ऋषिकेश,19मार्च । सुबह का वक्त, आंख मलते ही हाथों में बाल्टी लिए घर के बाहर निकलती महिलाएं। इनमें कुछ के साथ बच्चे और उनके घर के बड़े सदस्य भी। सभी घर से दूर पानी की टोटी के पास कतारबद्ध हो गए, जो घंटेभर बाद अपने घर पहुंचे। यह दृश्य शहर की विभिन्न बस्तियों में किसी दिन  भी देखा जा सकता है, क्योंकि यहां के लोग पानी के लिए परेशान होते रहते हैं। इनमें कुछ तो ऐसे होते हैं जो ठेले पर सामान के साथ  पानी लेकर जाते हैं। शायद यही वजह है कि इनसे यदि कोई पानी की कीमत पूछ लें तो उसे वह बूंद-बूंद का हिसाब दे देते हैं।इन लोगों के लिए गर्मी की दस्तक के साथ पेयजल की समस्या शुरु हो जाती है।इस मामले मे इस वर्ष भी कोई अपवाद साबित नही हुआ है।एक और जहां जल संस्थान ने अवैध कनेक्शनधारियों एवं बकायादारों के खिलाफ अभियान चला रखा है वहीं गरीब आदमी की समस्या पेयजल संकट को लेकर है।रोजमर्रा की जिंदगी मे पानी की कीमत इनसे बेहतर कोन जानता है।सुबह होते ही सरकारी नलों के बाहर लोगों की लम्बी कतारे लग जाती हैं।सुबह नो बजते ही पानी की टोटियां सूखने लगती है फिर इन्तजार होता है पानी आने का ।इस दौरान यदि घर के लिए पानी भरने मे देर हुई तो सारा काम चौपट।चन्द्रभागा बस्ती,सर्वहारा नगर,भैरव कालौनी आदि क्षेत्रों के लोगों की मानें तो फरवरी माह के समाप्त होते ही मौसम ने करवट क्या बदली पेयजल की किल्लत से उनके हलक सूखने शुरू हो गये।मार्च के प्रथम सप्ताह के बाद  समस्या विकट होती जा रही है, जो गर्मी के दिनों में मुश्किलें और बढ़ा सकती हैं।गर्मी के मौसम के ट्रेलर मे ही लोगों के होश फाख्ता शुरू होने शुरू हो गये हैं।उन्हें चिंता इस बात की भी सताने लगी है कि भीष्ण गर्मी के दौरान पेयजल संकट गहराया तो स्थिति क्या होगी।

गांवों के लोग पी रहे मीठा जहर


अधिकतर लोग इस बात से अंजान हैं कि वह हैंडपंपों से पानी की बजाय मीठा जहर पी रहे हैं, क्योंकि धरती पर बढ़ता प्रदूषण पाताल तक पहुंच गया है। शुद्ध माने जाने वाले गांवों के हैंडपंपों का पानी भी जहरीला होता जा रहा है। फ्लोराइड युक्त पानी से जहां फ्लोरिसिस बीमारी होने का खतरा है, वहीं पानी में नाइट्रेट की अधिक मात्रा से गर्भवती महिलाएं भी गंभीर बीमारी की चपेट में आ सकती हैं।  यह बात राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के तहत पानी की शुद्धता की कराई जा रही जांच मे सामने आई है।

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