्पण और पितरों का जल से तर्पण  किया जाता है अतः जल नहीं तो कल नहीं। उन्होने कहा कि जल, जीवन की प्रथम और अनिवार्य अवश्यकता है इसे प्रदूषण मुक्त करना हम सभी का नैतिक धर्म है।’’
 स्वामिनी आदित्यनन्दा सरस्वती जी, डाॅ राजेन्द्र बोहरा एवं अन्य विशेषज्ञों ने जल के संरक्षण, घटते भूजल स्तर एवं प्रदूषित होती देश की नदियों के विषय में अवगत कराया।
कार्यशाला का संचालन सुश्री नन्दिनी त्रिपाठी एवं सुश्री श्रुति पंत द्वारा किया गया। इस प्रशिक्षण सत्र में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के नेशनल सेन्टर फाॅर गुड गवर्नेंस के अधिकारी डाॅ भूपेन्द्र सिंह बिष्ट, अनील मिश्रा, राजस्थान राज्य के जल संसाधन प्रबंधन विभाग के इंजीनियर व्ही के शर्मा, अनीता जैन, प्रभा गुप्ता, आर सी मीना, सुरेश चन्द्र भोपड़ीया, विजय कुमार शर्मा, सौरभ ंिसंह, सुमीत कुमार, अशोक कुमार एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  
कार्यशाला के समापन अवसर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के सान्निध्य में स्वामिनी आदित्यनन्दा सरस्वती, सुश्री नन्दिनी त्रिपाठी, डाॅ राजेन्द्र बोहरा, सुश्री श्रुति पंत, सैमुअल, जेम्स टोपो, परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमार राजस्थान राज्य के जल संसाधन एवं प्रबंधन विभाग के 30 इंजीनियर, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के नेशनल सेन्टर फाॅर गुड गवर्नेंस के अधिकारियों ने विश्व में स्वच्छ जल की आपूर्ति हेतु वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन्न की। स्वामी जी महाराज  ने इंजीनियरों के दल को शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया और सभी को जल संरक्षण का संकल्प कराया। 
प्रशिक्षण के पश्चात सभी प्रशिक्षणार्थियों ने परमार्थ निकेतन की दिव्य गंगा आरती मंे सहभाग किया। उन्होने कहा कि परमार्थ निकेतन में आयोजित कार्यशाला का अनुभव अद्भुत था, यह आध्यात्मिक दृष्टिकोण के साथ तकनीकी रूप से भी अति महत्वपूर्ण है। इस प्रकार की कार्यशालाओं से जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है साथ ही पूज्य स्वामी जी के द्वारा प्राप्त  मोटिवेशन से हमें जल संरक्षण के क्षेत्र मंे कार्य करने की एक नयी दिशा प्राप्त हुई है।

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