देहरादून। बड़े ही दुख के साथ हम आपको सूचित करते हैं कि आज सुबह एक असाधारण योगी और महान गुरू डॉ. जयदेवजी योगेन्द्र (27 अप्रैल, 1929- 16 फरवरी, 2018) का स्वर्गवास हो गया है। प्रबुद्ध व्यक्तित्वों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, योगविदों और जीवन के सभी क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने महान योगी को श्रृद्धांजलि दी। डॉ. जयदेव शास्त्रीय योग को आधुनिक युग में जीवंत करने वाले श्री योगेन्द्रजी के सुपुत्र और शिष्य थे, जिन्होंने वर्ष 1918 में द योग इंस्टिट्यूट (विश्व का सबसे पुराना संगठित योग केन्द्र) की स्थापना की थी। उनका संपूर्ण जीवन योग को समर्पित रहा। एक गुरू के रूप में उन्होंने योग को जीवन जीने के तरीके के रूप में अपनाया और भारत तथा विश्वभर के लोगों के बीच शास्त्रीय योग की जागरूकता फैलाने के लिये अथक परिश्रम किया। डॉ. जयदेव योगेन्द्र अपने पीछे अपनी पत्नी डॉ. हंसाजी योगेन्द्र, पुत्र श्री ऋषि योगेन्द्र और बहू श्रीमती प्रानी योगेन्द्र को छोड़ गये हैं। डॉ. जयदेव योगेन्द्र (एमए., पीएचडी.) ने योग शिक्षा और उपचार में उल्लेखनीय कार्य किया। योग में उनका सबसे महत्वपूर्ण योगदान है सम्ख्या- योग प्रणाली में बताये गये बुद्धि के भावों की पेशकश करना और पतंजलि शास्त्रीय योग का अभ्यास कराना। वर्ष 1955 में महाभारत के मोक्स परवन पर उनकी डॉक्टोरल थीसिस को हरगोबिंदास छात्रवृत्ति प्रदान की गई। वह भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी में सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च में प्रशासन समिति के सदस्य थे। सामान्य लोगों के दैनिक जीवन में शास्त्रीय योग के अनुप्रयोग के लिये किये गये उनके योगदान में कई ऐतिहासिक कार्यक्रम, विभिन्न प्रकाशन, शोध पत्र और संपादकीय देखने को मिले जिसमें विविध प्रकार की समस्याओं को कवर किया गया। द नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड टेªनिंक 1989 (एनसीईआरटी) ने उन्हें श्रीमती हंसाजी के साथ देश के विद्यालयों के लिये प्रथम मानक योग पाठ्यक्रम तैयार करने के लिये आमंत्रित किया था। उन्होंने हृदय की चिकित्सा, अस्थमा, ब्रॉन्काइटिस, मधुमेह, ऑर्थोपेडिक रोगों के लिये योग चिकित्सा के कई स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया, जिनके परिणाम कई अखबारों और पुस्तकों में प्रकाशित किये गये। डॉ. जयदेव योगेन्द्र ने 50 से अधिक पुस्तकों का लेखन, सह-लेखन और संपादन किया, जैसे योग साइक्लोपीडिया वॉल्यूम 1,2,3, योग सूत्रास ऑफ पतंजलि, योग थेरेपी इन अस्थमा, डायबिटीज एंड हार्ट डिसीज, इनसाइट्स थ्रू योग, आदि।
उन्होंने लाखों लोगों के जीवन में परिवर्तन किया। योग के सभी क्षेत्रों, जैसे शिक्षा, दर्शन-शास्त्र, योग मनोविज्ञान, योग तकनीक, शोध, आनुभविक प्रशिक्षण और योग अभ्यासों के मानकीकरण में उनके योगदान को विश्वभर में मान्यता मिली है।


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