प्रदेश में इस वित्तीय वर्ष में तमाम अवरोधों के बावजूद खनन विभाग बीते सालों की अपेक्षा अधिक राजस्व हासिल करने के मामले में बढ़त बनाए हुए है. विभाग को उम्मीद है कि इस वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक वह राजस्व लक्ष्य 550 करोड़ के करीब पहुंचने में कामयाब हो जाएगा.

प्रदेश में आबकारी के बाद खनन राजस्व प्राप्ति का सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरा है. प्रदेश में उप-खनिज बालू, बजरी, बोल्डर, सोप स्टोन, मैग्नेसाइट, लाइम स्टोन, स्टोन क्रेशर, स्क्रीनिंग प्लांट, प्लवराईजर प्लांट, उपखनिज भंडारण के 1,217 पट्टे, लाइसेंस आवंटित हैं.

बावजूद इसके बीते सालों में अवैध खनन, रवन्ने की ठोस प्रक्रिया न होने के चलते अपेक्षित राजस्व हासिल नहीं किया जा सका. पहली बार खनन विभाग इस दिशा में अच्छे राजस्व के साथ आगे बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है.

वित्तीय वर्ष 2016-17 में खनन विभाग ने कुल 325 करोड़ का राजस्व हासिल किया, जिसमें 15 फरवरी तक मात्र 263 करोड़ राजस्व ही हासिल हो पाया था.

वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए खनन विभाग को 550 करोड़ का टारगेट मिला है. इसमें इस माह 15 फरवरी तक खनन विभाग 322 करोड़ का राजस्व प्राप्त कर चुका है. ये राजस्व पिछले वर्ष की अपेक्षा 59 करोड़ अधिक है.

खनन विभाग इसे मैनुअल रवन्ना खत्म कर ई-रवन्ना शुरू करने का परिणाम बता रहा है. उपखनिज के अवैध परिवहन पर इससे सख्ती से लगाम लगी है. प्रदेश में ई-टेंडरिंग से भी अच्छा खासा राजस्व मिला है. ये राजस्व 322 करोड़ की अभी तक की राशि में शामिल नहीं किया गया है.

बहरहाल, 31 मार्च को खनन विभाग जब  इस वित्तीय वर्ष में प्राप्त राजस्व का आंकलन कर रहा होगा, तो आंकड़े पिछले 17 सालों में खनन से मिलने वाले सर्वाधिक राजस्व को दर्शा रहे होंगे. ये खनन विभाग के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी, तो अवैध खनन रोकने के प्रयासों को भी गति मिल सकेगी.

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