सूबे के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रदेश की 12 हजार आशा कार्यकर्ताओं और लगभग 2100 एएनएम को दुर्घटना एवं अपंगता की स्थिति में दो लाख रुपये तक की बीमा योजना की घोषणा की. उन्होंने कहा कि जच्चा-बच्चा की प्रारम्भिक देखभाल की जिम्मेदारी आशा कार्यकत्रियों और एएनएम की होती है. जन स्वास्थ्य में इनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. इसके अलावा मुख्यमंत्री ने सभी एएनएम को टैबलेट देने की भी घोषणा की.

गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने यह ऐलान किए. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की आशा कार्यकत्रियों को वर्ष 2012-13 से रुकी हुई वार्षिक प्रोत्साहन धनराशि हेतु 33 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं. इससे प्रत्येक आशा कार्यकत्री को लगभग 25 हजार रुपये मिलेंगे.

चिकित्सा चयन बोर्ड अध्यक्ष डॉक्टर डीएस रावत ने बताया कि वर्तमान में चालू भर्ती प्रक्रिया में 481 चिकित्सकों का चयन और हुआ है. जिसमें से 193 महिला चिकित्सक और 86 विशेषज्ञ डॉक्टर सम्मिलित हैं. चिकित्सा महानिदेशक ने बताया कि चिकित्सा विभाग में 440 महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के पद रिक्त हैं, जिनमें से 293 पदों पर चयन कर लिया गया है और 380 पदों पर चयन हेतु विज्ञप्ति जारी कर दी गई है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाना राज्य सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में हैं. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बनने के बाद पहले वर्ष एक हज़ार डॉक्टरों की नियुक्ति का लक्ष्य रखा गया था और अब तक 1140 डॉक्टरों की नियुक्ति की जा चुकी है.


मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस की थीम है ‘प्रेस फॉर प्रोग्रेस’. प्रदेश में बाल लिंगानुपात में बेटियों की संख्या में 2011 की जनगणना के बाद वृद्धि तो हुई है, लेकिन इसको संतुलित करने के लिए व्यापक स्तर पर जन जागरूकता ज़रूरी है. 2011 में उत्तराखण्ड में बाल लिंगानुपात 890 था, जो वर्तमान में 934 तक पहुंच गया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि 2020 तक बाल लिंगानुपात को 950 से अधिक पहुंचाना होगा.

इस अवसर पर मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश, सचिव नितेश झा, अपर सचिव स्वास्थ्य युगल किशोर पंत, स्वास्थ्य महानिदेशक अर्चना श्रीवास्तव उपस्थित थे.

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