उत्तराखंड में त्रिवेंद्र सरकार की एक साल की उपलब्धियों में खनन विभाग को टॉप पर शुमार किया जा सकता है. प्रदेश में आबकारी विभाग के बाद खनन विभाग राजस्व प्राप्ति का सबसे बड़ा स्रोत है. इस साल खनन विभाग में ऑन लाइन ई निविदा का सफल प्रयोग किया और खनन क्षेत्रों की ई नीलामी से विभाग को करीब सात गुना अधिक राजस्व भी प्राप्त हुआ. खनन विभाग में ई निविदा के सफल प्रयोग के बाद अब आबकारी विभाग में इसे दोहराने की तैयारी चल रही है.

प्रदेश में उपखनिज बालू, बजरी, बोल्डर, सोप स्टोन, मैगनेसाईट, लाइम स्टोन, स्टोन क्रेशर, स्क्रीनिंग प्लांट, प्लवराईजर प्लांट, उपखनिज भंडारण के 1,217 पटटे, लाइसेंस आवंटित हैं. इसके बावजूद बीते सालों में अवैध खनन, रवन्ने की ठोस प्रक्रिया न होने के चलते अपेक्षित राजस्व हासिल नहीं किया जा सका, लेकिन इस वर्ष खनन विभाग ने मार्च मध्य तक ही राजस्व प्राप्ति के पिछले सारे रिकार्ड ध्वस्त कर दिए हैं.

साल 2016-17 में खनन विभाग ने कुल 325 करोड़ का राजस्व हासिल किया था. जबकि इस वर्ष 15 मार्च तक खनन विभाग 383 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त कर चुका है. पिछले साल के कुल राजस्व लक्ष्य से 58 करोड़ रुपये अधिक है.

खनन विभाग के निदेश विनय शंकर पांडेय ने बताया कि इस साल की सबसे बड़ी उपलब्धि राज्य में उपलब्ध खनन क्षेत्रों के आवंटन के लिए पहली बार ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया की शुरूआत करना रही. ई-टेंडरिंग के बाद इन खनन क्षेत्रों की ऑनलाइन नीलामी की गई. जो बेहद सफल रही. आगामी वित्त वर्ष में इससे शानदार परिणा देखने को मिलेंगे.


उन्होंने बताया कि  खनन विभाग में ई-नीलामी की प्रक्रिया अभी जारी है. हरिद्वार और नैनीताल जिलों के सात खनन पट्टों की ई-नीलामी हो चुकी है. इन पट्टों का आधार मूल्य 12 करोड़ 72 लाख रुपये था, लेकिन ऑनलाइन नीलामी में ये पट्टे करीब सात गुना अधिक 82 करोड़ 15 लाख रुपये में छूटे. अभी करीब सौ खनन पट्टों की नीलामी होनी बाकि है.

बहरहाल, 31 मार्च को खनन विभाग जब इस वित्तीय वर्ष में प्राप्त राजस्व का आंकलन कर रहा होगा, तो प्राप्त आंकड़ा पिछले 17 सालों में खनन से मिलने वाले सर्वाधिक राजस्व को दर्शा रहा होगा. ये खनन विभाग के लिए एक बड़ी उपलब्धि तो होगी ही और खनन में इस पारदर्शी व्यव्स्था का सरकार भी श्रेय जरूर लेगी.

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